Thursday, October 8, 2026
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टेंडर में अनियमितता का आरोप, संविधान लेकर ठेकेदारों का प्रदर्शन:पूर्णिया निगम आयुक्त ने नियमानुसार कार्रवाई का दिया आश्वासन, बोले- रूल ऑफ लॉ के तहत एक्शन होगा


पूर्णिया नगर निगम परिसर में एनआईटी-2 निविदा प्रक्रिया को लेकर संवेदकों और नगर निगम प्रशासन के बीच विवाद बढ़ गया है। प्रदर्शन कर रहे संवेदकों ने हाथों में भारत का संविधान लेकर नगर निगम प्रशासन और अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोला। उन्होंने निविदा प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाया है। इस मामले पर नगर आयुक्त अनिरुद्ध पाण्डेय ने विभागीय नियमों के अनुसार पारदर्शी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। संवैधानिक संकट और अंग्रेज जैसा शासन हाथों में संविधान की प्रति लेकर प्रदर्शन कर रहे आलोक राज ने नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि परिसर में संविधान के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और अंग्रेजों का कानून चलाया जा रहा है। नियमों के अनुसार निविदा की वैधता 120 दिनों की होती है, जिसके खत्म होने के बाद इसे स्वतः रद्द हो जाना चाहिए। इसके बावजूद नगर निगम द्वारा इसी पुरानी प्रक्रिया पर निष्पादित करने का प्रयास किया जा रहा है। तकनीकी मूल्यांकन में धांधली का आरोप संवेदकों ने अधीक्षण अभियंता रिहान हैदर पर चहेते संवेदकों को लाभ पहुंचाने तथा अन्य को जानबूझकर फेल पास करने का आरोप लगाया है। आलोक राज ने कहा कि सूचना का अधिकार के तहत इसके पुख्ता कागजात प्राप्त कर लिए गए हैं। आरोप लगाते हुए कहा कि 27 जनवरी 2026 को नए रेट जारी होने के बावजूद पुराने रेट पर ही टेंडर प्रक्रिया चलाई जा रही है। विजिलेंस जांच की मांग आलोक राज ने पूर्णिया की महापौर से अपील करते हुए कहा कि नगर निगम की संवैधानिक मर्यादा की रक्षा की जाए। उन्होंने दोषी अधिकारियों की कार्यपद्धति और संपत्ति की जांच के लिए विजिलेंस, बिहार के मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव को पत्र लिखने की मांग की। रूल ऑफ लॉ के तहत होगी कार्रवाई : नगर आयुक्त वहीं इस मामले में नगर आयुक्त अनिरुद्ध पाण्डेय ने संवेदक संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन की पुष्टि की और प्रशासन का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि संवेदक संघ के प्रतिनिधियों द्वारा एनआईटी-2 प्रक्रिया को रद्द करने के संबंध में एक ज्ञापन सौंपा गया है। संवेदकों का मुख्य तर्क है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और 120 दिनों की बिड वैलिडिटी समाप्त हो चुकी है। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि मामले में विभागीय दिशा-निर्देशों और रूल ऑफ लॉ का पूरी तरह से पालन करते हुए निष्पक्ष निर्णय लिया जाएगा।

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