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झारखंड हाईकोर्ट ने उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (सीजीआरएफ) रांची और चाईबासा में सेकेंड मेंबर के पद पर नई नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान सदस्यों के कार्यकाल को समाप्त करने या नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने से पहले उनके कार्य का मूल्यांकन करना आवश्यक है। न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत ने यह फैसला प्रमोद कुमार और अन्य की याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया। कोर्ट ने 7 अगस्त 2025 को जारी विज्ञापन संख्या 03/2025 को निरस्त करते हुए झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) को निर्देश दिया कि पहले वर्तमान सेकेंड मेंबर के कार्य का मूल्यांकन किया जाए। यदि उनका प्रदर्शन असंतोषजनक पाया जाता है, तभी नए सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाए। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए मामले का निष्पादन कर दिया। नियमों के उल्लंघन का आरोप : याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि जेबीवीएनएल ने 7 अगस्त 2025 को विज्ञापन जारी कर उनके पदों पर नई नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित िकया है, जबकि उनके कार्यकाल के विस्तार पर कोई निर्णय नहीं लिया गया था। उनका कहना था कि झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (जेएसईआरसी) के वर्ष 2020 के विनियमों के अनुसार सीजीआरएफ के सदस्यों का प्रारंभिक कार्यकाल तीन वर्ष का होता है, जिसे संतोषजनक सेवा के आधार पर दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। कार्यकाल बढ़ाना अनिवार्य नहीं : जेबीवीएनएल की ओर से अदालत में दलील दी गई कि सदस्यों के कार्यकाल का विस्तार देना अनिवार्य नहीं है और यह वितरण लाइसेंसी के विवेक पर निर्भर करता है। इसी आधार पर नए सिरे से भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था।
रांची और चाईबासा में सीजीआरएफ में सेकेंड मेंबर नियुक्ति का विज्ञापन रद्द
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