मुख्यमंत्री ने जनसंख्या बढ़ाने को लेकर बड़ा ऐलान किया है। विधानसभा के बजट सत्र में मुख्यमंत्री ने जनसंख्या प्रबंधन नीति पेश करते हुए कहा कि राज्य में दूसरे और तीसरे बच्चे के जन्म पर परिवारों को 25,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि यह कदम जन्म दर बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।
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Big News : भारत देश की बढ़ती आबादी अक्सर चर्चा का विषय रहती है, लेकिन दक्षिण भारत के कई राज्यों में स्थिति इसके उलट है। कम होती जन्म दर ने सरकारों की चिंता बढ़ा दी है। इसी पृष्ठभूमि में Andhra Pradesh सरकार ने जनसंख्या संतुलन बनाए रखने के लिए नई पहल की घोषणा की है।
राज्य के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने विधानसभा में प्रस्तावित पॉपुलेशन मैनेजमेंट पॉलिसी पेश करते हुए कहा कि सरकार दूसरे और तीसरे बच्चे के जन्म पर 25,000 रुपये की आर्थिक सहायता देगी। उन्होंने इस योजना को राज्य की घटती जन्म दर को सुधारने की दिशा में “गेम चेंजर” करार दिया।
मुख्यमंत्री ने सदन में आंकड़े साझा करते हुए बताया कि राज्य में लगभग 58 प्रतिशत परिवारों में केवल एक बच्चा है। करीब 2.17 लाख परिवारों में दो बच्चे हैं, जबकि लगभग 62 लाख परिवारों में तीन या उससे अधिक बच्चे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि करीब तीन लाख परिवारों में अपेक्षित दो बच्चों के बजाय सिर्फ एक बच्चा है, जबकि कुछ परिवारों में दो से अधिक बच्चे हैं।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि आंध्र प्रदेश का कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate) वर्तमान में 1.5 है, जो जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक 2.1 के आदर्श स्तर से काफी कम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे किसी राज्य या देश की अर्थव्यवस्था विकसित होती है, वहां जन्म दर में गिरावट देखी जाती है। इससे भविष्य में कार्यबल (वर्कफोर्स) की कमी और दीर्घकालिक आर्थिक चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।
इन्हीं संभावित समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वित्तीय प्रोत्साहन देने की योजना बनाई है। प्रस्ताव के अनुसार, जिन माता-पिता के यहां दूसरा या तीसरा बच्चा जन्म लेगा, उन्हें डिलीवरी के समय 25,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार का मानना है कि आर्थिक सहयोग मिलने से परिवारों को अतिरिक्त बच्चे की जिम्मेदारी उठाने में सहूलियत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे देश में जहां कुल आबादी अधिक है, वहीं कुछ राज्यों में घटती जन्म दर भविष्य के लिए चिंता का विषय बन सकती है। दक्षिण भारत के कई राज्यों में शिक्षा, शहरीकरण और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के कारण प्रजनन दर में कमी आई है।
आंध्र प्रदेश सरकार की यह पहल देश में जनसंख्या नीति को लेकर नई बहस छेड़ सकती है। जहां एक ओर कुछ राज्य जनसंख्या नियंत्रण पर जोर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कम होती जन्म दर वाले राज्य जनसंख्या बढ़ाने के उपाय खोज रहे हैं।




