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झारखंड में मुआवजे के भुगतान के बाद भी जमीन के म्यूटेशन में अक्सर विवाद खड़ा हो जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। अब पुरानी जमीन का डिजिटल नक्शा बनने के साथ ही सड़क-रेल, सिंचाई और खनन परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित जमीन का पूरा रिकॉर्ड एक ही पोर्टल पर होगा। पहले से अधिग्रहित जमीन का इस्तेमाल दूसरी परियोजनाओं में भी हो सकेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने एकीकृत लैंड एक्विजिशन पोर्टल तैयार किया है। इसमें पुरानी, वर्तमान और भविष्य की परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित जमीन का रिकॉर्ड होगा। मुआवजे के भुगतान और संबंधित विभाग या संस्था के नाम भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होते ही म्यूटेशन की कार्रवाई खुद शुरू हो जाएगी। इसमें जमीन का खाता, खसरा, रकबा, नक्शा, मुआवजा भुगतान और म्यूटेशन की स्थिति दर्ज होगी। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरुआ ने प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी है। मामला कैबिनेट को भेज दिया गया है। कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही नई व्यवस्था शुरू हो जाएगी। झारभूमि से जुड़ेगा पोर्टल, अपडेट रहेगा रिकॉर्ड राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का कहना है कि इस पोर्टल का उद्देश्य उन खामियों को दूर करना है, जिनके कारण मुआवजा भुगतान के बाद भी जमीन का राजस्व रिकॉर्ड संबंधित विभाग या संस्था के नाम पर अपडेट नहीं हो पाता। इससे भूमि विवाद, अभिलेखों में विसंगति और सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में परेशानी होती है। इसे दूर करने के लिए पोर्टल के विकास, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी झारभूमि पीएमयू को दी जाएगी। इसके लिए अलग से कोई खर्च नहीं होगा। एकीकृत लैंड एक्विजिशन पोर्टल को झारभूमि जैसे मौजूदा भूमि रिकॉर्ड सिस्टम से एपीआई (एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) के माध्यम से जुड़ेगा। 3 स्तर पर होगा जमीन का प्रबंधन 1: पूर्व में पूरी हो चुकी अधिग्रहण प्रक्रिया के दस्तावेज अपलोड होंगे। जमीन की डिजिटल मैपिंग, जीआईएस आधारित नक्शा, खाता-खसरा और म्यूटेशन की स्थिति दर्ज होगी। यह भी चिह्नित होगा कि अधिग्रहित जमीन का कितना हिस्सा इस्तेमाल नहीं हुआ है।
2: अधिसूचना जारी होने, आपत्तियों के निस्तारण, भूमि अधिघोषणा, मुआवजा निर्धारण, पंचाट (अवार्ड) और भुगतान की स्थिति की रियल टाइम निगरानी होगी।
3: नए प्रोजेक्ट के लिए पहले से अधिग्रहित लेकिन खाली भूमि की उपलब्धता जांची जा सकेगी। क्या होगा लाभ.. रैयतों को अपनी जमीन से संबंधित अधिग्रहण की स्थिति जानने के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े, इसके लिए नागरिकों को भी पोर्टल पर जानकारी देखने की सुविधा देने का प्रस्ताव है। वे अधिसूचना, अधिघोषणा, पंचाट, मुआवजा भुगतान और आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे। मुआवजा के लिए जरूरी दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था भी रहेगी। सरकार को अधिग्रहित जमीन की उपलब्धता, इस्तेमाल और लंबित प्रक्रियाओं की एकीकृत जानकारी मिल सकेगी। किन कानूनों के तहत अधिग्रहित जमीन होगी शामिल: प्रस्तावित पोर्टल में भूमि अधिग्रहण से संबंधित अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं के अंतर्गत अर्जित जमीन का रिकॉर्ड शामिल करने की योजना है। इनमें मुख्य रूप से भू-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 तथा पुराने अधिग्रहण के लिए लागू संबंधित कानूनी प्रावधान शामिल होंगे। -शेष पेज 11 पर
अधिग्रहित जमीन का पूरा रिकॉर्ड एक पोर्टल पर होगा:खत्म होगा विवाद, अब मुआवजे के भुगतान के बाद खुद होगा म्यूटेशन
