Monday, September 28, 2026
⚡

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

100 रुपये की बचत से बदला जीवन:रांची के लापुंग की महिलाएं जैविक खेती से बनीं आत्मनिर्भर


लापुंग क्षेत्र की महिलाएं आज खेतों में अपनी नई पहचान बना रही हैं। जैविक खेती को जरिया बनाकर वे न सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने परिवारों के आर्थिक संबल की रीढ़ भी बन चुकी हैं। दाड़ी और देवगांव पंचायत की 500 से अधिक महिलाएं 3 से 10 एकड़ भूमि पर आधुनिक व जैविक पद्धति से फसलें उगाकर देशभर में आपूर्ति कर रही हैं। वे खेतों में केंचुआ खाद और जैविक खाद का ही प्रयोग करती हैं। महिलाओं का मानना है कि रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ जमीन नहीं बचेगी, इसलिए जैविक विकल्प ही सबसे बेहतर है। क्षेत्र में 10 से 15 महिलाओं के समूह बनाकर प्रशिक्षण लिया जाता है और जरूरत पड़ने पर सभी एक-दूसरे के खेतों में हाथ बंटाती हैं। समूह की महिलाएं हर सप्ताह 100 रुपए की बचत करती हैं। कभी पैसों की तंगी में जमीन गिरवी रखने को मजबूर रहने वाली ये महिलाएं अब पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं। सुनिता बांडो : खेती कर निजी स्कूल में पढ़ा रहीं बच्चों को : देवगांव पंचायत की सुनिता साढ़े तीन साल से जैविक खेती कर रही हैं। 3 एकड़ में खेती के साथ उनके पास 1 एकड़ में आम का बाग है, जिसकी पूरी फसल व्यापारी खेत से ही खरीद लेते हैं। फसल बीमा से सुरक्षा सुनिश्चित की है। कमाई से बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ा रही हैं। अनिमा तिर्की : 4 एकड़ में कर रहीं मल्टी-क्रॉपिंग : वर्ष 2013 में प्रशिक्षण लेकर जैविक खेती अपनाई। अब वे एक ही खेत में एक साथ दो फसलें उपजा रही हैं। व्यापारी सीधे खेत से ही तरबूज और शकरकंद उठा लेते हैं, बाकी उपज स्थानीय बाजार व सब्जी मंडी में बिकती है। समूह की बचत के कारण अब जमीन गिरवी रखने की नौबत खत्म हो गई है। सरस्वती देवी : 10 एकड़ में उगा रहीं उड़द, अरहर: 2012 से 2017 तक पति के साथ मुंबई में रहने के बाद सरस्वती गांव लौटीं और बंजर पड़ी जमीन को उपजाऊ बनाया। वर्ष 2024 में विधिवत प्रशिक्षण ले जैविक खेती शुरू की। आज वे 10 एकड़ से अधिक जमीन पर मडुआ, उड़द, अरहर और तिल उगा रही हैं। मडुआ की खेप देहरादून भेज चुकी हैं। महिला समूह का आत्मनिर्भरता मॉडल: समूह का आकार : 10 से 15 महिलाओं का क्लस्टर। {योगदान राशि : ₹100 प्रति सदस्य, प्रति सप्ताह। {ऋण का उद्देश्य : बच्चों की स्कूल फीस, बीज-खाद की खरीद, आपातकालीन चिकित्सा। {खाद निर्माण : स्थानीय स्तर पर केंचुआ खाद (वर्मीकंपोस्ट) व जैविक मिश्रण का उत्पादन। {सुरक्षा उपाय : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना/स्थानीय कृषि बीमा से प्राकृतिक जोखिम कवर।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles