नालंदा में सरकारी गाड़ी से सिलेंडर ले जाते दिखे पुलिसकर्मी:गैस किल्लत की अफवाह से अफरा-तफरी, गोदाम पर भीड़; कोयले की आंच पर बन रहा मिड-डे मील

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नांलदा जिले में गैस (LPG) की भारी किल्लत की अफवाह ने आम जन जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। गैस गोदामों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ रही है। आलम यह है कि आम जनता के साथ-साथ अब पुलिसकर्मी भी अपनी गाड़ियों में गैस सिलेंडर ढोते नजर आ रहे हैं। बिहारशरीफ के जय माता दी भारत गैस गोदाम से पुलिस सरकारी गाड़ी में गैस सिलेंडर ले जाते नजर आए। जिले में एकता शक्ति फाउंडेशन की ओर से संचालित सेंट्रलाइज्ड किचन के माध्यम से कुल 183 प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में मिड-डे मील की आपूर्ति की जा रही है। कोयले की आंच पर पक रहा 18 हजार बच्चों का खाना फाउंडेशन के रसोई प्रभारी संतोष ने बताया कि लगभग 18,000 बच्चों के लिए भोजन तैयार करने में कोयले का उपयोग किया जा रहा है। अगर डीजल, पेट्रोल और गैस की कीमतें बढ़ती हैं, तो आने वाले समय में कोयले के दाम भी बढ़ेंगे। जिससे मिड-डे मील की व्यवस्था को सुचारू रखना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा वर्तमान में पुराना स्टॉक होने के कारण काम चल रहा है, लेकिन भविष्य की स्थिति चिंताजनक दिख रही है। गोदामों पर हंगामा, नियम ताक पर बिहार शरीफ स्थित जय माता दी भारत गैस गोदाम पर अफरा-तफरी का माहौल दिखा। गोदाम इंचार्ज संजय कुमार ने बताया कि गैस की कोई वास्तविक किल्लत नहीं है। प्रतिदिन एक ट्रक सिलेंडर आ रहा है, लेकिन अफवाहों के कारण लोग आपा खो रहे हैं। बिना नंबर लगाए जबरन सिलेंडर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे व्यवस्था बिगड़ रही है। नियम के अनुसार 25 दिनों के अंतराल पर ही सिलेंडर दिया जाना है, लेकिन डर के मारे लोग समय से पहले ही गोदाम पहुंच रहे हैं। अफवाहों ने बिगाड़ा खेल, सर्वर पर बढ़ा दबाव इंडेन गैस गोदाम के इंचार्ज अखिलेश्वर प्रसाद ने बताया कि बाजार में फैली गलत सूचनाओं के कारण लोग भ्रमित हैं। हर उपभोक्ता चाहता है कि उसके पास मौजूद सभी कनेक्शनों को एक साथ रिफिल करा कर रख लिया जाए। एक साथ भारी मात्रा में बुकिंग होने के कारण सर्वर भी बीच-बीच में डाउन हो रहा है, जिसे लोग गैस खत्म होने का संकेत मान रहे हैं। मौके पर मौजूद ग्राहक अभिमन्यु कुमार ने बताया कि पहले बुकिंग के तुरंत बाद सिलेंडर मिल जाता था, लेकिन अब बाजार में चल रही चर्चाओं को सुनकर गोदाम पहुंचा हूं। ये देखने कि गोदाम में गैस उपलब्ध है या नहीं। कुल मिलाकर, नालंदा जिले में गैस को लेकर उत्पन्न हुई यह कृत्रिम किल्लत प्रशासन के लिए सिरदर्द बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर ईंधन की बढ़ती संभावनाओं ने मिड-डे मील संचालकों की भी नींद उड़ा दी है।

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