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मुजफ्फरपुर में 'मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना' में फर्जीवाड़ा:छात्राओं के खातों में 10 हजार भेजकर अवैध वसूली, 4000 रुपए मांगने का आरोप; जांच की मांग


मुजफ्फरपुर जिले में औराई प्रखंड के नरहर गांव में ‘मुख्यमंत्री महिला स्वरोजगार योजना’ के नाम पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूली छात्राओं और ग्रामीण महिलाओं के बैंक खातों में 10 हजार की राशि भेजकर उनसे 3500 से 4000 तक की अवैध वसूली की गई। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के ही दो लोगों ने घर-घर जाकर महिलाओं और छात्राओं से आधार कार्ड लिए। उन्हें योजना का लाभ दिलाने का भरोसा दिया गया। बताया गया कि उनके खाते में 10-10 हजार रुपए आएंगे। जिसके बदले पहले कुछ रुपए देने होंगे। कुछ दिनों बाद, जिन लाभुकों के खातों में राशि आई। उनसे बैंक या आधार आधारित भुगतान प्रणाली (AEPS) के जरिए अंगूठा लगवाकर पैसे निकाल लिए गए। इसके बाद लाभुकों को 3500 से 4000 रुपए काटकर शेष राशि देने की बात कही गई। अंगूठा लगवाकर राशि की निकासी इस मामले का खुलासा तब हुआ जब बड़ी संख्या में महिलाएं पंचायत की जीविका लीडर चिंता देवी के पास शिकायत लेकर पहुंची। उन्होंने बताया कि उनसे अंगूठा लगवाकर योजना की राशि निकाल ली गई है। अब उनसे अतिरिक्त पैसों की मांग की जा रही है। इस संबंध में जीविका लीडर चिंता देवी का कहना है कि इन लाभुकों के बारे में उनके पास कोई सूचना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीविका समूह की प्रक्रिया के तहत, टीम लीडर और पंचायत प्रमुख की ओर से अग्रसारित फॉर्म प्रखंड जीविका कार्यालय में सत्यापन के बाद ही लाभुकों के खातों में राशि भेजी जाती है। सहिलाबल्ली पंचायत स्थित एक स्कूल की कोमल कुमारी, अमृता कुमारी, सुष्मिता कुमारी, खुशबू कुमारी, रागिनी कुमारी, रिंकी कुमारी, कामिनी कुमारी, आरती कुमारी, चांदनी कुमारी, रूपा कुमारी, गेनरी कुमारी सहित दर्जनों छात्राओं के आधार कार्ड 10 हजार रुपए भेजने के वादे पर लिए गए थे। इसके अतिरिक्त, गांव की कई ऐसी महिलाओं से भी आधार कार्ड लिए गए जो जीविका समूह की सदस्य नहीं हैं। सोशल मीडिया पर पैसे लौटाने का दावा ग्रामीणों का कहना है कि जब मामला बढ़ा और गांव में विरोध शुरू हुआ, तो संबंधित व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर आकर पैसे लौटाने का आश्वासन दिया। उसने यह भी दावा किया कि वह कई लोगों को 2 लाख रुपए तक की राशि दिलवाएगा। इससे ग्रामीणों में संदेह और बढ़ गया है कि यह फर्जीवाड़ा कई पंचायतों में फैले बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। जांच की मांग पंचायत के पूर्व मुखिया और जदयू प्रखंड उपाध्यक्ष रामश्रेष्ठ सहनी ने कहा कि जिला पदाधिकारी (डीएम) से मिलकर मामले की जांच निगरानी विभाग से कराने की मांग करेंगे। वहीं, जीविका के बीपीएम राकेश वर्मा ने कहा कि शिकायत मिलने पर जांच के लिए टीम भेजी गई है। कुछ लोगों के आधार कार्ड भी मंगवाए गए हैं, लेकिन वे कार्यालय से टैग नहीं पाए गए। आशंका है कि आधार कार्ड लेकर शहरी क्षेत्र में पता संपादित कर ऑनलाइन आवेदन किया गया होगा। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि बिना उच्चस्तरीय जांच के यह स्पष्ट नहीं हो पाएगा कि लाभुकों के खातों में राशि कैसे पहुंची और इसमें किस स्तर तक मिलीभगत रही।

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