
Bhagalpur Fake Teacher Salary Scam: बिहार के भागलपुर में शिक्षा विभाग के भीतर फर्जी शिक्षिका के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों रुपये निकालने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. काल्पनिक शिक्षिका तनुश्री की आईडी बनाकर करीब 98 लाख रुपये के वेतन भुगतान और वित्तीय अनियमितता के आरोप में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) स्थापना शशि चंदन चौधरी और सेवामुक्त डाटा एंट्री ऑपरेटर अविनाश राज को गिरफ्तार किया गया है. दोनों को देर शाम न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया.
मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि यह सिर्फ एक फर्जी पहचान बनाकर पैसे निकालने का मामला नहीं है. जांच में मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) पोर्टल पर आईडी बनाने, वेतन भुगतान की मंजूरी, डिजिटल हस्ताक्षर और बैंक खातों के जरिए रकम के लेनदेन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि एक ऐसी शिक्षिका के नाम पर वेतन निकासी की गयी, जिसका अस्तित्व ही संदिग्ध है. मामले में क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (आरडीडीई) सुभाष गुप्ता के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस और प्रशासन ने जांच तेज कर दी है.
फर्जी शिक्षिका की आईडी से कैसे हुआ 98 लाख रुपये का खेल
शिक्षा विभाग में सामने आयी वित्तीय अनियमितता के अनुसार, कथित घोटाले में तनुश्री नाम की शिक्षिका की फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया गया. आरोप है कि इसके लिए जाली पैन कार्ड, फर्जी स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या और जनधन खाते का सहारा लिया गया. बताया जा रहा है कि अप्रैल 2025 से यह कथित गड़बड़ी चल रही थी.
शुरुआत में करीब सात लाख रुपये की निकासी हुई. इसके बाद मकान किराया भत्ता (एचआरए) में कथित तौर पर हेरफेर कर उसे 20 प्रतिशत से बढ़ाकर करीब 2000 प्रतिशत कर दिया गया. इस तरह करीब 98 लाख रुपये के लेनदेन की बात सामने आयी है.
इस मामले में अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 52 लाख रुपये की निकासी कर ली गयी, जबकि शक होने पर 46 लाख रुपये होल्ड कर दिये गये. इसके अलावा करीब 72 लाख रुपये की निकासी की कोशिश किये जाने की भी बात सामने आयी है. इन अलग-अलग आंकड़ों के संबंध में जांच एजेंसियां लेनदेन का पूरा हिसाब खंगाल रही हैं.
डीपीओ की मंजूरी और डिजिटल हस्ताक्षर पर उठे सवाल
मामले की जांच में डीपीओ स्थापना की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. विभागीय सूत्रों और पुलिस जांच के तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, एचआरएमएस पोर्टल पर अंतिम मंजूरी और डिजिटल हस्ताक्षर का अधिकार डीपीओ स्थापना के पास था. ऐसे में यह पता लगाया जा रहा है कि कथित फर्जी आईडी कैसे तैयार हुई और वेतन भुगतान की प्रक्रिया में किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही.
जांच में यह भी सामने आया है कि राशि पहले हरियाणा के फरीदाबाद स्थित एक खाते में भेजी गयी. इसके बाद रकम भागलपुर पहुंची. अविनाश राज की पत्नी काजल और गौतम कुमार के खातों में यूपीआई के जरिये लेनदेन होने की बात भी सामने आयी है. आरोप है कि रकम से चारपहिया वाहन खरीदा गया और एटीएम के माध्यम से नकदी निकाली गयी.
इन सभी लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने के लिए बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और विभागीय दस्तावेजों की जांच की जा रही है. हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी.
छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी, लिपिक फरार
आरडीडीई सुभाष गुप्ता के आवेदन पर गुरुवार को जोगसर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी. इसमें जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) चंदन कुमार, डीपीओ स्थापना शशि चंदन चौधरी, सेवामुक्त ऑपरेटर अविनाश राज, उच्च वर्गीय लिपिक शिशिर कुमार झा, अविनाश की पत्नी काजल और कथित फर्जी शिक्षिका तनुश्री को नामजद किया गया है. इनके अलावा अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गयी है.
मामला सामने आने के बाद उच्च वर्गीय लिपिक शिशिर कुमार झा फरार चल रहे हैं. विभागीय स्तर पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है. वहीं, डाटा एंट्री ऑपरेटर अविनाश राज को पहले ही एक अन्य वित्तीय अनियमितता के मामले में बर्खास्त किया जा चुका था. पुलिस अब शेष नामजद आरोपितों की भूमिका का सत्यापन कर रही है.
फरार लिपिक का कार्यालय बंद, दस्तावेजों की तलाश
घोटाले की जांच के दौरान शिशिर कुमार झा का कार्यालय बंद पाया गया. बताया जा रहा है कि फाइल और दूसरे जरूरी कागजात नहीं मिलने के कारण जांच में परेशानी आ रही है. अब इन्वेंटरी तैयार कर कमरे का ताला खुलवाने की तैयारी है. इसके बाद कंप्यूटर, फाइलों और अन्य अभिलेखों की जांच की जायेगी.
जांच का यह हिस्सा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विभागीय रिकॉर्ड से यह पता चल सकता है कि फर्जी शिक्षिका की आईडी किसने बनायी, वेतन भुगतान की प्रक्रिया किस स्तर पर आगे बढ़ी और किन दस्तावेजों के आधार पर भुगतान को मंजूरी मिली. रिकॉर्ड में गड़बड़ी या दस्तावेजों की अनुपलब्धता की स्थिति में जांच की दिशा और महत्वपूर्ण हो सकती है.
डीडीसी के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ने खंगाले रिकॉर्ड
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने चार सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है. डीडीसी रवि राकेश के नेतृत्व में टीम ने शुक्रवार को जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय पहुंचकर जांच की. टीम में ट्रेजरी ऑफिसर नवलकिशोर यादव और जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुधीर कुमार भी शामिल थे.
टीम ने वेतन भुगतान से संबंधित फाइलें मंगवायीं और वित्तीय अनियमितता के अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल की. जांच में यह देखा जा रहा है कि आईडी बनाने के दौरान कहां चूक हुई, वेतन भुगतान की मंजूरी कैसे मिली और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों की क्या भूमिका रही.
डीडीसी रवि राकेश ने बताया कि आईडी बनाने की प्रक्रिया, संभावित चूक और संबंधित अभिलेखों की जांच की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जायेगी. इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी.
जून 2026 में ऑपरेटर हटने के बाद भी लेनदेन पर सवाल
इस मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि अविनाश राज को जून 2026 में हटाये जाने के बाद भी कथित तौर पर लेनदेन जारी रहा. इससे यह सवाल उठ रहा है कि संबंधित लॉगिन को समय पर बंद क्यों नहीं कराया गया और भुगतान की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी.
यदि किसी कर्मचारी के हटने के बाद भी उसके लॉगिन या उससे जुड़ी प्रक्रिया के जरिये वित्तीय लेनदेन होता रहा, तो यह केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी का मामला नहीं, बल्कि विभागीय नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था की भी जांच का विषय है. पुलिस और प्रशासन की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि तकनीकी स्तर पर क्या हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार था.
सरकारी वेतन भुगतान व्यवस्था पर भी उठे सवाल
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के वेतन भुगतान की व्यवस्था पर इस मामले ने गंभीर सवाल खड़े किये हैं. यदि फर्जी पहचान के आधार पर लंबे समय तक भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ती रही, तो यह जांचना जरूरी होगा कि कर्मचारियों के विवरण, बैंक खातों, वेतन मद और भत्तों का सत्यापन किस तरह किया गया.
मामले का असर केवल सरकारी राशि के कथित नुकसान तक सीमित नहीं है. ऐसी गड़बड़ियां सामने आने से शिक्षा विभाग की वित्तीय निगरानी और जवाबदेही पर भी सवाल उठते हैं. अब जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि रकम निकालने की प्रक्रिया में किसने क्या भूमिका निभायी, कितनी राशि वास्तव में निकाली गयी और कितनी राशि सुरक्षित की जा सकी.
Bhagalpur Fake Teacher Salary Scam: एसएसपी ने कहा, बाकी आरोपितों की भूमिका की जांच जारी
भागलपुर के एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि फर्जी शिक्षिका के नाम पर सरकारी राशि के भुगतान और वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. शेष नामजद आरोपितों की भूमिका का सत्यापन किया जा रहा है. उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी.
फिलहाल पुलिस की जांच, प्रशासनिक टीम की रिपोर्ट और विभागीय अभिलेखों की पड़ताल पर मामले की अगली दिशा निर्भर करेगी. सबसे अहम सवाल यही है कि फर्जी शिक्षिका की आईडी किसने बनायी, भुगतान की मंजूरी कैसे मिली और करीब 98 लाख रुपये के कथित घोटाले में सरकारी व्यवस्था के भीतर कौन-कौन जिम्मेदार था.
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