रांची14 घंटे पहले
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झारखंड में सरकारी अस्पतालों में जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त मिलने वाली दवा की खरीद में भारी गड़बड़ी हो रही है। बिहार, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जो दवा 1 से 1.50 रुपए में खरीद रहे हैं, उसी दवा के लिए झारखंड का स्वास्थ्य विभाग तीन गुना तक चुका रहा है।
इसका बड़ा उदाहरण अमॉक्सीसिलिन 500 एमजी का है। बिहार और छत्तीसगढ़ में इसकी खरीद करीब 1.15 से 1.50 रुपए प्रति यूनिट की दर पर हुई, जबकि झारखंड में 3.50 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदी गई है। यानी एक यूनिट पर करीब 2.50 रुपए का अंतर। अन्य दवाओं की खरीद में भी बड़ा अंतर सामने आया है। जब खरीद की मात्रा लाखों यूनिट में हो, तो प्रति यूनिट का छोटा दिखने वाला अंतर भी बड़ी राशि में बदल जाता है।
35 पैसे का रैनिटिडिन इंजेक्शन झारखंड खरीद रहा चार रुपए में
कैल्शियम विद विटामिन-डी3, ओआरएस, डाइक्लोफेनाक इंजेक्शन, रैनिटिडिन इंजेक्शन, एल्बेंडाजोल और विटामिन-ए सिरप की दरों में भी बड़ा अंतर सामने आया है। इनमें ओआरएस की दर झारखंड में 8.50 रुपए और बिहार-छत्तीसगढ़ में करीब 2 रुपए है। डाइक्लोफेनाक इंजेक्शन की दर झारखंड में 5 रुपए के मुकाबले दूसरे राज्यों में करीब 1.50 रुपए बताई गई। रैनिटिडिन इंजेक्शन के झारखंड 4 रुपए में खरीद रहा है तो दूसरे राज्य महज 35 पैसे में।
झारखंड में ईडीएल में 10 साल से बदलाव नहीं, 354 दवाओं तक ही सिमटी है सूची
झारखंड में सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त उपलब्ध कराई जाने वाली जरूरी दवाओं की सूची (ईडीएल) में वर्ष 2016 के बाद से अब तक संशोधन नहीं किया गया है। जबकि इसे हर पांच साल में संशोधन करने का प्रावधान है। वर्तमान में राज्य की ईडीएल में 354 दवाएं शामिल हैं, जबकि जरूरत के हिसाब से यह संख्या करीब 750 या उससे अधिक होनी चाहिए। पड़ोसी राज्य बिहार में 650 के करीब है, छत्तीसगढ़ में 700 से ज्यादा है। वर्ष 2025 में संबंधित ईडीएल समिति की ओर से संशोधित सूची तैयार कर करीब 885 दवाओं का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन अब तक नहीं हुआ।
मांग से टेंडर तक तीन स्तर पर चलती है प्रक्रिया
दवा खरीद की प्रक्रिया में जिला स्तर, स्वास्थ्य निदेशालय और स्वास्थ्य निगम की भूमिका है। 24 जिलों और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों से दवाओं की आवश्यकता का आंकड़ा जुटाकर इसे संकलित किया जाता है। इसके बाद संबंधित स्तर से स्वास्थ्य निगम को मांग भेजी जाती है और निगम की जिम्मेदारी टेंडर के जरिए दर निर्धारण व दवाओं की खरीद करने की होती है।
जिला स्तर पर अलग-अलग खरीद से कीमत में बड़ा अंतर
दवाओं की खरीद को लेकर सबसे बड़ा सवाल प्रक्रिया पर है। जानकारों के अनुसार, जरूरी दवाओं की खरीद के लिए केंद्रीकृत और पारदर्शी टेंडर व्यवस्था होनी चाहिए। राज्य स्तर पर स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त मांग के आधार पर दवाओं की खरीद के लिए टेंडर किया जाना चाहिए। लेकिन वर्तमान में झारखंड में कई स्तरों पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने के कारण जिला स्तर पर स्थानीय खरीद की जा रही है। इससे अलग-अलग जिलों में एक ही दवा की खरीद कीमत में अंतर देखने को मिल रहा है।
15 दवाओं की सूची में ही इतना अंतर (दर रुपए में)
दवा बिहार/छग झारखंड अंतर
अमोक्सीसिलीन 500एमजी 1.15 3.5 2.5
कैल्शियम+विटामिन डी3 टैबलेट 0.18 0.5 0.32
ओआरएस 21 ग्राम सैशे 1.95 8.5 6.55
रैनिटिडिन 25एमजी इंजेक्शन 0.35 4 3.65
अल्बेंडाजोल 400 एमजी टैबलेट 0.95 3.7 2.75
विटामिन ए सिरप 1 लाख आईयू 75 140 65
पैरासिटामोल 500 एमजी टैबलेट 0.28 1.2 1.08
सेटिरिजिन 10 एमजी टैबलेट 0.22 0.8 0.58
एजिथ्रोमाइसिन 500 एमजी टैबलेट 4.5 12 7.5
मेटफॉर्मिन 500 एमजी टैबलेट 0.35 1.1 0.75
ओमेप्राजोल 20 एमजी कैप्सूल 0.45 1.5 1.05
सिप्रोफ्लोक्सासिन 500 एमजी टैबलेट 0.9 2.8 1.9
आयरन फोलिक एसिड टैबलेट 0.15 0.45 0.3
साल्बुटामोल 2 एमजी टैबलेट 0.12 0.4 0.28
डाइक्लोफेनाक सोडियम 3 मिली इंजेक्शन 1.6 5.0 3.4

