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जेपीएससी भर्ती परीक्षाओं में धांधली मामले में गिरफ्तार पतंजलि आईएएस एकेडमी के संचालक संजीत कुमार की नियमित जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी। न्यायायुक्त योगेश कुमार ने याचिका खारिज करते हुए तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ व्यवस्था में धांधली नहीं है, बल्कि राज्य के होनहार और योग्य युवाओं के भविष्य का भी संगठित हनन है। सीआईडी के सबूतों से स्पष्ट हो गया है कि कोचिंग की आड़ में परीक्षा पास कराने का समानांतर नेटवर्क चलाया जा रहा था। सीआईडी ने कोर्ट को बताया कि इस परीक्षा में कुल 743 अभ्यर्थी सफल हुए थे। सीआईडी ने जब संजीत के दो मोबाइल नंबर (9304911779 और 9693134313) का कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाला तो होश उड़ाने वाला खुलासा हुआ। इन सफल अभ्यर्थियों में से 119 के नंबर संजीत के नंबर से कनेक्टेड थे। संजीत की ओर से दलील दी गई कि वह तीन-चार हजार छात्रों की कोचिंग चलाते हैं, इसलिए बातचीत सामान्य है। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में पास अभ्यर्थियों से सीधा संपर्क सामान्य नहीं, बल्कि गहरी आपराधिक साजिश का संकेत है। कोर्ट ने कहा-यह होनहार युवाओं के भविष्य का हनन भाई-भतीजावाद भी…चचेरे भाई को पास कराने के लिए 20 लाख की डील
सीआईडी की जांच में पद की सौदेबाजी के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। एफआरओ परीक्षा में चयनित ऋतिक रोशन (रोल नंबर 24408320) और पंकज प्रसून (रोल नंबर 24414400) संजीत के चचेरे भाई निकले। सीआईडी के मुताबिक ऋतिक को पास कराने के लिए 20 लाख रुपए में डील हुई थी। यह रकम अलग-अलग किस्तों में दी गई। दोनों अभ्यर्थियों के इकबालिया बयान और बैंक लेनदेन ने इसमें संजीत की सीधी भागीदारी स्पष्ट कर दी है। जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन के पीए की कार के लिए संजीत ने किया डाउन पेमेंट
सीआईडी ने रांची की एक ऑटोमोबाइल एजेंसी का रिकॉर्ड कोर्ट में पेश कर सिंडिकेट के वित्तीय गठजोड़ को भी बेनकाब किया है। सीआईडी ने बताया कि जेपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन के पीए धर्मेंद्र कुमार के लिए खरीदी गई कार का डाउन पेमेंट संजीत के यूपीआई से हुआ था। इसके अलावा संजीत के एक्सिस बैंक खाते से छह अप्रैल को 99 हजार और 10 अप्रैल को 70 हजार रुपए धर्मेंद्र की पत्नी के खाते में भेजे गए। बचाव पक्ष ने इसे पर्सनल लोन बताया। सीजीएल… जमशेदपुर में तैनात सेनेटरी इंस्पेक्टर संजय ने पटना में अभ्यर्थियों को रटाए थे पेपर
जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के पेपर लीक मामले में सेनेटरी इंस्पेक्टर संजय कुमार और स्वास्थ्य विभाग के कनीय सचिवालय सहायक अजय कुमार को कोर्ट से राहत नहीं मिली। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की कोर्ट ने मामले की गंभीरता, अंतरराज्यीय सिंडिकेट की संलिप्तता और सरकार के कड़े कानून के प्रावधानों का हवाला देते हुए दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने 16 पन्नों के आदेश में कहा कि पेपर लीक माफिया का यह कृत्य न सिर्फ लाखों ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ खिलवाड़ है, बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था पर लोगों का भरोसा तोड़ देता है। सीआईडी ने कोर्ट को बताया था संजय ने पटना के जेएसएससी पहाड़ी स्थित कृष्णा जेएसएससी एकेडमी के संचालक राकेश रंजन और अजय कुमार के साथ मिलकर अभ्यर्थियों की सेटिंग कराई। 20 सितंबर 2024 को परीक्षार्थियों को पटना के गांधी मैदान और बुद्ध स्मृति पार्क के पास एकत्र किया। वहां से एक मकान में ले जाकर प्रश्न-उत्तर के तीन सेट दिए। करीब तीन घंटे तक उन्हें उत्तर जेएसएससी गए। फिर प्रश्न पत्रों को वहीं नष्ट कर दिया गया। खाते में मंगाए तीन लाख, चयन के बाद नकद वसूली
सीआईडी की केस डायरी के मुताबिक अभ्यर्थी अमित कुमार ने दिसंबर 2024 में संजय के खाते में तीन लाख रुपए ट्रांसफर किया था। परीक्षा पास होने के बाद अभ्यर्थियों से नकद वसूलकर पटना में कोचिंग संचालक राकेश रंजन तक रुपए पहुंचाए गए थे। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल की जेएसएससी जांच में बातचीत और लोकेशन की पुष्टि हुई है।
फोन ने खोला राज:FRO परीक्षा में सफल 119 अभ्यर्थियों से सीधे संपर्क में था संजीत, पतंजलि आईएएस एकेडमी के संचालक संजीत की जमानत याचिका खारिज
