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UGC New Rules : कॉलेज अब मनमाने ढंग से नहीं ले सकेंगे छात्रों पर फैसला, जानें नया नियम

पटना से अनुराग प्रधान की रिपोर्ट

देशभर के उच्च शिक्षण और तकनीकी शिक्षण संस्थानों में छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर जल्द नयी व्यवस्था लागू की जायेगी. इसके तहत किसी छात्र पर नकल, अनुचित साधन के इस्तेमाल, अनुशासनहीनता या किसी अन्य आरोप में सीधे कार्रवाई नहीं की जायेगी. कार्रवाई से पहले संबंधित छात्र को अपना पक्ष रखने और लिखित स्पष्टीकरण देने का अवसर देना अनिवार्य होगा. शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों पर कार्रवाई की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और छात्रहितैषी बनाने के लिए यह व्यवस्था तैयार की जा रही है. यूजीसी, एआइसीटीइ और तकनीकी शिक्षा से जुड़े अन्य नियामक निकायों के स्तर पर इस संबंध में चर्चा के बाद जल्द ही दिशा-निर्देश जारी की जायेगी. इसके बाद विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा.

पहले नोटिस, फिर छात्र का पक्ष

यूजीसी की उच्च स्तरीय बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ अन्य शिक्षाविदों ने नयी व्यवस्था बनाने पर सहमती दे दी है. अधिकारियों ने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह होगा कि किसी छात्र के खिलाफ शिकायत या अनुशासनहीनता का मामला सामने आने पर संस्थान पहले उसे नोटिस देकर आरोपों की जानकारी देगा. छात्र को आरोपों पर अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने के लिए उचित समय दिया जायेगा. छात्र के जवाब पर विचार किये बिना उसके खिलाफ अंतिम कार्रवाई नहीं की जा सकेगी. यदि छात्र के जवाब से मामला स्पष्ट नहीं होता है या आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, तो मामले की आगे जांच कराई जा सकती है. जरूरत पड़ने पर संस्थान जांच कमेटी गठित कर सकेगा. कमेटी उपलब्ध साक्ष्यों, छात्र के स्पष्टीकरण और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर अपनी रिपोर्ट देगी. इसके बाद ही नियमानुसार कार्रवाई का फैसला लिया जायेगा.

नकल के मामलों में भी लागू होगी प्रक्रिया

यूनिवर्सिटी व कॉलेज के अपने परीक्षा के दौरान नकल या अनुचित साधन के इस्तेमाल के आरोपों में भी छात्रों के साथ इसी प्रक्रिया का पालन किया जायेगा. परीक्षा केंद्र पर पर्यवेक्षक या निरीक्षक द्वारा घटना दर्ज किये जाने के बाद छात्र को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जायेगा. परीक्षा में अनुचित साधन के मामलों में क्या किया जा सकता है और क्या नहीं, इसके लिए भी स्पष्ट एवं मानकीकृत दिशा-निर्देश तैयार किये जायेंगे. इससे छात्रों को पहले से यह जानकारी रहेगी कि किसी आरोप की स्थिति में उनके खिलाफ किस तरह की प्रक्रिया अपनायी जायेगी. साथ ही, अलग-अलग संस्थानों में अलग-अलग तरीके से कार्रवाई किये जाने की संभावना भी कम होगी.

मानसिक दबाव कम करने पर जोर

छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के मामलों में मानसिक दबाव को कम करने पर भी जोर दिया जा रहा है. किसी घटना के बाद छात्र को तत्काल दोषी मानकर कठोर कार्रवाई करने के बजाय पहले उसका पक्ष सुनने की व्यवस्था से छात्रों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा. नयी व्यवस्था में स्टूडेंट वेलनेस और मानसिक स्वास्थ्य को भी महत्व दिये जाने की बात भी कही गयी. संस्थानों में छात्र सहायता व्यवस्था को मजबूत करने तथा कठिन परिस्थितियों में छात्रों को परामर्श और सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया जायेगा.

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सभी तरह के संस्थानों में लागू करने की तैयारी

नयी व्यवस्था केवल किसी एक विश्वविद्यालय या तकनीकी संस्थान तक सीमित नहीं रहेगी. इसे विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और तकनीकी एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है. नियामक संस्थाओं की ओर से दिशा-निर्देश जारी होने के बाद संबंधित संस्थानों को अपनी अनुशासनात्मक प्रक्रिया में आवश्यक बदलाव करने होंगे. इसका उद्देश्य छात्रों को अनुशासन के दायरे से बाहर करना नहीं, बल्कि कार्रवाई की प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और प्राकृतिक न्याय के अनुरूप बनाना है. गंभीर मामलों में जांच और दोष साबित होने पर निर्धारित नियमों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी, लेकिन छात्र का पक्ष सुने बिना सीधे दंड देने की व्यवस्था को खत्म करने पर जोर होगा. आधिकारिक अधिसूचना जारी करके जल्द देशभर में इस व्यवस्था को लागू किया जायेगा.

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