Tuesday, October 6, 2026
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तिरहुत MLC चुनाव: नामांकन को लेकर आयुक्त कार्यालय में हलचल:सीपाआई के संजय सिंह, निर्दलीय बच्चा राय ने भरा पर्चा; जेडीयू के अभिषेक झा भी करेंगे नॉमिनेशन


बिहार विधान परिषद के तिरहुत स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर नामांकन का दौर जारी है। सोमवार को मुजफ्फरपुर स्थित प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में सुबह से ही राजनीतिक हलचल तेज है।
अलग-अलग दलों के साथ निर्दलीय प्रत्याशी भी नामांकन दाखिल करने पहुंच रहे हैं। तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के निवर्तमान एमएलसी संजय सिंह नामांकन दाखिल किया। इनके अलावा 2016 के चर्चित बिहार बोर्ड टॉपर घोटाले के मुख्य आरोपी रहे अमित कुमार उर्फ बच्चा राय भी स्नातक सीट से निर्दलीय नामांकन दाखिल करने पहुंचे हैं। जेडीयू प्रत्याशी भरेंगे पर्चा वहीं, स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए प्रत्याशी अभिषेक झा भी आज नामांकन दाखिल करेंगे। उनके नामांकन के बाद आयोजित सभा में एनडीए के कई बड़े नेता शामिल होंगे। मंत्री दीपक प्रकाश समेत एनडीए के घटक दलों के नेताओं के पहुंचने की संभावना है। इसे लेकर आयुक्त कार्यालय के आसपास सुबह 11 बजे से ही समर्थकों और नेताओं की आवाजाही बनी हुई है। संजय सिंह के समर्थन में पहुंचे पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह निवर्तमान एमएलसी संजय सिंह के समर्थन में पूर्व सांसद और शिक्षक नेता शत्रुघ्न प्रसाद सिंह भी नामांकन के दौरान पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब चुनाव को धनबल और बाहुबल के भरोसे जीतने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह शिक्षकों का चुनाव है। शिक्षक धनबल और बाहुबल से नहीं जीते जा सकते। जो शिक्षक हित के मुद्दों को उठाएगा, वही चुनाव में मजबूत होगा। संजय सिंह पिछले 12 वर्षों से लगातार शिक्षकों की आवाज उठाते रहे हैं। इसलिए उनके समर्थन में आए हैं और उनकी जीत सुनिश्चित है। संजय सिंह बोले- सातवें वेतनमान और वित्त रहित शिक्षकों की आवाज उठाई नामांकन के दौरान संजय सिंह ने कहा कि वह लगातार शिक्षकों के मुद्दों को सदन से लेकर सड़क तक उठाते रहे हैं। सातवें वेतनमान और वित्त रहित शिक्षकों के मुद्दे पर भी उन्होंने महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय सरकार की ओर से कई तरह के वादे और दावे किए जाएंगे, लेकिन जिन मुद्दों पर आज बात हो रही है, उनकी शुरुआत उन्होंने पहले ही की थी। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता अपने मुद्दों और अधिकारों के आधार पर निर्णय लेते हैं। ऐसे में उनका संघर्ष आगे भी शिक्षकों के हित में जारी रहेगा।

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