पाकुड़ में विस्थापितों का 6 मांगों को लेकर आंदोलन:अमड़ापाड़ा में कोयला निकालना हुआ बंद, कंपनी को हो रहा लाखों का नुकसान

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पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा प्रखंड में विस्थापितों की मांगों को लेकर ग्रामीणों और अनुश्रवण एवं नियंत्रण कार्य समिति ने कोयला उत्खनन और परिवहन को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है। यह बंदी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत शुरू की गई। बंदी के कारण पचवारा नॉर्थ कोल माइंस में खनन कार्य पूरी तरह ठप हो गया है। इससे कोयला उत्खनन में लगी बीजीआर कंपनी को प्रतिदिन लाखों रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक खनन और कोयला परिवहन बंद ही रहेगा। स्थानीय रोजगार और कारोबार पर भी पड़ रहा असर खनन कार्य बंद होने से अमड़ापाड़ा प्रखंड क्षेत्र में रोजगार और छोटे-बड़े व्यवसायों पर भी असर पड़ने लगा है। क्षेत्र में कोयला उत्खनन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं। ट्रांसपोर्ट, छोटे होटल, दुकान और अन्य स्थानीय व्यवसाय भी इसी गतिविधि पर निर्भर हैं। बंदी के कारण लिंक रोड पर सन्नाटा पसरा रहा और कोयला ढुलाई पूरी तरह रुक गई। इससे दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों की आय पर भी असर पड़ता दिख रहा है। छह सूत्री मांगों को लेकर धरना, जमकर नारेबाजी अनुश्रवण एवं नियंत्रण कार्य समिति और ग्रामीणों के नेतृत्व में विस्थापित और उनके परिजन पचवारा नॉर्थ कोल माइंस स्थित धरना स्थल पर जुटे। प्रदर्शनकारियों ने अपनी छह सूत्री मांगों को लेकर नारेबाजी की। उनकी प्रमुख मांगों में अमड़ापाड़ा प्रखंड के बिशनपुर मौजा का समतलीकरण, बेहतर चिकित्सा सुविधा वाला अस्पताल, शिक्षा के लिए प्लस टू विद्यालय की स्थापना, स्थानीय युवाओं के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था, योग्यता आधारित नियोजन में पारदर्शिता, उचित वेतनमान और व्यवसाय के अवसर उपलब्ध कराना शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रशासन और कंपनी प्रतिनिधियों से वार्ता, नहीं बनी सहमति हड़ताल की सूचना मिलते ही बीजीआर कंपनी के प्रतिनिधि और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से वार्ता की। हालांकि बातचीत के बावजूद कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी। दोनों पक्षों ने आगे फिर से बैठक कर समाधान निकालने का निर्णय लिया है। धरना स्थल पर भुवनेश्वर टुडू, मुंशी टुडू, वकील बेसरा, महातन टुडू, आंद्रेस मुर्मू, प्रधान सोरेन, सोम हेंब्रम, शिवधन हेंब्रम, सुनीता हेम्ब्रम, सोनामुनी सोरेन, मंटु बेसरा, श्रीफुल मरांडी सहित कई ग्राम प्रधान और ग्रामीण मौजूद थे। ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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