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सुप्रीम कोर्ट ने अब मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 अक्टूबर की तारीख तय की झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर झारखंड की वर्ष 2025 की डीजीपी नियुक्ति नियमावली पर सवाल उठाए हैं। केंद्र का आरोप है कि राज्य ने नियमावली बनाते समय सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया। केंद्र ने इस नियमावली के आधार पर हुई सभी डीजीपी नियुक्तियों को अवैध और अमान्य घोषित करने की मांग की है। मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य सरकार ने 2025 की नियमावली अधिसूचित करने से पहले सुप्रीम कोर्ट से पूर्व अनुमति नहीं ली। केंद्र का तर्क है कि डीजीपी की नियुक्ति में संघ लोक सेवा आयोग की निर्धारित भूमिका को दरकिनार कर राज्य ने अपनी अलग प्रक्रिया तय की है। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है। केन्द्र ने कहा है कि डीजीपी की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्वतंत्र चयन सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जो व्यवस्था तय की है, उसका पालन जरूरी है। केंद्र ने अदालत से 2025 की नियमावली के तहत की गई नियुक्तियों की वैधता पर हस्तक्षेप करने की मांग की है। अदालत ने केन्द्र का पक्ष सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को निर्धारित की है। मालूम हो कि झारखंड में नियमित डीजीपी की नियुक्ति का मुद्दा इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में उठ चुका है। मई 2026 में शीर्ष अदालत ने राज्य में नियमित डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े मामले पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। अब केंद्र की नई अर्जी के बाद विवाद का दायरा और बढ़ गया है।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा-झारखंड की डीजीपी नियुक्ति नियमावली अवैध, नियुक्ति अमान्य हो
