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नालंदा में कृषि यांत्रिकरण योजना इस बार अपने टारगेट को पूरा नहीं कर वाई। विभाग की ओर से 3 बार लॉटरी निकालने और बार-बार तिथि विस्तार के बावजूद, जिले में लक्ष्य के मुकाबले महज 68 फीसदी ही कृषि यंत्रों की खरीद हो सकी है। आखिरी लॉटरी के आधार पर जारी परमिट की समय सीमा भी 4 मार्च को समाप्त हो चुकी है, जिससे अब योजना के पूर्ण क्रियान्वयन पर प्रश्नचिह्न लग गया है। इस साल जिले के किसानों को 91 प्रकार के कृषि यंत्रों पर अनुदान मुहैया कराने के लिए 4.33 करोड़ रुपए का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन धरातल पर केवल 2.92 करोड़ रुपए की यंत्रों की ही खरीद हो पाई। योजना के तहत सामान्य वर्ग के लिए 40 से 50 प्रतिशत और एससी-एसटी वर्ग के लिए 70 से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी का प्रावधान था, फिर भी किसानों ने इसमें अपेक्षित उत्साह नहीं दिखाया। इस उदासीनता का मुख्य कारण अनुदान की प्रक्रिया में बदलाव माना जा रहा है। पिछले साल तक अनुदान काटकर ही राशि का भुगतान करना पड़ता था, पर इस बार किसानों को पहले पूरी कीमत डीलर को देनी थी और अनुदान की राशि बाद में खाते में आनी थी। पूंजी के अभाव में छोटे किसान महंगे यंत्र खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा सके। 5 साल के लिए योजना से किसान वंचित आंकड़ों की बाजीगरी देखें तो 3 चरणों की लॉटरी से कुल 2216 किसानों को परमिट जारी किए किए गए थे, लेकिन इनमें से आधे से भी कम यानी 987 किसानों ने ही खरीदारी की है। विभाग की सख्ती रही कि तय समय सीमा में यंत्र न खरीदने वाले 992 किसानों के परमिट रद्द कर दिए गए हैं। उन्हें अगले 5 साल के लिए इस योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया है।
बार-बार जागरूक करने के बाद भी लेट खरीदारी पहली लॉटरी में जहां 1.20 करोड़ की खरीद हुई, वहीं दूसरी और तीसरी लॉटरी के बाद ये कुल आंकड़ा 2.92 करोड़ तक ही पहुंच सका। फिलहाल प्रतीक्षा सूचना में शामिल किसान अब भी विभाग की ओर से उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं कि, शायत उन्हें कोई मौके मिले। परमिट रद्द होने से कई किसानों में मायूसी है। कृषि अभियंत्रण के उप निदेशक अभिमन्यु कुमार ने कहा कि बार-बार प्रेरित करने के बाद भी समय पर खरीद न करने वालों पर कार्रवाई की गई है।
नालंदा में 68 फीसदी ही कृषि यंत्र की खरीदारी:3 बार लॉटरी के बाद भी टारगेट पूरा नहीं, पैसों के अभाव में छोटे किसान नहीं खरीद पाए यंत्र
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