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सिटी रिपोर्टर | बोकारो विस्थापित अप्रेंटिस संघ का नौकरी की मांग को लेकर भूख हड़ताल नौवें दिन जारी रहा। उनके आंदोलन में धरना स्थल पर लगातार साथ रहने वाली बोकारो विधायक श्वेता सिंह की आज तबियत बिगड़ गई। उनका ब्लड प्रेशर लो होने के कारण डॉक्टरों ने स्लाइन चढ़ाया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मेरी तबियत ठीक है, थोड़ी कमजोरी है। लड़ाई अब आर-पार की है, बीएसएल प्रबंधन को विस्थापितों को उनका हक देना ही होगा। अब विस्थापित पीछे नहीं हटेंगे। जब तक विस्थापितों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक मैं आंदोलन में डटी रहूंगी। प्लांट को क्षति पहुंचाना हमलोगों का मकसद नहीं है, सभी कर्मचारी दुर्गा पूजा मेला का आनंद लें। हमलोगों का आंदोलन जारी रहेगा। हमलोग लड़ रहे हैं, न्याय मिलने तक लड़ते रहेंगे। सेल प्रबंधन हाई कोर्ट जा रहा है, तो हमलोग सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। मौके पर दर्जनों विस्थापित मौजूद थे। उन्होंने कहा कि हमारी मांगें जायज हैं। हमारी पुरखों की जमीन पर प्लांट बना है। आज रोजगार के लिए हमलोग दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। बीएसएल प्रबंधन ने अप्रेंटिस करवाया, लेकिन नौकरी देने में आनाकानी कर रहा है। वहीं साजिश के तहत चतुर्थ वर्ग में विस्थापितों का आरक्षण समाप्त कर हमलोगों के साथ धोखा किया गया है। तीन दिनों के गेट जाम से कई यूनिट बंद, बीएसएल को 50 करोड़ रुपए का नुकसान विस्थापितों के आंदोलन से बीएसएल प्रबंधन को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। प्रबंधन ने शनिवार तक 30 करोड़ के नुकसान की बात स्वीकारी थी। अब तक नुकसान को आंकड़ा 50 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। 15-16 अक्टूबर को आंशिक और 17 अक्टूबर को सभी 12 गेट जाम कर दिए जाने के कारण ब्लास्ट फर्नेस, सिंटर प्लांट व स्टील मेल्टिंग शॉप (एसएमएस-1 और एसएमएस-2) सहित प्रमुख उत्पादन इकाइयों व मिलों का परिचालन ठप हो गया था। हालांकि रविवार को प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू कर आंदोलनकारियों को गेट से हटा दिया, लेकिन कई यूनिटों के बंद होने से उत्पादन सामान्य करने में बीएसएल को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मियों ने कहा- कई समस्याओं से जूझते रहे शनिवार को दिनभर प्लांट के अंदर फंसे कई मजदूरों ने नाम नहीं छापने के आग्रह पर बताया कि प्लांट को बचाना था, इसलिए प्रबंधन के आग्रह पर रुक गए थे। रविवार सुबह 6 बजे निकले। इस दौरान घर से परिजन फोन पर जानकारी ले रहे थे कि अंदर किस हालत में हैं। अंदर स्थिति विकट थी। बाहर लोग गेट जाम कर बैठे थे, अंदर खाने-पीने के लाले पड़ गए थे। प्रबंधन ने नाश्ता का प्रबंधन किया था, लेकिन वह पर्याप्त नहीं था। जब प्रबंधन को आशंका थी कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, तो पूरी व्यवस्था करनी चाहिए थी।
भूख हड़ताल… विधायक श्वेता की तबीयत बिगड़ी, धरना स्थल पर किया जा रहा इलाज
