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झारखंड में हर साल की तरह इस बार भी दुर्गापूजा को भव्य रूप देने में पूजा समितियां जुट गईं हैं। रांची, धनबाद, बोकारो और गोड्डा समेत तकरीबन हर जिले में लाखों रुपए आकर्षक पंडाल और प्रतिमाओं का निर्माण शुरू हो चुका है। कहीं इको-फ्रेंडली पूजा पंडाल, कालचक्र पंडाल में विराजेंगी मां दुर्गा की प्रतिमा, सुप्रीम कोर्ट जैसा भव्य पंडाल तो कहीं वाराणसी स्थित स्वर्वेद महामंदिर के रूप में तैयार हो रहा पंडाल लोगों को अभी से उत्सुक कर रहा है। धनसार में 1 लाख पौधों से बन रहा इको-फ्रेंडली पूजा पंडाल धनबाद के धनसार में इस बार दुर्गापूजा का पंडाल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगा। श्री श्री दुर्गा पूजा समिति, धनसार की ओर से लक्ष्मी नारायण विद्या मंदिर परिसर में करीब एक लाख पौधों से इको फ्रेंडली पंडाल तैयार किया जा रहा है। पंडाल में एरेका पाम, तुलसी, मनी प्लांट, स्नेक प्लांट और स्पाइडर प्लांट समेत कई तरह के पौधों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पंडाल पूजा के दौरान लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेगा। 17 लाख रुपए के बजट से पूजा का आयोजन
समिति के अनुसार, इस बार करीब 17 लाख रुपए के बजट से पूजा का आयोजन किया जा रहा है। इसमें करीब 9 लाख रुपए पंडाल, 2 लाख रुपए प्रतिमा, 2 लाख रुपए विद्युत सज्जा और 4 लाख रुपए से अधिक पूजा व अन्य खर्च के लिए निर्धारित किए गए हैं। पंडाल करीब 50 फीट ऊंचा होगा। इसके बाहरी हिस्से में भगवान जगन्नाथ के चेहरे की आकृति बनाई जाएगी। इसके लिए करीब 40 हजार बांस के छोटे-छोटे टुकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। पंडाल निर्माण की जिम्मेदारी लल्लू मालाकार को दी गई है, जबकि मां दुर्गा की प्रतिमा मूर्तिकार दुलाल पाल तैयार कर रहे हैं। हाथ फैलाए परी व उल्लू करेंगे स्वागत
धनबाद के भूली डी ब्लॉक हॉस्पिटल ग्राउंड में अब की बार दिव्य कालचक्र रूपी पंडाल में मां दुर्गा विराजेंगी। पंडाल के दाएं व बाएं दो उल्लू और बीच में हाथ फैलाए परी का स्वरूप आकर्षणका केंद्र बनेगा। श्री सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति कालचक्र थीम पर पंडाल बनवा रही है। बांस और रॉड की फ्रेमिंग कर फोम, फाइबर, प्लाई से पंडाल को आकार दिया जाएगा। दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष प्रिंस पासवान के अनुसार, 55 फीट चौड़े एवं 45 फीट ऊंचे कालचक्र पंडाल के भीतर कलाकृति श्रद्धालुओं को अपनी ओर काफी आकर्षित करेगी। खुशबू डेकोरेटर भूली और गोधर के उदय फ्लावर को पंडाल बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। पंडाल बनाने के लिए पश्चिम बंगाल से कारीगर बुलाए गए हैं। मां दुर्गा की मूर्ति सनातन दा बना रहे हैं। बांग्ला विधि से होती है मां दुर्गा की पूजा
इस बार दुर्गा पूजा का बजट 5.50 लाख रुपए है। 3.50 लाख पंडाल पर खर्च होगा। मां की मूर्ति 31 हजार की होगी। 90 हजार की लाइटिंग रहेगी। यहां बांग्ला विधि विधान से मां की पूजा की जाती है। सप्तमी से दशमी तक हलुआ, खीर, खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। यहां पर अष्टमी के दिन महाप्रसाद को ग्रहण करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। गोड्डा के कुरमन में सुप्रीम कोर्ट जैसा भव्य पंडाल
गोड्डा शहर से करीब तीन किलोमीटर दूर कुरमन गांव में इस बार दुर्गा पूजा खास अंदाज में मनाई जाएगी। यहां सुप्रीम कोर्ट की तर्ज पर एक भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है। महागामा, बारकोप, बरगच्छा हरियारी और लोहंडिया दुर्गा मंदिरों में भी पंडाल का काम शुरू हो गया है। कुरमन में बन रहा सुप्रीम कोर्ट के तर्ज पर पंडाल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा। पूजा समिति ने पंडाल निर्माण का काम एक महीने पहले ही शुरू कर दिया था। कारीगर इसे अंतिम रूप देने में जुटे हैं। पंडाल के साथ ही संथाली नृत्य, श्रीराम कथा और विशाल रावण पुतला दहन की तैयारियां भी जोर पकड़ रही हैं। कुरमन में साल 1995 से लगातार दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। इस साल पूजा को और भव्य बनाने के लिए डेढ़ महीने पहले ही ग्रामीणों और पूजा समिति के सदस्यों की बैठक हुई थी। इसमें आयोजन की रूपरेखा तय की गई। अब रोजाना शाम को तैयारियों की समीक्षा की जा रही है। रांची में पूजा की भव्य थीम ‘मणिद्वीप में आदिशक्ति’ तय रांची कचहरी रोड स्थित ऐतिहासिक बिहार क्लब दुर्गा पूजा समिति इस बार शारदीय नवरात्र पर श्रद्धालुओं के लिए नवरात्र एक अनूठा आध्यात्मिक और 11 अक्टूबर विजुअल अनुभव लेकर आ रही है। इस वर्ष समिति ने पूजा की भव्य थीम ‘मणिद्वीप में आदिशक्ति’ तय की है। पंडाल में प्रवेश करते ही भक्तों को साक्षात मणिद्वीप के दिव्य स्वरूप में मां दुर्गा के दर्शन होंगे। पंडाल की सबसे बड़ी खासियत इसका बाहरी स्वरूप होगा। करीब 65 फीट लंबे इस विशालकाय पंडाल का बाहरी ढांचा बंगाल में बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाली पारंपरिक टोकरियों, जिन्हें ‘झुरी’ कहा जाता है, से तैयार किया जा रहा है। टोकरियों की कलात्मक बनावट और भव्य विद्युत सज्जा (लाइटिंग) मिलकर पंडाल को बेहद मनमोहक लुक देंगी। आध्यात्मिक दर्शन के साथ-साथ पंडाल में आधुनिक तकनीक और मनोरंजन का भी तड़का लगाया गया है। पंडाल के भीतर विशेष रूप से ‘ड्रैगन की अद्भुत दुनिया’ तैयार की जा रही है, है, जो बच्चों के साथ-साथ युवाओं और बड़ों के लिए भी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगी। जिला स्कूल परिसर में बन रहा वाराणसी का स्वर्वेद महामंदिर रांची के श्रीरामलला पूजा समिति अपने तृतीय वर्ष में श्रद्धालुओं को भक्ति, आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति से जुड़ा भव्य अनुभव कराने की तैयारी में है। समिति की बैठक में इस वर्ष रांची जिला स्कूल परिसर में वाराणसी स्थित स्वर्वेद महामंदिर के प्रारूप पर पूजा पंडाल तैयार करने का निर्णय लिया गया। पंडाल की भव्यता के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम दर्शन को प्राथमिकता देने पर भी चर्चा हुई। महासचिव कुणाल अजवानी ने बताया कि प्रस्तावित पंडाल की चौड़ाई करीब 150 फीट और ऊंचाई 100 फीट होगी। इसके मध्य में बनाए जा रहे गर्भगृह की ऊंचाई करीब 30 फीट रखी गई है। गर्भगृह में मां दुर्गा की 14 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। चतुर्थी को पंडाल का पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।
दुर्गापूजा की तैयारी, कई थीम पर बन रहे पंडाल:कहीं दिखेगी भगवान जगन्नाथ की आकृति, कहीं कालचक्र पंडाल में विराजेंगी मां दुर्गा

