अमीन व राजस्व कर्मचारी एसीबी की जांच के घेरे में

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एसीबी ने रिम्स की सरकारी जमीन को अवैध तरीके से बेचने और उस पर कब्जा करने के मामले में कार्रवाई तेज कर दी है। इस मामले में एक पूर्व अंचल अधिकारी और रांची के एक तत्कालीन डीसीएलआर से एसीबी ने पूछताछ की है। आने वाले दिनों में इस मामले में अंचल कार्यालय में कार्यरत कर्मियों से भी एसीबी पूछताछ कर सकती है। एसीबी ने रांची के भूमि सुधार उप-समाहर्ता कार्यालय के उन कर्मचारियों को भी नोटिस जारी किया है, जिनकी भूमिका इस मामले में संदिग्ध मिली है। एसीबी की नजर केवल अधिकारियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जमीन से जुड़े स्थानीय अमीन, राजस्व कर्मचारी और रजिस्ट्री के दस्तावेजों में गवाह बनने वाले जमीन दलाल भी जांच के घेरे में हैं। ऐसे बिचौलियों की भी पहचान की जा रही है जिन्होंने फर्जी कागजात बनाने व जमीन के अवैध सौदों को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हाईकोर्ट ने पुलिस आवास निगम के मुख्य अभियंता को जारी किया नोटिस रांची| झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को झारखंड पुलिस आवास निगम लिमिटेड में मुख्य अभियंता (सिविल) के पद पर जय प्रकाश सिंह की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद पुलिस आवास निगम और जेपी सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। मामले में सुनील कुमार महतो ने जनहित याचिका दायर कर उनकी नियुक्ति को चुनौती दी है। आरोप है कि मुख्य अभियंता का चयन पारदर्शी प्रक्रिया के तहत नहीं हुआ है। नियुक्ति नियमों के विपरीत की गई। कहा गया है कि उन पर भ्रष्टाचार, अनियमितता और दुर्व्यवहार के आरोप हैं। 1993 के बाद शुरू हुआ जमीन पर अवैध कब्जा एसीबी की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि रिम्स की जमीन का अधिग्रहण काफी पहले ही हो चुका था और उससे संबंधित सभी दस्तावेज सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थे। इसके बावजूद वर्ष 1993 के बाद इस जमीन पर अवैध कब्जा और रजिस्ट्री का खेल बड़े पैमाने पर शुरू हो गया। इसी दौरान फर्जी कागजात तैयार कर और सरकारी अभिलेखों में गलत प्रविष्टियां कर जमीन की खरीद-बिक्री कराई गई। जांच एजेंसी को संदेह है कि इस पूरे खेल में जमीन दलालों के साथ-साथ राजस्व तंत्र से जुड़े कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भी मिलीभगत रही। अब एसीबी इस बात की पड़ताल कर रही है कि सरकारी अधिग्रहित जमीन के बावजूद किस तरह से फर्जी दस्तावेजों के सहारे रजिस्ट्री कराई गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

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