गुमला की किसान मंजू बनीं सफलता की मिसाल:खेती के काम में दोहरा संघर्ष झेला, डटी रही और अब दूसरों के लिए मिसाल बनीं‎

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शिवनाथपुर डहुटोली गांव की निवासी मंजू उरांव ने खेती से आत्मनिर्भरता की नई‎ मिसाल प्रस्तुत की है। ग्रामीण परिवेश में जहां आज भी महिलाओं के लिए पारंपरिक दायरों को तोड़ना आसान नहीं‎ है, वहीं मंजू उरांव ने कृषि को अपना माध्यम बनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि दर्जनों‎ महिलाओं के लिए रोजगार का जरिया भी बनी हैं। कड़ी चुनौतियों, सामाजिक विरोध और प्राकृतिक आपदाओं के‎ बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आज अपने क्षेत्र में एक प्रेरणादायी मिसाल के रूप में उभरकर सामने आई हैं।‎ मंजू उरांव का सफर आसान नहीं रहा। वर्ष 2021 में जब उन्होंने ट्रैक्टर चलाना और स्वयं कृषि कार्य करना शुरू‎ किया, तब गांव के कुछ लोगों ने इसका तीखा विरोध किया। महिलाओं का ट्रैक्टर चलाना और बड़े पैमाने पर खेती‎ करना उस समय कई लोगों को स्वीकार नहीं था। यहां तक कि उन्हें सामाजिक बहिष्कार की धमकी तक दी गई।‎ लेकिन मंजू उरांव अपने फैसले पर अडिग रहीं। उन्होंने न केवल ट्रैक्टर चलाना जारी रखा, बल्कि खेती को ही‎ अपनी आजीविका का मुख्य साधन बना लिया। वर्तमान समय में मंजू उरांव लीज पर जमीन लेकर लगभग छह‎ एकड़ भूमि में मटर की खेती कर रही हैं। आधुनिक तकनीक और मेहनत के बल पर वह बेहतर उत्पादन की ओर‎ बढ़ रही हैं।‎ 12 एकड़ की जमीन में उगाया तरबूज बीते वर्ष गर्मी के मौसम में मंजू उरांव ने 12 एकड़ लीज में लेकर इसमें तरबूज की खेती की‎ थी। अत्यधिक गर्मी और प्राकृतिक असंतुलन के कारण तरबूज की फसल को भारी नुकसान हुआ। लेकिन मंजू‎ उरांव ने हिम्मत नहीं हारी। नुकसान से टूटने के बजाय उन्होंने फिर से पूंजी की व्यवस्था की और धान तथा मटर की‎ खेती में जुट गईं। मटर साढ़े तीन एकड़ में लगे अच्छी उपज हुई और अब तक दो लाख की मटर बिक्री कर चुकी‎ है ।चार एकड़ जमीन खीरा तरबुज ककड़ी भिंडी लगाने के लिए तैयार कर रही है।‎ ट्रैक्टर गर्ल की उपाधि मिली, विरोध के बीच काम करती रही‎ मंजू उरांव के घर की स्थिति अच्छी नहीं थी इसलिए वह अपने नानी के घर लोहरदगा में रहकर पढ़ाई कर रही थी‎ इसी दौरान उसके मामा बिहारी उरांव से खेती करने की प्रेरणा मिली जिज्ञासा जगी तो वह 2021 में इंटरमीडिएट‎ की परीक्षा पास करने के बाद खेती करने में जुट गई। खेती के लिए ट्रैक्टर चलाने लगी ,कई महिलाओं ने‎ इसका विरोध करने लगी। कई सामाजिक संगठन के लोगों ने उसके घर आए और उन्हें ट्रैक्टर गर्ल की उपाधि दे‎ डाली। खेती के साथ-साथ वह हर दिन दर्जनों महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराती हैं।‎ जानिए… कौन हैं मंजू उरांव‎ मंजू उरांव इंटर पास हैं। उन्होंने अभी तक शादी नहीं की है। घर में माता-पिता और भाई हैं। मंजू का पूरा परिवार‎ पारंपरिक खेती करता है। उनके परिवार की आ​र्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। खेती से होने वाली आमदनी से वह‎ परिवार का सहयोग करती हैं। खेती के साथ-साथ वह हर दिन दर्जनों महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराती हैं।‎ खेतों में बुआई, निराई, कटाई और अन्य कृषि कार्यों में स्थानीय महिलाएं काम कर रही हैं, जिससे उनके परिवारों‎ की आमदनी में भी सुधार हो रहा है।‎

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