कौन हैं मेनका गुरुस्वामी? ममता बनर्जी ने बनाया राज्यसभा चुनाव का उम्मीदवार

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कौन हैं मेनका गुरुस्वामी? ममता बनर्जी ने बनाया राज्यसभा चुनाव का उम्मीदवार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. जिसमें सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी भी शामिल हैं. इनके अलावा टीएमसी ने बाबुल सुप्रियो, राजीव कुमार और कोयल मल्लिक को भी उम्मीदवार बनाया है. मेनका गुरुस्वामी अगर राज्यसभा पहुंच जाती हैं तो वह LGBTQ समुदाय से आने वालीं पहली सांसद होंगी.

मेनका गुरुस्वामी सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं. 2017 से 2019 तक मेनका न्यूयॉर्क के कोलंबिया लॉ स्कूल में बीआर आंबेडकर रिसर्च स्कॉलर और लेक्चरर थीं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में धारा 377 पर अपनी दलीलें रखी थीं. जिसके बाद 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया था.

कौन हैं मेनका गुरुस्वामी?

बता दें कि मेनका गुरुस्वामी का जन्म 27 नवंबर 1974 को हुआ था. उनके पिता मोहन गुरुस्वामी पूर्व बीजेपी सांसद यशवंत सिन्हा के विशेष सलाहकार थे. उनकी मां का नाम मीरा गुरुस्वामी हैं. मेनका ने स्कूली शिक्षा हैदराबाद पब्लिक स्कूल से हासिल की, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली के सरदार पटेल स्कूल से हाई स्कूल की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने साल 1997 में बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी से BALLB की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से बीसीएल और फिर हार्वर्ड लॉ स्कूल से एलएलएम किया.

एलएलबी करने के बाद 1997 में मेनका गुरुस्वामी ने बार काउंसिल की सदस्यता हासिल की. फिर उन्होंने तत्कालीन अटॉर्नी जनरल अशोक देसाई के साथ काम किया. वहीं ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड से डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने न्यूयॉर्क में वकालत की.

कौन हैं मेनका गुरुस्वामी की पार्टनर?

मेनका गुरुस्वामी की पार्टनर अरुंधति काटजू हैं. काटजू भी वकील हैं. दोनों ने धारा 377 के खिलाफ केस लड़ा था. 2009 में दिल्ली हाई कोर्ट ने धारा 377 को निरस्त कर दिया था. जिसके बाद इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. तब तब मेनका और अरुंधति ने मिलकर सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ा. 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया.

हालांकि सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को फिर से निरस्त कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद मेनका और अरुंधति काटजू को 2018 में दुनियाभर में तारीफ मिली. जिसके बाद दोनों का नाम टाइम मैग्जीन के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में शामिल किया था.

मेनका गुरुस्वामी ने कई अहम केस लड़ा

धारा 377 के अलावा मेनका गुरुस्वामी कई अहम केस की पैरवी कर चुकी हैं और जीत भी चुकी हैं. ऐसा ही एक केस नौकरशाही से जुड़ा है. उन्होंने राइट टू एजुकेशन से जुड़ा केस भी लड़ा है. इसके अलावा, अगस्ता वेस्टलैंग घोटाले में उन्होंने पूर्व एयर चीफ मार्शल एसपी त्यागी के लिए स्पेशल कोर्ट में पैरवी की थी. उन्हें जमानत दिलवाई थी.

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