महुआडांड के बिपुल को यूपीएससी में िमला 103वां रैंक, आईएएस बने

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भास्कर न्यूज | महुआडांड़ प्रतिभा किसी बड़े शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती, इसे सच कर दिखाया है प्रखंड अंतर्गत छोटे से गांव चटकपुर के होनहार पुत्र बिपुल गुप्ता ने। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा घोषित सिविल सेवा परीक्षा के ताजा परिणाम में बिपुल गुप्ता ने देशभर में 103वां रैंक हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में हर्ष और गर्व का माहौल है। जैसे ही सफलता की खबर गांव पहुंची, चटकपुर और आसपास के इलाकों में लोगों ने मिठाइयां बांटकर और पटाखे फोड़कर खुशियां मनाईं। बिपुल गुप्ता की सफलता का सफर संघर्ष, धैर्य और निरंतर प्रयास की प्रेरक कहानी है। यह उनका तीसरा प्रयास था, जिसमें उन्होंने अपने आईएएस बनने के सपने को साकार किया। पिछले वर्ष भी उन्होंने यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन 368वीं रैंक आने के कारण वे आईएएस सेवा से कुछ अंकों से चूक गए थे। इसके बावजूद उन्हों ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत जारी रखी। उसी वर्ष उन्होंने भारतीय वन सेवा की परीक्षा में पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वर्तमान में वे वन सेवा अधिकारी के रूप में कार्यरत थे, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य प्रशासनिक सेवा के माध्यम से सीधे समाज और लोगों की सेवा करना था। इसी संकल्प और मेहनत के बल पर उन्होंने पुनः यूपीएससी परीक्षा दी और इस बार 103वीं रैंक हासिल कर अपने सपने को साकार कर दिखाया। बिपुल गुप्ता एक शिक्षित और अनुशासित परिवार से आते हैं, जिसने उनकी सफलता की मजबूत नींव रखी। उनके पिता पवन कुमार गुप्ता एक इंजीनियर हैं और आंध्र प्रदेश के विशाखापट्नम (विजाग) स्थित एक औद्योगिक प्लांट में कार्यरत हैं। उनकी माता डॉ. दीपा गुप्ता एक प्रोफेसर होने के साथ-साथ प्रतिष्ठित कवयित्री भी हैं। छोटा बीपीसीएल मे कार्यरत है। बिपुल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा और 10वीं-12वीं की पढ़ाई विशाखापट्नम से पूरी की। इसके बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी मद्रास (चेन्नई) से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। उनके छोटे भाई भी वर्तमान में चेन्नई से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। गांव में जश्न का माहौल : बिपुल की सफलता की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव चटकपुर में खुशी की लहर दौड़ गई। उनके दादा जयप्रकाश गुप्ता और दादी यशोदा देवी की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। परिजन लक्ष्मी प्रसाद, संदीप गुप्ता, शत्रुघ्न प्रसाद और ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर और पटाखे फोड़कर इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाया। बिपुल के माता-पिता ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनके बेटे ने अपनी मेहनत और लगन से न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है। यह उपलब्धि साबित करती है कि छोटे गांवों के बच्चों में भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की क्षमता होती है। शिक्षित परिवार से मिला मजबूत आधार

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