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झारखंड के चर्चित शराब घोटाले की जांच में नया और सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच में यह जानकारी सामने आई है कि अवैध वसूली की रकम के कलेक्शन और सेटलमेंट के लिए उत्पाद विभाग के शीर्ष स्तर पर बैठे अधिकारियों ने अपने करीबी रिश्तेदारों तक को इस तंत्र में शामिल कर रखा था। जांच के दौरान मैनपावर सप्लाई एजेंसी विजन हॉस्पिटैलिटी सर्विस एंड कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े अधिकारी नीरज कुमार सिंह ने पुलिस रिमांड में अहम बयान दिया। यह बयान एसीबी कोर्ट रांची के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार सिंह के आदेश के आलोक में दर्ज किया गया। ओवर प्राइसिंग से हर महीने वसूली का आरोप नीरज कुमार सिंह के बयान के अनुसार, उत्पाद विभाग में सचिव पर रहे एक अफसर को शराब की ओवर प्राइसिंग से वसूले गए लाखों रुपए में से नियमित हिस्सा दिया जाता था। दावा है कि यह भुगतान एक-दो बार नहीं, बल्कि कई बार हुआ और मासिक रूप से ~10-12 लाख से अधिक की राशि उन्हें पहुंचाई जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि कथित अवैध वसूली की रकम सीधे लेने के बजाय परिजनों के माध्यम से रिसीव की जाती थी। आरोप है कि अधिकारी के रिश्तेदार के माध्यम से रकम की रिसीविंग कराई जाती थी। एसीबी ने मामले में वित्तीय लेनदेन, कॉल डिटेल और विभागीय प्रक्रियाओं की जांच तेज कर दी है।
शराब घोटाले में बड़ा खुलासा… वसूली तंत्र में अफसरों के परिजन भी थे शामिल
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