UPSC ने सिविल सर्विस एग्जाम 2025 का शुक्रवार को फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया। टॉप-10 में बिहार के 2 कैंडिडेट्स हैं। मुजफ्फरपुर के सरैयागंज इलाके के रहने वाले राघव झुनझुनवाला ने चौथी, जबकि पटना के रहने वाले उज्जवल प्रियांक ने 10वीं रैंक हासिल की है।
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जारी रिजल्ट में कुल 180 कैंडिडेट्स IAS के लिए चयनित हुए हैं। IFS के लिए 55 कैंडिडेट्स का चयन हुआ है। वहीं, 150 IPS चुने गए हैं। कुल चयनिय अभ्यर्थियों में 24 स्टूडेंट्स बिहार के हैं।
इन 24 स्टूडेंट्स में से किराना दुकानदार का बेटा, मोटर पार्ट्स दुकानदार, दृष्टिबाधित और रणवीर सेना के चीफ रहे ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती शामिल है। पढ़िए, UPSC क्रैक करने वाले 5 अभ्यर्थियों की सक्सेस स्टेरी।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में ऑल इंडिया चौथी रैंक लाने वाले 26 साल के राघव झुनझुनवाला मुजफ्फरपुर के पंकज मार्केट के रहने वाले हैं।
सबसे पहले चौथी रैंक लाने वाले राघव झुनझुनवाला की कहानी
राघव ने कहा कि इतनी अच्छी रैंक आने की उम्मीद मुझे बिल्कुल नहीं थी। मैंने बस अपनी तरफ से पूरी ईमानदारी से मेहनत की थी और परिणाम क्या होगा, इसे लेकर ज्यादा नहीं सोचा था।
उन्होंने बताया कि इंटरव्यू काफी स्ट्रेसफुल था। वो लोग मुझे बोलने नहीं दे रहे थे। वो देखना चाह रहे थे कि मैं इस सिचुएसन को कैसे हैंडल करता हूं। अब रिजल्ट अच्छा आया है तो सब अच्छा है।
पढ़ाई के साथ-साथ ट्विटर पर भी एक्टिव रहा, तैयारी में मदद मिलती थी
राघव बताते हैं कि तैयारी के दौरान मैं सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल करता था। मैं ज्यादातर ट़विटर पर एक्टिव रहता था। मैंने सोशल मीडिया को तैयारी के इस्तेमाल किया। इससे मुझे करेंट अफेयर्स के अपडेट्स लगातार रियल टाइम में मिल जाते थे।
इसके अलावा सोशल मीडिया का इस्तेमाल बहुत सीमित समय के लिए करता था। कभी-कभी थोड़ा समय अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिताता था, लेकिन कोशिश यही रहती थी कि पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दिया जाए।
पहले पिता, फिर मां की ओर से लगातार मोटिवेशन मिलता रहा
राघव बताते हैं कि सफलता के पीछे फैमिली का बड़ा सपोर्ट है। पिता स्वर्गीय नवीन झुनझुनवाला ने बचपन से ही मोटिवेट किया था, जबकि मां अंजू देवी ने पढ़ाई से लेकर हर कदम पर साथ देती रहीं। उनकी वजह से ही मैं पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान दे सका।
ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान सिविल सर्विस की ओर रूझान बढ़ा, तैयारी शुरू की
वे बताते हैं कि शुरुआत में तैयारी को लेकर काफी मेहनत करनी पड़ी और धीरे-धीरे पढ़ाई की एक सही रणनीति बनती चली गई।
राघव ने बताया कि ये मेरा तीसरा अटेम्प्ट था। इससे पहले दो बार सफलता नहीं मिली। पिछली बार मैं इंटरव्यू राउंड तक पहुंचा था। लेकिन रिजल्ट नहीं आया। मेंस भी कुछ अच्छा नहीं गया। बावजूद इसके मैं पूरे लगन से तैयारी की। प्री और मेंस एग्जाम के बाद इस बार भी इंटरव्यू काफी टफ रहा, लेकिन रिजल्ट आ गया।

आकांक्षा भोजपुर जिले के अगिआंव प्रखंड के खोपीरा गांव की रहने वाली हैं। हालांकि, उनका परिवार आरा शहर के कतीरा मोहल्ले में रहता है।
रणवीर सेना के चीफ की पोती की UPSC में 301वीं रैंक
रणवीर सेना के चीफ रहे दिवंगत ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा को UPSC में 301वीं रैंक मिली है। आकांक्षा का चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के लिए हुआ है।
आकांक्षा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि मेरा जीवन बेहद सादगीपूर्ण रहा है और मैंने सीमित संसाधनों के बीच रहकर कड़ी मेहनत और लगन से ये मुकाम हासिल किया है। आकांक्षा ने कहा कि मेरे पिता कुमार इंदू भूषण सिंह किसान हैं और अखिल भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जबकि मां रिंकू देवी हाउस वाइफ हैं। परिवार में एक छोटा भाई हर्ष भूषण भी है, जो छत्तीसगढ़ के कलिंगा में बीटेक की पढ़ाई कर रहा है।
सफलता का पहला श्रेय मम्मी को, मेरे लिए काफी स्ट्रगल किया
आकांक्षा ने कहा कि अपना पहला श्रेय मम्मी को दूंगी। उन्होंने मेरे लिए पूरा स्ट्रगल किया है। मैंने नर्सरी से लेकर 12 वीं तक कैथोलिक हाई स्कूल से पढ़ाई पूरा की है। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद अगस्त 2022 में दिल्ली चली गई और वही से कोचिंग और इसके अलावा 8 से 10 घंटे रेगुलर पढ़ाई कर इस मुकाम को हासिल किया है।
आकांक्षा ने बताया कि मैं शुरू से ही आईएफएस अधिकारी बनना चाहती थी। मेरे प्रेरणा स्रोत बाबा स्वर्गीय ब्रह्मेश्वर मुखिया ही रहे हैं। उनका सपना था कि उनके घर से एक आईएएस निकले। मेरा सब्जेक्ट ऑप्शनल PSIR रहा है। उन्होंने बताया कि ये मेरा दूसरा अटेम्प्ट था। 2024 में मैने पहला एग्जाम दिया था लेकिन क्लियर नहीं हुआ था।
भोजपुर से भोजपुरी को लेकर पैनल ने पूछा सवाल
आकांक्षा ने बताया कि इंटरव्यू में भोजपुर से भोजपुरी को लेकर एक सवाल पूछा गया था कि कला के क्षेत्र में किसे पद्म श्री पुरस्कार दिया गया है? मैंने जवाब दिया कि भोजपुर से भरत सिंह भारती जी को ये सम्मान मिला है। फिर उन्होंने मेरे फेवरेट क्रिकेटर के बारे में पूछा, तब मैंने विराट कोहली के बारे में बताया।
आकांक्षा ने कहा कि मेरे दादा का सपना आज पूरा हुआ है। ब्रह्मेश्वर मुखिया मेरे दादा हैं, इससे बड़ा गर्व की बात कुछ और नहीं हो सकता। आज जहां भी होंगे, वहां काफी खुश होंगे। जब मेरे बाबा थे, तब मैं छठी क्लास में पढ़ती थी। वे भी मुझे बेसिक पढ़ाई की जानकारी देते थे। मुझे हमेशा भरोसा दिलाते थे कि लाइफ में तुम कुछ बड़ा करोगी। सुबह 4 उठाकर बाबा पढ़ाई करवाते थे। मैथ्स की तैयारी कराते थे।
आकांक्षा के पिता बोले- मैं चाहता था कि बेटी IIT करे
आकांक्षा के पिता इंदू भूषण ने कहा कि मेरी बेटी ने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली है। ये काफी बड़ी खुशी है। मेरे पिता ब्रह्मेश्वर मुखिया कहते थे कि जो भी करना है, उसमें सबसे आगे रहना है। ये मैं अक्सर बेटी से कहता रहता था। मेरा जीवन संघर्ष में गुजरा है। मैंने इस संघर्ष में खुद को ढाल पाया। मैंने इसी बीच बेटी को काफी मोटिवेट भी किया।
बेटी बचपन से पढ़ाई में तेज थी। 12वीं तक मैथ्स अच्छा रहा, 100 में से 100 लाती थी। बेटी घर के काम में भी हाथ बंटाती है। घर का ऐसा कोई काम नहीं है, जो बेटी नहीं कर पाती।
मां रिंकू देवी बोलीं- बेटी की सफलता में बाबूजी का भी हाथ
आकांक्षा की मां रिंकू देवी ने कहा कि मेरा सपना था कि बेटी अच्छा करे। मैं कहती थी कि बेटी तुम बीटेक कर लो, ताकि जल्दी से कमाओ, लेकिन बेटी ने कहा कि नहीं मुझे यूपीएससी ही करना है। काम के लिए भी मैं कहती थी, ये भी बोलती थी कि कुछ भी करोगी तो खाना तो बनाना ही पड़ेगा, तो बेटी कहती थी कि नहीं मैं कुछ ऐसा करूंगी कि खाना ही न बनाना पड़े।
अकांक्षा की मां ने कहा कि पूरे परिवार को पैसे के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। लेकिन बाबूजी (ब्रह्मेश्वर मुखिया) की कृपा है।

आयुष कुमार समस्तीपुर के ताजपुर के कोठिया सरबरगंज के रहने वाले हैं।
प्राइवेट जॉब छोड़ी, पहचान बनाने के लिए शुरू की यूपीएससी की तैयारी
पेशे से किराना दुकानदार अरुण चौधरी के बेटे आयुष कुमार ने दूसरे प्रयास में यूपीएससी एग्जाम में सफलता मिली है। आयुष की 143वीं रैंक है। इससे पहले, 2024 में वे इंटरव्यू तक पहुंचे थे। आयुष, पेशे से क्रिकेटर और समस्तीपुर के ताजपुर के रहने वाले वैभव सूर्यवंशी के दूर के रिश्ते में मामा लगते हैं।
50 साल तक भी जॉब करुंगा तो पहचान नहीं मिलेगी
आयुष ने बताया कि प्राइवेट जॉब के दौरान दिमाग में सवाल आता था कि आज से 50 साल बाद इस कंपनी में काम करता रहा तब भी कोई पहचान नहीं मिलेगी। पहचान बनाने के लिए सिविल सेवा में जाना बेहतर होगा। फिर इस बारे में पिता से डिस्कस किया और अगले ही दिन जॉब से रिजाइन कर दिया। मार्च 2023 में दिल्ली पहुंच कर तैयारी शुरू कर दी।
आयुष बताते हैं कि कोचिंग में तैयारी शुरू करने के साथ-साथ यूपीएससी की तैयारी में मदद करने वाले एक एनजीओ के भी संपर्क में मैं आया। दो सालों तक की नौकरी से जो सेविंग की थी, उसका यूज कोचिंग में किया।
बंद कमरे में 10 से 12 घंटे करते थे सेल्फ स्टडी
आयुष ने बताया कि 10-12 घंटे तक बंद कमरे में सेल्फ स्टडी करता था। इसके बाद कोचिंग जाता था। ऑप्शन सब्जेक्ट मैथ्स और जीके पर फोक किया। कोचिंग से मदद मिलती रही कि क्या पढ़ना है और क्या नहीं। इससे तैयारी में आसानी हुई।
आयुष ने बताया कि साल 2024 में पहली बार एग्जाम में शामिल हुआ। पहले ही प्रयास में सफलता मिली। इंटरव्यू के लिए बुलावा आया। लेकिन सफलता नहीं मिली। रिजल्ट देखने के बाद दोबारा तैयारी शुरू कर दी।
आयुष बताते हैं कि पूरे दिन में 2 घंटे के लिए सोशल मीडिया पर एक्टिव रहता था। इससे जीके और एआई से संबंधित जानकारी मिलती थी। इसके अलावा, नियमित रूप से अंग्रजी और हिन्दी अखबारों में संपादकीय के साथ ही घटना क्रम को पढता रहा, जिससे देश दुनिया की लेटेस्ट जानकारी मिलती रही। अखबार पढने का ही नतीजा हुआ कि इंटरव्यू में यूजीसी से जुड़ा सवाल पूछा गया। जिसके उत्तर से सेलेक्टर संतुष्ट हुए।
20-25 मिनट तक चला इंटरव्यू
आयुष ने बताया कि इंटरव्यू 20-25 मिनटों तक चला। पहला सवाल था आपने सैंमसंग की नौकरी क्यो छोड़ दी? इसके बाद हॉबी, परिवार के बारे में, एआई समिट में हुए विरोध से जुड़े सवाल भी पूछे गए।

रवि राज नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड के महुली गांव के रहने वाले हैं।
किराए के मकान से IAS बनने का सपना पूरा किया
दृष्टिबाधित रवि राज ने सिविल सेवा परीक्षा में 20वां स्थान हासिल किया है। इससे पहले भी रवि राज ने 2024 की सिविल सेवा परीक्षा में 182वां रैंक प्राप्त किया था। वर्तमान में, वे नागपुर में भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) की ट्रेनिंग ले रहे हैं।
रवि के पिता रंजन सिन्हा ने 2007 में 650 में रेंट पर अकबरपुर में किराए का कमरा लिया था। इसी कमरे से रवि की पढ़ाई शुरू हुई।
रवि राज के पिता रंजन सिन्हा ने बताया कि उनका परिवार 2006 में नवादा के गोवर्धन मंदिर के पास आकर बस गया था।
दूसरी क्लास से ही आंखों की रोशनी कम होने लगी थी
रवि बताते हैं कि दूसरी क्लास से ही आंखों से कम दिखाई देने लगा था। ब्लैक बोर्ड पर लिखे गए शब्द स्पष्ट नहीं दिखते थे। धीरे-धीरे रवि की आंखों की रोशनी चली गई। रवि पूरी तरह से ब्लाइंड हो गए, लेकिन रवि ने हार नहीं मानी। अपनी पढ़ाई जारी रखी।
रवि के पिता रंजन सिन्हा बताते हैं कि रवि राज की शुरुआती पढ़ाई काफी संघर्षपूर्ण रही। उनकी मां विभा देवी उन्हें किताबें पढ़कर सुनाती थीं, जिसे रवि राज याद कर लेते थे।
रंजन सिन्हा ने ये भी बताया कि जब रवि राज ने पढ़ाई शुरू की थी, तब परिवार को ब्रेल लिपि की जानकारी नहीं थी। इसके बावजूद, उनकी लगन और मेहनत के कारण पढ़ाई जारी रही। घर पर उनकी मां पढ़कर सुनाती थीं और वे उसे लिखवाते हुए याद करते जाते थे। परीक्षा के दौरान सरकार की ओर से लेखक की व्यवस्था की जाती थी, जिसकी मदद से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की।
2024 में IRS के लिए चयनित हुए रवि
रवि राज ने पांचवां अटैम्पट में यूपीएससी क्लियर किया है। इससे पहले 2021, 22 और 2023 में भी रवि ने यूपीएससी की परीक्षा दी थी। 2024 में 182रैंक प्राप्त कर वो IRS के लिए चयनित हुए। फिलहाल वो नागपुर में आईआरएस की ट्रेनिंग ले रहे हैं। 2024 में ही उनका 69वीं BPSC में राजस्व अधिकारी (CO) में सलेक्शन हुआ। हालांकि, वो इस नौकरी को छोड़ दिए। वो हर हाल में यूपीएससी क्वालिफाई करना चाहते थे।
सेल्फ स्टडी से यूपीएससी क्रैक की
रवि ने बिना कोचिंग किए देश की सबसे बड़ी परीक्षा में सफलता हासिल की है। सेल्फ स्टडी करके वो इस एग्जाम में सफल हुए हैं।

जूही किशनगंज के खगड़ा वार्ड संख्या 22 की रहने वाली हैं।
पिता के दशकर्म पर इंटरव्यू, सेल्फ स्टडीज ने दिलाई यूपीएससी में सफलता
किशनगंज की जूही दास ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा क्रैक की है। उन्हें 649वीं रैंक मिली है। जूही शहर के खगड़ा प्रेमपुल निवासी स्वर्गीय निवारन दास और अन्निका दास की बेटी हैं।
जूही को यह सफलता चौथे प्रयास में मिली है। इससे पहले वह दूसरे और तीसरे प्रयास में साक्षात्कार तक पहुंची थीं। साक्षात्कार से ठीक दस दिन पहले उनके पिता का बीमारी के कारण निधन हो गया था।
इस दुखद घड़ी के बावजूद, जूही साक्षात्कार में शामिल हुईं और अंतिम रूप से सफल रहीं।
तैयारी करने की प्रेरणा अपनी मां से मिली
जूही के पिता घर के पास मोटर पार्ट्स की दुकान चलाते थे, जबकि मां अन्निका दास न्यायमित्र हैं। जूही को यूपीएससी की तैयारी करने की प्रेरणा अपनी मां से मिली।
जूही ने किसी कोचिंग संस्थान में रेग्यूलर पढ़ाई नहीं की। वे कुछ संस्थानों से कभी-कभी ऑनलाइन नोट्स मंगवा लेती थीं। उन्होंने अपनी सफलता सेल्फ-स्टडी के माध्यम से हासिल की।
पिता के श्राद्ध कर्म के दौरान ही इंटरव्यू दिया
जूही ने तीन साल पहले यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी, जिसका उद्देश्य अपनी मां और पिता के सपनों को पूरा करना था। तैयारी शुरू करते ही उनके पिता अचानक बीमार पड़ गए। इस दौरान उन्हें सिलीगुड़ी के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
पिता को मुखाग्नि देने और श्राद्ध कर्म की सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के दौरान ही जूही यूपीएससी के साक्षात्कार में शामिल हुई थीं। पिता की देखभाल, अस्पताल के चक्कर लगाना, छोटी बहन की देखभाल करना और साथ ही परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी।




