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बेगूसराय के बछवाड़ा प्रखंड में कादरबाद पंचायत में हादीपुर वाली दुर्गा मइया के मंदिर में दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। शारदीय नवरात्रि पर जैसे ही सप्तमी तिथि को माता रानी के पट खोले गए, तब से ही मां के दर्शन और पूजन के लिए भक्तों का जनसैलाब उमड़ रहा। पूरे क्षेत्र में माता के जयकारे गूंज रहे हैं। हादीपुर वाली दुर्गा मइया के दरबार की ख्याति और इसका इतिहास प्राचीन-चमत्कारी माना जाता है। स्थानीय बुजुर्गों और जनश्रुतियों के अनुसार इस सिद्ध पीठ की स्थापना शताब्दियों पूर्व गांव के ही पूर्वजों ने की थी। कहा जाता है कि प्राचीन काल में जब यह पूरा क्षेत्र घने जंगलों और प्राकृतिक संपदाओं से घिरा हुआ था। तब गांव के एक साधक को स्वप्न में माता दुर्गा ने अपने प्राकट्य का संकेत दिया था। माता के आदेशानुसार ग्रामवासियों ने मिलकर एक साधारण से स्थान पर मां की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की। समय के साथ-साथ मां हादीपुर वाली की महिमा चारों तरफ फैलने लगी और भक्तों की हर मनोकामना पूरी होने लगी। जो शीश नवाता, उसकी झोली खुशियों से भर जाती मान्यता है कि हादीपुर वाली माता अपने दरबार में आने वाले किसी भी भक्त को खाली हाथ नहीं लौटाती हैं। चाहे कोई गंभीर बीमारी से जूझ रहा हो या जीवन की किसी कठिन विपत्ति में फंसा हो, जो भी श्रद्धालु सच्चे दिल से मइया के सामने शीश नवाता है, उसकी झोली खुशियों से भर जाती है। यही कारण है कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस मंदिर के प्रति लोगों की निष्ठा और अधिक गहरी होती चली गई। कालक्रम के साथ जो एक छोटा सा पूजन स्थल था, उसने आज एक भव्य मंदिर का रूप धारण कर लिया है।
हजारों श्रद्धालु आरती में शामिल हुए मंदिर के अध्यक्ष-मुख्य पुजारी राम उदय सिंह ने बताया कि विधि-विधान के साथ विशेष पूजा-अर्चना का दौर चल रहा है। हजारों श्रद्धालुओं ने माता की आरती में भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया। इस भव्य वार्षिक आयोजन को सफल बनाने में मंदिर पूजा समिति का विशेष योगदान रहा। आयोजन को सफल बनाने में मुक्तिनारायण सिंह, पंकज सिंह, महेश सिंह, बाल्मीकि सिंह, नटवर, विक्की सिंह, विकास मिश्रा, अमन, अमित (लीट सिंह) और सुशील सिंह सहित समिति के सदस्यों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
हादीपुर वाली दुर्गा मइया के दरबार में भक्त उमड़ें:दूर-दूर तक फैली है मइया की महिमा, सच्चे मन से मांगी मुरादें पूरी होती
