गुमला|भरनो थाने में नए थाना प्रभारी के रूप में संतोष कुमार सिंह ने विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया। इस अवसर पर निवर्तमान थाना प्रभारी कंचन प्रजापति ने उन्हें पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया और औपचारिक रूप से कार्यभार सौंपा। पदभार ग्रहण करने के पश्चात नवागत थाना प्रभारी संतोष कुमार सिंह ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा: क्षेत्र को अपराध मुक्त बनाना मेरी पहली प्राथमिकता होगी। पदभार ग्रहण के इस अवसर पर कई अधिकारी थे। भास्कर न्यूज|गुमला जिले में सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से जिला परिवहन विभाग की ओर से विशेष अभियान चलाया गया। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के निर्देशों के आलोक में शुक्रवार को डीटीओ ज्ञान शंकर जायसवाल के नेतृत्व में गुमला-बाइपास मुख्य मार्ग पर एक व्यापक वाहन जांच अभियान चलाया गया। इस सघन कार्रवाई से यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले चालकों में हड़कंप एवं हफरा तफरी मच गई। 24 घंटे के भीतर लाखों की वसूली शुक्रवार को चलाए गए इस विशेष अभियान के दौरान मोटर वाहन अधिनियम के तहत कुल ₹1,95,000 का जुर्माना वसूला गया। उल्लेखनीय है कि परिवहन विभाग की टीम कल बीते रात को भी सक्रिय थी; देर रात की गई जांच में ₹2,10,000 का चालान काटा गया था। पिछले 24 घंटों के भीतर की गई इस त्वरित कार्रवाई ने जिले के लापरवाह चालकों को एक कड़ा संदेश दिया है। अभियान के दौरान उन दोपहिया चालकों पर विशेष रूप से गाज गिरी, जिन्होंने अपनी मोटरसाइकिलों में कंपनी फिटेड साइलेंसर को हटाकर तेज आवाज (ब्लास्ट साउंड) वाले मॉडिफाइड साइलेंसर लगवा रखे थे। डीटीओ ने ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले ऐसे वाहनों पर न केवल भारी जुर्माना वसूला लगाया, बल्कि मौके पर ही मैकेनिक को बुलाकर अवैध साइलेंसरों को उतरवा दिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सड़कों पर दहशत और ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस सघन अभियान के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए डीटीओ ज्ञान शंकर जायसवाल ने कहा हमारा मुख्य उद्देश्य केवल चालान काटना नहीं, बल्कि बहुमूल्य मानवीय जिंदगियों को बचाना है। हेलमेट और सीट बेल्ट जहां दुर्घटना की स्थिति में आपकी जान बचाते हैं, वहीं वाहन के वैध दस्तावेज (बीमा, परमिट आदि) दुर्घटना के पश्चात आपके परिवार को कानूनी और आर्थिक संकटों से सुरक्षित रखते हैं। गुमला| जिला प्रशासन के वरीय अधिकारियों द्वारा सदर अस्पताल के नियमित साप्ताहिक निरीक्षण का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को लेखा प्रशासन एवं स्वनियोजन (जिला ग्रामीण विकास शाखा) के पदाधिकारियों द्वारा अस्पताल का विस्तृत निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जहां कई व्यवस्थाएं चाक-चौबंद मिलीं। वहीं अनुपस्थित कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश भी दिए गए। निरीक्षण टीम ने इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी, जनरल वार्ड और किचेन रूम सहित अन्य विभागों का बारीकी से जायजा लिया। अधिकारियों ने भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से सीधा संवाद कर अस्पताल की सुविधाओं के बारे में फीडबैक लिया। अधिकांश मरीजों ने इलाज और मिल रही सेवाओं पर संतोष व्यक्त किया।प्रसव सेवाओं और ओपीडी के आंकड़े िलए गए। अस्पताल के विभिन्न वार्डों में कुल 230 मरीज भर्ती पाए गए, जिनमें जनरल वार्ड में सबसे अधिक 141 मरीज थे। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को उच्च केंद्रों पर रेफर करने की सुविधा भी सुचारू रही। आज 105 मरीजों को प्रखंडों से लाने-ले जाने और एक मरीज को बेहतर इलाज के लिए रिम्स भेजने हेतु एम्बुलेंस मुहैया कराई गई। दवा वितरण कक्ष के निरीक्षण में पाया गया कि वर्तमान में अस्पताल में 612 प्रकार की जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध हैं। हालांकि, जन औषधि केंद्र बंद पाए जाने पर अधिकारियों ने नाराजगी जताई। जांच मशीनों की स्थिति संतोषजनक रही, जिसके तहत 44 मरीजों का एक्स-रे और 20 मरीजों का सीटी स्कैन किया गया। रसोई में साफ-सफाई के विशेष निर्देश दिए गए ताकि मरीजों को मानक के अनुरूप पौष्टिक भोजन मिले।पोषण पुनर्वास केंद्र में 16 बच्चे भर्ती थे, जिनकी देखभाल की जानकारी ली गई।अस्पताल परिसर की निगरानी के लिए 46 सीसीटीवी कैमरे सक्रिय पाए गए। टीम ने सुनिश्चित किया कि परिसर में कोई भी ””शैडो एरिया”” न रहे और अस्पताल दुर्गंध मुक्त बना रहे।जिला प्रशासन का उद्देश्य नियमित निगरानी के जरिए सदर अस्पताल को एक आदर्श स्वास्थ्य केंद्र बनाना है
बाइपास पर सघन वाहन जांच अभियान में ₹4.05 लाख का जुर्माना वसूला गया
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