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शिवहर के ऐतिहासिक राजदरबार स्थित दशमहाविद्या शक्तिपीठ में शारदीय नवरात्र की महाष्टमी पर रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। करीब 172 साल पुराने इस मंदिर में मां काली, मां तारा, मां बगलामुखी, मां षोडसी और मां दुर्गा के पांच विग्रह हैं। ये श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। 1854 में तांत्रिक विधि-विधान से हुआ था निर्माण यह मंदिर शिवहर शहर के सेंट्रल बैंक रोड स्थित वार्ड संख्या-16 में छोटी रानी कैंपस के भीतर है। शिवहर स्टेट के तत्कालीन राजा शिवराज नंदन सिंह बहादुर मालिक ने वर्ष 1854 में तांत्रिक विधि-विधान से इसका निर्माण कराया था। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। मंदिर के राजपुरोहित ने भी बताया कि श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की उम्मीद लेकर यहां आते हैं। उत्तर बिहार के कई जिलों और नेपाल से पहुंचते हैं भक्त नवरात्र के दौरान इस शक्तिपीठ में बिहार के मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और गोपालगंज समेत उत्तर बिहार के कई जिलों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पड़ोसी देश नेपाल से भी भक्त यहां मां के दर्शन करने आते हैं।
शिवहर- दशमहाविद्या शक्तिपीठ में महाष्टमी पर उमड़े श्रद्धालु:मां काली समेत 5 देवियों के विग्रह हैं स्थापित; 1854 में हुआ था निर्माण
