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गिरिडीह में शारदीय नवरात्र के मौके पर दुर्गा पूजा की धूम है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक भक्ति और उत्सव का माहौल है। शाम ढलते ही रंग-बिरंगी रोशनी से सजे पूजा पंडाल श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। इस बार कई पंडालों में देश के प्रसिद्ध मंदिरों की झलक देखने को मिल रही है। मुफस्सिल क्षेत्र के सिहोडीह आम बागान दुर्गा पूजा समिति की ओर से करीब 80 फीट ऊंचा पंडाल बनाया गया है। इसे अयोध्या के राम मंदिर की थीम पर तैयार किया गया है। समिति की ओर से मेले का भी आयोजन किया गया है। वहीं, पपरवाटांड़ दुर्गा पूजा समिति ने करीब 71 फीट ऊंचा पंडाल तैयार किया है। इसे दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिर की थीम पर बनाया गया है। बंगाल और स्थानीय कारीगरों ने 45 दिनों की मेहनत से इसे तैयार किया है। मंदिर की स्थापत्य कला को दर्शाता यह पंडाल भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। यहां भी मेले का आयोजन किया गया है। बनियाडीह में कंधे पर प्रतिमा लेकर विसर्जन की परंपरा गिरिडीह के कोयलांचल क्षेत्र स्थित बनियाडीह सेंट्रल दुर्गा पूजा समिति की पूजा अपनी विशिष्ट परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां करीब एक महीने की मेहनत से भव्य पूजा पंडाल तैयार किया गया है। पूजा के साथ मेले का भी आयोजन किया गया है। नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस पूजा की सबसे खास पहचान मां दुर्गा की प्रतिमा को कंधे पर लेकर विसर्जन करने की परंपरा है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में श्रद्धालु भक्तिभाव से शामिल होते हैं। मां की अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। यह परंपरा क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। रक्षित हाउस की प्रतिमा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु गिरिडीह में दुर्गा पूजा की चर्चा रक्षित हाउस की मां दुर्गा की प्रतिमा के बिना अधूरी है। यहां तैयार की जाने वाली प्रतिमा श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। प्रतिमा निर्माण की तैयारी छह से सात महीने पहले शुरू हो जाती है। इसकी बनावट, कलात्मक स्वरूप और बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। शहर के आईसीआर रोड स्थित दुर्गा माता बड़की मैया और छोटकी मैया के मंदिरों के साथ विश्वनाथ मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं के प्रति भी लोगों की गहरी आस्था है। इन तीनों पूजा स्थलों की खास परंपरा मां की प्रतिमा को कंधे पर रखकर विसर्जित करना है। विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। मां को अंतिम विदाई देने के लिए जुटने वाली भीड़ इस परंपरा के प्रति लोगों की आस्था को दर्शाती है। सूरो सुंदरी अकादमी का पंडाल भी आकर्षण शहर के रेलवे स्टेशन रोड पर सूरो सुंदरी अकादमी की दुर्गा पूजा भी खास है। यहां पश्चिम बंगाल के कारीगरों ने करीब एक महीने की मेहनत से सुंदर पंडाल तैयार किया है। पंडाल की सजावट और कलात्मक बनावट श्रद्धालुओं को पसंद आ रही है। शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमुख पूजा पंडालों में आकर्षक लाइटिंग और सजावट की गई है। शाम होते ही पंडालों की रौनक बढ़ जाती है। परिवार के साथ पूजा घूमने निकलने वाले लोगों से मेला स्थलों पर उत्सवी माहौल बन रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में पूजा और मेले को लेकर उत्साह है। अलग-अलग थीम पर बने पंडाल, आकर्षक प्रतिमाएं और कंधे पर प्रतिमा विसर्जन की परंपराएं गिरिडीह की दुर्गा पूजा को विशिष्ट पहचान देती हैं। यहां आस्था, कला और परंपरा का संगम नवरात्र के उत्सव को खास बना रहा है।
गिरिडीह में दुर्गा पूजा की धूम, पंडाल कर रहे आकर्षित:गिरिडीह में कहीं 80 फीट ऊंचा राम मंदिर, तो कहीं दक्षिण भारतीय मंदिर की झलक
