
Investigation : पटना. बिहार में घर की रसोई संभालने वाली महिलाएं अब खान-पान के कारोबार में भी अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं. ठेला-खोमचा, ढाबा, चाट-पकौड़ा व स्ट्रीट फूड के कारोबार से जुड़कर बिहार की महिलाएं न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं, बल्कि परिवार के भरण-पोषण में भी अहम भूमिका निभा रही है. फूड सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी के मामले में बिहार राष्ट्रीय औसत से आगे है.
मुख्य बातें
- बिहार में ठेला-खोमचा और ढाबों से परिवार चला रहीं महिलाएं.
- फूड सेक्टर में 1.90 लाख कामगार ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत.
- बिहार में स्ट्रीट फूड बना रोजगार का बड़ा जरिया.
- खान-पान के कारोबार में महिलाओं की भागीदारी 52 फीसदी.
- स्ट्रीट फूड कारोबार में बिहार की महिलाएं देश में दूसरे स्थान पर.
- पटना में सबसे अधिक रोजगार.
बिहार देश में दूसरे स्थान पर
राज्य भर में इस क्षेत्र में काम करने वाले कुल कामगारों में 52 फीसदी महिलाएं हैं, जबकि देश में महिलाओं की औसत भागीदारी 41 फीसदी है. इस मामले में बिहार देश में दूसरे स्थान पर है. असंगठित क्षेत्र के कामगारों का पंजीकरण 2021 से ई-श्रम पोर्टल पर किया जा रहा है. पोर्टल पर फूड सेक्टर के 18.60 लाख से अधिक कामगारों ने पंजीकरण कराया है. इनमें यूपी में सबसे अधिक 3.82 लाख और बिहार में 1.90 लाख कामगार पंजीकृत है.
ई-श्रम पोर्टल पर फूड सेक्टर के पंजीकृत कामगार
| क्रम संख्या | राज्य/विवरण | पंजीकृत कामगारों की संख्या |
| 1 | उत्तर प्रदेश | 3.82 लाख |
| 2 | बिहार | 1.90 लाख |
| 3 | महाराष्ट्र | 1.64 लाख |
| 4 | मध्य प्रदेश | 1.62 लाख |
| — | देशभर में कुल | 18.60 लाख से अधिक |
फूड सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी
| क्रम संख्या | विवरण | महिलाओं की भागीदारी |
| 1 | बिहार | 52% |
| 2 | राष्ट्रीय औसत | 41% |
| — | राष्ट्रीय औसत से बिहार आगे | 11 प्रतिशत अंक |
मुख्य तथ्य
- फूड सेक्टर में काम करने वाले कुल कामगारों में बिहार में 52% महिलाएं हैं.
- महिला भागीदारी के मामले में बिहार देश में दूसरे स्थान पर है.
- ई-श्रम पोर्टल पर असंगठित क्षेत्र के कामगारों का पंजीकरण वर्ष 2021 से किया जा रहा है.
18 से 40 वर्ष के 69 फीसदी कामगार
बिहार के फूड सेक्टर में युवाओं की भागीदारी सबसे अधिक है.इस क्षेत्र में काम करने वाले 69 फीसदी कामगार 18 से 40 वर्ष की उम्र के है. वहीं, 40 से 50 वर्ष की उम्र के कामगारों की हिस्सेदारी 18 फीसदी है. 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग भी इस कारोबार में अपनी आजीविका चला रहे हैं. उनकी हिस्सेदारी 12 फीसदी से अधिक है.
बिहार के फूड सेक्टर में उम्र के आधार पर कामगारों की भागीदारी
| क्रम संख्या | कामगारों का आयु वर्ग | कुल कामगारों में हिस्सेदारी |
| 1 | 18 से 40 वर्ष | 69% |
| 2 | 40 से 50 वर्ष | 18% |
| 3 | 50 वर्ष से अधिक | 12% से अधिक |
ठेला-खोमचा और ढाबे सबसे अधिक दे रहा रोजगार
राज्य में स्ट्रीट फूड का कारोबार रोजगार का बड़ा माध्यम बनकर उभरा है. बिहार में फूड सेक्टर के रोजगार में ठेला-खोमचा, ढाबा, चाट-पकौड़ा और अन्य स्ट्रीट फूड कारोबार की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है. इस क्षेत्र में 4.36 लाख से अधिक लोग काम कर रहे हैं. वहीं, बेकरी में करीब 40 हजार, फूड ग्रेन और मिलिंग से जुड़े काम में 16 हजार तथा होम डिलिवरी के क्षेत्र में 15 हजार लोग कार्यरत है. दूध बेचने और चाय बनाने के काम में भी 10-10 हजार से अधिक लोग जुड़े है. खाना बनाने के काम में करीब 10 हजार और ठेले पर फल बेचने के कारोबार में 6,500 से अधिक लोग काम कर रहे है.
बिहार की ताजा खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
बिहार में फूड सेक्टर के विभिन्न कारोबारों में रोजगार
| क्रम संख्या | कारोबार का क्षेत्र | कामगारों की संख्या |
| 1 | चाट-पकौड़ा और अन्य स्ट्रीट फूड | 4.36 लाख से अधिक |
| 2 | बेकरी | करीब 40 हजार |
| 3 | फूड ग्रेन और मिलिंग | करीब 16 हजार |
| 4 | होम डिलिवरी | करीब 15 हजार |
| 5 | दूध बेचने का कारोबार | 10 हजार से अधिक |
| 6 | चाय बनाने का कारोबार | 10 हजार से अधिक |
| 7 | खाना बनाने का काम | करीब 10 हजार |
| 8 | ठेले पर फल बेचने का कारोबार | 6,500 से अधिक |
पटना में सबसे अधिक कामगार
बिहार के जिलों में फूड सेक्टर से जुड़े कामगारों की संख्या
| क्रम संख्या | जिला | कामगारों की संख्या |
| 1 | पटना | 12 हजार से अधिक |
| 2 | मुजफ्फरपुर | करीब 10 हजार |
| 3 | मधुबनी | लगभग 8,400 |
| 4 | पूर्वी चंपारण | लगभग 8,400 |
| 5 | समस्तीपुर | 7,500 से अधिक |
| 6 | पश्चिमी चंपारण | लगभग 7,300 |
| 7 | भागलपुर | करीब 5,700 |
स्ट्रीट फूड का यह कारोबार महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है. कम पूंजी में शुरू होने वाले इन व्यवसायों के जरिये महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ परिवार की आय में भी योगदान दे रही है.
केस स्टडी-1: नर्सिंग चायवाली प्रीति झा
पटना के महेंद्रू इलाके में एक छोटी-सी चाय की दुकान चलाने वाली प्रीति झा आज सोशल मीडिया पर 'नर्सिंग चायवाली' के नाम से जानी जाती हैं. आज उनकी पहचान सिर्फ चाय बेचने तक सीमित नहीं है, इसके पीछे संघर्ष, हिम्मत और अपनी बेटी के बेहतर भविष्य के लिए कुछ करने का जुनून है. प्रीति ने नर्सिंग की पढ़ाई की है और उनकी शादी भी हुई, लेकिन पति की शराब की लत और शादीशुदा जिंदगी में परेशानियों के कारण उन्हें अपने पति से अलग होने का फैसला लेना पड़ा. अपनी छोटी बेटी की जिम्मेदारी उठाने और उसे बेहतर भविष्य देने के लिए प्रीति ने खुद चाय का स्टॉल शुरू किया. आज वह अपनी मेहनत से महीने का 30,000 रुपये तक की कमाई कर लेती है.
- प्रीति झा से हमारी सहयोगी पत्रकार रिया सिंह की बातचीत
केस स्टडी-2 : दो बहनों का स्टार्टअप 'कुचु पुचु'
पटना के एसके पुरी पार्क के पास अपना स्टॉल चलाने वाली दो बहनों का 'कुचु-पुचु' नाम से चलने वाला स्टॉल युवा वर्ग में खास पॉपुलर है. एक बहन शादीशुदा हैं, जबकि दूसरी बहन ने अपनी मां की खराब तबीयत के कारण कॉरपोरेट जॉब छोड़ कर पटना आयी. राशिका वरुण तिवारी और सपना तिवारी दोनों बहनों ने स्टॉल लगाने का फैसला लिया. आज अपनी मेहनत से अच्छी कमाई कर रही हैं. लेकिन इनका सफर आसान नहीं रहा. सड़क किनारे जगह की व्यवस्था से लेकर घर की व्यवस्था देखने तक के लिए इन्हें संघर्ष करना पड़ा. सपना बताती है कि नौकरी छोड़कर अपना काम शुरू करना आसान नहीं होता. अपना काम शुरू करने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
- सपना तिवारी से हमारी सहयोगी पत्रकार रिया सिंह की बातचीत
The post Investigation : स्ट्रीट फूड बिजनेस से घर चला रही बिहार की 52% महिलाएं, राष्ट्रीय औसत को पछाड़ पहुंची देश में दूसरे नंबर पर appeared first on Prabhat Khabar.

