
Bihar MLC Election : पटना. बिहार विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए शुक्रवार को होने वाले मतदान से पहले पटना साइंस कॉलेज में पांच फर्जी शिक्षक मतदाताओं के नाम सामने आये हैं. ये सभी नाम पटना विश्वविद्यालय के पटना साइंस कॉलेज से जुड़े बताये जा रहे हैं. कॉलेज ने अपने तीन वास्तविक शिक्षकों को मतदाता सूची में शामिल करने की मांग भी की थी, लेकिन उनके नाम अंतिम सूची में नहीं जोड़े गए. मामले का खुलासा होने के बाद कॉलेज प्रशासन ने निर्वाचन आयोग को इसकी शिकायत कर दी है. जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग की ओर से अब तक इस मामले में कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है.
इन पांच नामों पर है कॉलेज को आपत्ति
जानकारी के अनुसार कॉलेज प्रशासन को शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची प्राप्त होने के बाद इस गड़बड़ी का पता चला. प्रशासन ने जब सूची में दर्ज शिक्षकों के नामों का कॉलेज में कार्यरत शिक्षकों के रिकॉर्ड से मिलान किया गया तो पता चला कि ये पांच नाम से कोई भी कॉलेज में कार्यरत ही नहीं हैं. मतदाता सूची में राकेश रंजन, तरुण कुमार, कौशलेंद्र, विकास कुमार और शिव शंकर के नाम शामिल हैं. इन पांचों के नाम कथित रूप से फर्जी मतदाता के तौर पर सामने आये हैं.
कॉलेज ने शिक्षक के तौर पर कार्यरत होने से किया इनकार
मामले की जानकारी मिलते ही कॉलेज प्रशासन ने तत्काल निर्वाचन आयोग को सूचित किया. चुनाव आयोग से की गयी शिकायत में कहा गया है कि वोटर लिस्ट में कई नाम ऐसे हैं जो पटना साईंस कॉलेज के शिक्षक के रूप में रजिस्टर्ड हैं, लेकिन वास्तव में ये लोग इस कॉलेज में शिक्षक के रूप में कार्यरत नहीं है. मतदान से ठीक पहले वोटर लिस्ट में ऐसी गड़बड़ी सामने आने से मामला गंभीर हो गया है. अब निर्वाचन आयोग की ओर से इस संबंध में जांच और आवश्यक कार्रवाई किए जाने की उम्मीद है.
कॉलेज की ओर भेजा गया था शिक्षकों का नाम
कॉलेज की ओर से कुछ छूटे हुए शिक्षकों का नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए भेजा गया था. लेकिन जब कॉलेज को फाइनल सूची मिली तो उसमें पांच फर्जी वोटर का नाम जुड़ा मिला. इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने लिस्ट में जुड़े पांच फर्जी नाम की तफ्तीश की तो पता चला कि इस नाम के कोई शिक्षक नहीं हैं. इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने इसकी सूचना निर्वाचन आयोग को दी. पांच नाम जो जुड़े हैं इसमें से कोई भी नाम ऐसा नहीं जो पूर्व में भी कॉलेज से जुड़े थे. इस यह साफ हो गया की यह पांच फर्जी वोटर ही हैं.
मेरे पास जब वोटर लिस्ट का मामला पहुंचा तो मैंने तत्काल उसकी पड़ताल की. मुझे लिस्ट में कई वास्तविक शिक्षकों का नाम नहीं दिया, जबकि कुछ ऐसे नाम दिखे जो कॉलेज में कार्यरत नहीं हैं. मैंने तत्काल इसकी सूचना प्रशासन को दे दी.
–अलका कुमारी, प्रिंसिपल, पटना साईंस कॉलेज
केवल एक कॉलेज का मामला नहीं
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में यह किसी एक कॉलेज का मामला नहीं है. कई कॉलेजों में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं. संत कबीर महंत विद्यानंद आयुर्वेद फार्मेसी कॉलेज फतुहा और RPRKD आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, फतुहा में भी ऐसे मामले सामने आये हैं. यहां जिला प्रशासन की तरफ से जांच के लिए स्पेशल टीम बनाई गई. जिला प्रशासन की टीम पहले 4 जून को और बाद में 21 जून को कॉलेज के फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए गई, लेकिन दोनों बार कॉलेज बंद मिला.
संस्थान में शिक्षक केवल 16, वोटर 33 बन गये
स्थानीय मीडिया रिपोर्टस के अनुसार वोटर लिस्ट में इन दोनों कॉलेज से 50 से ज्यादा वोटर्स रजिस्टर्ड हैं. संत कबीर महंत विद्यानंद कॉलेज में 17 शिक्षक हैं, इनमें 16 वोटर बन सकते हैं. वोटर लिस्ट में यहां से कुल 33 शिक्षकों का नाम दर्ज है. इसी प्रकार एसटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन के अलग-अलग कॉलेज के नाम से लगभग 48 वोटर्स बनाया गया है. ग्रुप के डायरेक्टर का कहना है कि सभी फर्जी हैं. ग्रुप के डायरेक्टर ने जिला प्रशासन को इस संबंध में पत्र लिखा है.
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पूरी की पूरी लिस्ट ही फर्जी
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के वोटर लिस्ट में ऐसे संस्थान के शिक्षकों को भी वोटर बनाया गया है, जिस संस्थान का अस्तित्व ही नहीं है. सिद्धार्थ महिला कॉलेज को पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी से एफिलिएटेड बताया गया है, लेकिन यूनिवर्सिटी बेवसाइट के अनुसार इस नाम से कोई कॉलेज रजिस्टर्ड नहीं है. इस कॉलेज से करीब 46 वोटर्स बनाए गए हैं. इतना ही नहीं जगतारण कुंवर प्राइवेट आईटीआई, नौबतपुर के नाम पर 20 वोटर बनाये गये हैं, जबकि एक भी वोटर संस्थान में शिक्षक नहीं है. पूरी लिस्ट ही फर्जी बतायी जा रही है.
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