Wednesday, April 29, 2026

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नालंदा में 12 मार्च से सरकारी स्कूलों में वार्षिक परीक्षा:​ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर 40 मिनट पहले आएगा क्वेश्चन पेपर; 30 मार्च को पीटीएम का आयोजन


नालंदा में सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं की वार्षिक मूल्यांकन परीक्षा को लेकर शिक्षा विभाग ने इस बार व्यवस्था में परिवर्तन किया है। नई गाइडलाइन के अनुसार, अब छात्रों को प्रश्नपत्र के बजाय ब्लैक बोर्ड पर लिखे सवालों को देखकर अपनी कॉपियों में उत्तर देने होंगे। इस पारदर्शी व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए ई-शिक्षाकोष पोर्टल का सहारा लिया जाएगा, जहां परीक्षा शुरू होने से महज 40 मिनट पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद संबंधित विक्षकों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे उन प्रश्नों को ब्लैक बोर्ड पर अंकित करें। जिले के सभी सरकारी स्कूलों में यह परीक्षा आगामी 12 मार्च से 19 मार्च तक आयोजित की जाएगी। विभाग की ओर से जारी निर्देशों के तहत पहली और दूसरी कक्षा के छोटे बच्चों के लिए केवल मौखिक परीक्षा का प्रावधान किया गया है, जबकि तीसरी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को लिखित परीक्षा की कसौटी पर उतरना होगा। इस नई प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य परीक्षा के बोझ और तनाव को कम करना तथा मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक सरल बनाना है। आंकड़ों के अनुसार, इस वार्षिक मूल्यांकन में पहली व दूसरी कक्षा के लगभग 57 हजार और तीसरी से आठवीं कक्षा के दो लाख 93 हजार छात्र शामिल होंगे। परीक्षा संपन्न होने के तुरंत बाद मूल्यांकन कार्य पर जोर दिया जाएगा। 30 मार्च को पीटीएम का आयोजन शिक्षकों को 19 से 24 मार्च के बीच उत्तर पुस्तिकाओं की जांच पूरी करने का लक्ष्य दिया गया है, ताकि समय पर परिणाम तैयार किए जा सके। इसके साथ ही 25 मार्च तक नामांकन पंजी को अपडेट करने का कार्य भी पूरा कर लिया जाएगा। जिला शिक्षा पदाधिकारी विजय आनंद ने बताया कि ई-शिक्षाकोष के माध्यम से प्रश्नपत्रों के वितरण से गोपनीयता बनी रहेगी और पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से संचालित होगी। छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन का लेखा-जोखा साझा करने के लिए 30 मार्च का दिन बेहद खास होगा। इस दिन जिले के सभी विद्यालयों में अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) का आयोजन किया जाएगा, जिसमें छात्रों को उनका रिपोर्ट कार्ड सौंपा जाएगा। इस बैठक के माध्यम से न केवल बच्चों की प्रगति पर चर्चा होगी, बल्कि विद्यालय के बेहतर प्रबंधन के लिए अभिभावकों से सुझाव भी आमंत्रित किए जाएंगे। विभाग का मानना है कि इस पहल से शिक्षा व्यवस्था में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ेगी और बच्चों के सर्वांगीण विकास में मदद मिलेगी। फिलहाल, सभी स्कूलों में परीक्षा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

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