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जब एक ही छत के नीचे अंतरिक्ष के रॉकेट का रोमांच हो, सूक्ष्मदर्शी में दिखता मच्छरों का संसार हो और झारखंड की पारंपरिक सोहराई कला में चमकता पीतल का जादू हो, तो उत्सुकता का आसमान छूना स्वाभाविक है। रांची क्लब में गुरुवार से तीन दिवसीय ‘स्वर्णिम भारत एक्सपो 2026’ का भव्य आगाज हुआ। इस प्रदर्शनी की परिकल्पना राज्यसभा सांसद व झारखंड भाजपा अध्यक्ष आदित्य प्रसाद साहू की रही। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने युवाओं को नशे की गर्त से दूर रहकर शिक्षा, खेल, कौशल विकास और सृजनात्मक कार्यों से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री के ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ के संकल्प को जनभागीदारी से ही सिद्धि तक पहुंचाया जा सकता है। समारोह में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, मेयर रोशनी खलखो, डिप्टी मेयर नीरज कुमार व विधायक सीपी सिंह सहित कई गणमान्य मौजूद रहे। शहर के विभिन्न स्कूलों से पहुंचे बच्चों की आंखों में नए भारत की तकनीकी और वैज्ञानिक उड़ान साफ दिखाई दी। माइक्रोस्कोप में दिखा ‘मच्छर का संसार’, डॉक्टरों ने दिए मच्छर से बचाव के टिप्स आईसीएमआर के स्टॉल पर डॉ. प्रवीण कुमार त्रिपाठी ने बच्चों को आधुनिक यंत्रों के जरिए दिखाया कि डेंगू, मलेरिया और फाइलेरिया फैलाने वाले मच्छर सूक्ष्म स्तर पर कैसे दिखते हैं। बच्चों ने मच्छर के डंक, आंख और पैरों की संरचना देख बचाव के उपाय और मेडिकेटेड मच्छरदानी का महत्व समझा। सोहराई पेंटिंग पर पीतल की नक्काशी है खास हजारीबाग की कलाकार रेणु कुमारी की पारंपरिक सोहराई चित्रकला और ब्रास (पीतल) वर्क के संगम ने आगंतुकों का ध्यान खींचा। इसमें झारखंड के किसान, जंगल और मांदर की थाप पर थिरकते कलाकारों की आकृतियों को फ्रेम किया गया है, जिनकी कीमत 1,500 से 3,000 रुपए तक है। इसरो का स्पेस कॉर्नर बना बच्चों की पहली पसंद इसरो के स्टॉल पर स्कूली विद्यार्थियों की सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ी। यहां चंद्रयान, पीएसएलवी, एलवीएम और रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल (RLV-TD) के मॉडल्स को देखकर बच्चे रोमांचित हुए। वहां मौजूद वैज्ञानिकों से स्टूडेंट्स व घूमने आए लोगों ने रॉकेट लॉन्चिंग की बारीकियां समझीं।
नशे से दूरी व हुनर से यारी: सजी विज्ञान, तकनीक व माटी के हुनर की अनूठी दुनिया
