
Saharsa PM Awas Yojana Bribery Case: जिस प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है, उसी योजना की दूसरी किस्त जारी करने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप सामने आया है. सहरसा जिले के सौरबाजार नगर पंचायत कार्यालय में मंगलवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने आवास सहायक मुकुल कुमार को कथित तौर पर 72 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया. आरोप है कि नौ लाभुकों की दूसरी किस्त जारी करने के एवज में प्रति लाभुक आठ हजार रुपये की मांग की गयी थी.
वार्ड नंबर दो के पार्षद हरिकृष्ण कुमार की शिकायत पर यह कार्रवाई की गयी. निगरानी टीम ने शिकायत का सत्यापन कराने के बाद योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की. कार्रवाई के दौरान कथित रिश्वत की राशि बरामद की गयी और आरोपी को हिरासत में ले लिया गया. इसके बाद टीम उसे आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए अपने साथ पटना ले गयी.
दूसरी किस्त के लिए मांगे जा रहे थे 8-8 हजार रुपये
मामला प्रधानमंत्री आवास योजना के नौ लाभुकों की दूसरी किस्त से जुड़ा है. शिकायत के अनुसार, सौरबाजार नगर पंचायत में कार्यरत आवास सहायक मुकुल कुमार पर आरोप था कि वह योजना की दूसरी किस्त जारी कराने के बदले लाभुकों से पैसे मांग रहा था.
वार्ड पार्षद हरिकृष्ण कुमार ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज करायी थी. शिकायत में कहा गया कि प्रत्येक लाभुक से प्रति एक लाख रुपये की योजना राशि पर आठ हजार रुपये देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था. नौ लाभुकों के भुगतान के एवज में कुल 72 हजार रुपये की मांग की गयी थी.
आवास योजना की किस्त लाभुकों के लिए घर बनाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया में रिश्वत मांगने का आरोप सामने आने से योजना के क्रियान्वयन और लाभुकों की परेशानियों को लेकर सवाल खड़े होते हैं.
30 सितंबर को शिकायत, सत्यापन के बाद दर्ज हुआ मामला
निगरानी ब्यूरो के अनुसार, परिवादी हरिकृष्ण कुमार ने 30 सितंबर को इस मामले में शिकायत दर्ज करायी थी. शिकायत मिलने के बाद ब्यूरो ने आरोपों का सत्यापन कराने की प्रक्रिया शुरू की.
इसके लिए सत्यापनकर्ता को नौ अक्टूबर को सौरबाजार नगर पंचायत कार्यालय भेजा गया. जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होने की रिपोर्ट ब्यूरो को सौंपी गयी. इसके बाद 26 अक्टूबर को थाना कांड संख्या 126/26 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया.
सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर निगरानी विभाग ने आगे की कार्रवाई की तैयारी की. इसके बाद मंगलवार को आरोपी को रिश्वत लेते पकड़ने के लिए विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया.
आठ सदस्यीय टीम ने कार्यालय में की कार्रवाई
मामले में कार्रवाई के लिए निगरानी डीएसपी संजय कुमार के नेतृत्व में आठ सदस्यीय विशेष छापेमारी दल बनाया गया. टीम ने सौरबाजार नगर पंचायत कार्यालय में योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की.
परिवादी हरिकृष्ण कुमार के अनुसार, नौ लाभुकों की दूसरी किस्त के भुगतान के एवज में मांगी गयी 72 हजार रुपये की राशि लेकर वह कार्यालय पहुंचे और आवास सहायक को दी. इसी दौरान निगरानी टीम ने मुकुल कुमार को कथित रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया.
कार्रवाई के बाद आरोपी को निगरानी टीम ने हिरासत में लिया. टीम उसे आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए परिसदन लेकर पहुंची. इसके बाद आरोपी को अपने साथ पटना ले जाया गया, जहां मामले में आगे की प्रक्रिया जारी है.
गरीब परिवारों के घर से जुड़ी है योजना की राशि
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने में सहायता देना है. मकान निर्माण की प्रक्रिया में निर्धारित किस्तों का समय पर मिलना लाभुकों के लिए महत्वपूर्ण होता है. राशि मिलने में देरी या भुगतान के बदले अवैध मांग जैसी स्थिति से परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है.
सौरबाजार मामले में नौ लाभुकों की दूसरी किस्त जारी करने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया है. शिकायत के आधार पर निगरानी विभाग ने कार्रवाई की है. हालांकि, संबंधित लाभुकों को किस्त की राशि कब मिलेगी और उनके आवास निर्माण की वर्तमान स्थिति क्या है, इसकी जानकारी फिलहाल सामने नहीं आयी है.
इस मामले में आगे की जांच के दौरान आरोपों से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी. साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि लाभुकों की किस्त से संबंधित प्रक्रिया नियमानुसार पूरी हो और उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े.
आरोपी को पटना ले गयी निगरानी टीम, आगे की कार्रवाई जारी
गिरफ्तारी के बाद निगरानी ब्यूरो की टीम आरोपी मुकुल कुमार से पूछताछ कर रही है. कार्रवाई में अनुसंधानकर्ता इंस्पेक्टर समेत अन्य अधिकारी शामिल थे. आरोपी को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए पटना ले जाया गया है.
फिलहाल मामले में निगरानी ब्यूरो की कार्रवाई और जांच जारी है. शिकायत, सत्यापन रिपोर्ट और बरामद राशि से संबंधित तथ्यों की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की जाएगी. आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा.
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