जंगली हाथियों का लोकेशन अब रीयल- टाइम में मिलेगा, कर्नाटक के 7 कुमकी हाथियों से होगी निगरानी

Date:


हावड़ा–मुंबई मुख्य रेलखंड पर मंगलवार तड़के जराईकेला और भालूलता स्टेशन के बीच 27 जंगली हाथियों का झुंड रेल लाइन पर पहुंच गया। वन विभाग से सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन ने रात 2.40 बजे से 3.10 बजे तक बंडामुंडा से जराईकेला के बीच ट्रेनों की आवाजाही बंद कर दी। बाद में स्थिति सामान्य होने पर बिसरा से जराईकेला स्टेशन के बीच ट्रेनों की गति 40 किमी प्रति घंटा कर सावधानी के साथ परिचालन शुरू किया गया। इस दौरान ट्रेन संख्या 18190 एर्नाकुलम एक्सप्रेस को राउरकेला रेलवे स्टेशन पर 02.03 बजे से 03.16 बजे तक रोका गया। वहीं ट्रेन संख्या 18029 कुर्ला–शालीमार एक्सप्रेस को भी 04.13 बजे से 05.12 बजे तक राउरकेला स्टेशन पर खड़ा रखा गया। इसके अलावा कांसबाहाल और कुलुंगा रेलवे स्टेशन के बीच एक अकेले हाथी की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद इस सेक्शन में भी ट्रेनों की गति रात 8 बजे से सुबह 5 बजे तक धीमी रखी गई। झारखंड में गंभीर समस्या बन चुका है हाथी-मानव संघर्ष कोल्हान, हजारीबाग, बोकारो, रामगढ़, रांची और लातेहार जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। जनवरी 2026 से अब तक हाथियों के हमले में 35 लोगों की मौत हो चुकी है। चाईबासा में 11 दिनों के भीतर लंबे-बड़े दांत वाले टस्कर हाथी ने 22 लोगों की जान ले ली। हजारीबाग में 13 फरवरी की रात हाथियों ने 7 लोगों को कुचलकर मार डाला। कई गांवों में रात के समय घर तोड़ने और फसलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं होती रहती हैं। हाथियों की निगरानी के लिए रेडियो कॉलर लगाएगा वन विभाग कोल्हान समेत झारखंड में बढ़ते हाथी-मानव संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग नई रणनीति पर काम कर रहा है। जंगली हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उन्हें जीपीएस आधारित रेडियो कॉलर पहनाए जाएंगे। वन विभाग के अनुसार रेडियो कॉलर सभी हाथियों को नहीं, बल्कि चुनिंदा हाथियों को ही लगाए जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से झुंड का नेतृत्व करने वाले हाथी और अकेले घूमने वाले टस्कर हाथी शामिल होंगे। इनके मूवमेंट से पूरे झुंड की दिशा का अनुमान लगाया जा सकेगा। कॉलर में लगे जीपीएस और ट्रांसमीटर सैटेलाइट या रेडियो सिग्नल के जरिए लगातार लोकेशन भेजते रहेंगे, जिससे वन विभाग को हाथियों की रीयल-टाइम जानकारी मिल सकेगी। कर्नाटक से मंगाए जाएंगे सात कुमकी हाथी वन विभाग जंगली हाथियों को नियंत्रित करने के लिए कर्नाटक से सात कुमकी हाथी भी मंगाने की तैयारी कर रहा है। कुमकी हाथी प्रशिक्षित पालतू हाथी होते हैं, जिनका उपयोग जंगली हाथियों को नियंत्रित करने में किया जाता है। इन पर महावत सवार होकर जंगली हाथियों को धीरे-धीरे जंगल की ओर खदेड़ते हैं और आक्रामक हाथियों को काबू में करने में मदद लेते हैं। तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में लंबे समय से इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। बार-बार गांवों में जाने वाले हाथियों की होगी पहचान वन विभाग पहले ऐसे हाथियों की पहचान करेगा जो बार-बार गांवों या आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं। चयनित हाथियों को ट्रैंक्विलाइज कर उनके गले में बेल्ट की तरह रेडियो कॉलर लगाया जाएगा और फिर जंगल में छोड़ दिया जाएगा। विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है और जल्द ही कॉलर की खरीद के साथ इसे लगाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इस पहल का उद्देश्य हाथियों की लोकेशन का समय रहते पता लगाकर ग्रामीणों को अलर्ट करना और हाथियों को जंगल की ओर वापस खदेड़ना है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

Join Us WhatsApp