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नालंदा के एक प्राइवेट अस्पताल से बच्चे की कथित अदला-बदली और गायब होने का सनसनीखेज मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। बिहार थाना कांड संख्या 453/2023 से जुड़े इस मामले में करीब 3 साल बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली है। इस बीच, पटना हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बच्चे की पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए (DNA) टेस्ट का बड़ा आदेश दिया है। ये पूरा मामला बाल तस्करी और आपराधिक साजिश की ओर इशारा करता है। आरोप है कि पीड़ित परिवार के बच्चे को आरोपी डॉक्टर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन 17 दिनों बाद लड़के की जगह एक लड़की उन्हें सौंप दी गई। इस मामले की जांच पूर्व में डीडीसी और एसडीओ नालंदा की ओर से की गई थी, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अब पटना हाईकोर्ट में वकील राजीव कुमार सक्सेना की ओर से दायर ‘हेबियस कॉर्पस’ याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने एसपी नालंदा और आरोपी डॉक्टर को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट के सख्त रुख से हड़कंप, आरोपी को राहत नहीं मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुधीर सिंह और न्यायमूर्ति राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए वैज्ञानिक जांच अनिवार्य है। वहीं दूसरी ओर, आरोपी डॉक्टर ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सिविल कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर “नो कोअर्सिव स्टेप” (कठोर कार्रवाई न करने) की मांग की थी, जिसे अदालत ने ठुकरा दिया है। इससे आरोपी की गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। अधिकारियों की मौजूदगी में लिए गए ब्लड सैंपल अदालती आदेश के अनुपालन में नालंदा के एसपी भारत सोनी, सिविल सर्जन डॉ.जय प्रकाश सिंह और अंचलाधिकारी (CO) की उपस्थिति में महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए गए हैं। चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में रह रहे बच्चे और याचिकाकर्ता की पत्नी सिंकी कुमारी के रक्त के नमूने लिए गए हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इन सैंपलों को पूरी पारदर्शिता के साथ याचिकाकर्ता के सामने सील किया जाए। FSL पटना भेजी गई रिपोर्ट, 6 हफ्ते में देना है जवाब सील किए गए नमूनों को डीएनए परीक्षण के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL), सरदार पटेल भवन, पटना भेज दिया गया है। हाईकोर्ट ने एफएसएल अधिकारियों को अगले छह सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को मुकर्रर की गई है।
नालंदा में निजी अस्पताल से बच्चे की अदला-बदली का मामला:तीन साल बाद भी पुलिस के साथ कोई सुराग नहीं, हाईकोर्ट के आदेश पर अब DNA टेस्ट
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