बेगूसराय में नीतीश का 'सम्राट' प्रेम या उत्तराधिकार का संकेत:मंच पर डिप्टी सीएम का हाथ थामा, जदयू नेता बोले- मुख्यमंत्री अपना 'वारिस' चुन चुके हैं

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बिहार की सियासत में शनिवार का दिन कयासों और चर्चाओं के नाम रहा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी समृद्धि यात्रा के तहत बेगूसराय पहुंचे थे, लेकिन 274 करोड़ की योजनाओं के शिलान्यास से ज्यादा चर्चा उनके उन ‘हाव-भाव’ की हो रही है, जिसने भावी राजनीति की एक नई स्क्रिप्ट लिख दी। बरौनी के बियाडा कैंपस में आयोजित कार्यक्रम में नीतीश कुमार का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। कभी वे महिलाओं को बीच भाषण में टोकते दिखे, तो कभी उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का हाथ थामकर जनता की ओर लहराते हुए उन्हें ‘खास’ होने का अहसास कराते दिखे। इधर, नीतीश कुमार भले ही सम्राट चौधरी के प्रति अपना प्रेम जाहिर कर रहे थे। वहीं, सैकड़ों कार्यकर्ता लगातार मांग कर रहे थे कि नीतीश कुमार अपने पुत्र निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाएं। मंच पर ‘शक्ति प्रदर्शन’ और नीतीश का अनोखा अंदाज बरौनी प्रखंड के बियाडा कैंपस में शनिवार को जैसे ही दो हेलीकॉप्टर उतरे, हलचल तेज हो गई। पहले हेलीकॉप्टर से उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा बाहर निकले, तो कुछ ही देर बाद दूसरे हेलीकॉप्टर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बाहर आए। यह दृश्य अपने आप में बहुत कुछ कह रहा था। मंच पर बैठने की व्यवस्था ने भी राजनीतिक पंडितों को सोचने पर मजबूर कर दिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक ओर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बैठे थे, तो दूसरी ओर उनके भरोसेमंद मंत्री विजय चौधरी। पूरे कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी के बीच की केमिस्ट्री ने कार्यकर्ताओं को उत्साहित कर दिया। कार्यक्रम में शामिल उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को सम्राट चौधरी के दूसरी ओर बैठना पड़ा। हालांकि सम्राट भाषण दे रहे थे तो विजय सिन्हा मुख्यमंत्री के बगल में बैठे, लेकिन दो मिनट में ही उन्हें यह कुर्सी खाली करनी पड़ी। सम्राट का हाथ थामकर दिया ‘उत्तराधिकारी’ वाला संकेत कार्यक्रम के अंत में जो हुआ, उसने एनडीए के अंदरखाने हलचल मचा दी है। भाषण खत्म करने के बाद नीतीश कुमार अचानक रुके। उन्होंने मंच पर मौजूद सभी नेताओं को कुर्सी से खड़ा करवा दिया और जनता से कहा ‘एक मिनट रुकिए।’ इसके बाद नीतीश कुमार चलते-चलते सम्राट चौधरी के पास पहुंचे, पीठ थपथपाकर उनका हाथ मजबूती से पकड़ा और जनता की तरफ लहराया। इस दृश्य को देखकर वहां पंडाल में मौजूद भीड़ ने जमकर नारेबाजी की। राजनीतिक गलियारों में इस हैंडशेक और हाथ लहराने की घटना को सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी के रूप में देखे जाने लगा है। लोग कयास लगा रहे हैं कि क्या नीतीश कुमार ने मन ही मन सम्राट चौधरी को बिहार की कमान सौंपने का मन बना लिया है। जेडीयू नेता का दावा- नीतीश ने चुन लिया है अपना वारिस हालांकि एनडीए के कार्यकर्ता कैमरे पर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं, लेकिन जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर दैनिक भास्कर को बताया कि नीतीश कुमार पिछले 20 वर्षों से बिहार की सेवा कर रहे हैं। उनके पास भविष्य का लंबा विजन है। अगर उन्होंने राज्यसभा जाने या राजनीति में नई भूमिका का निर्णय लिया है, तो उसमें प्रदेश का ही फायदा है। उन्होंने अपना उत्तराधिकारी चुन लिया है, बस आधिकारिक घोषणा बाकी है। समृद्धि यात्रा में उन्होंने बिना नाम लिए बहुत कुछ साफ कर दिया है। एक तरफ ‘सम्राट’, दूसरी ओर ‘निशांत’ के नारे जहां एक तरफ नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी के प्रति अपना प्रेम दिखा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ मैदान में जुटे कार्यकर्ता मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार के समर्थन में नारे लगा रहा था। हेलीपैड से लेकर मुख्य कार्यक्रम स्थल तक युवा जदयू के जिला संयोजक चौधरी अफजल सहित कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए ‘बिहार का मुख्यमंत्री कैसा हो, निशांत कुमार जैसा हो।’ यह शोर इतना तेज था कि मुख्यमंत्री को मंच से हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने टोकते हुए कहा अभी मेरी बात सुनिए, उसके बाद जो कहना होगा आकर कहिएगा। कुल मिलाकर कहा जा रहा है कि बेगूसराय का यह दौरा सिर्फ सरकारी योजनाओं के उद्घाटन-शिलान्यास तक सीमित नहीं रहा। नीतीश कुमार ने अपने हाव-भाव से यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे अब ‘किंग’ से ज्यादा ‘किंगमेकर’ की भूमिका की ओर बढ़ रहे हैं। सम्राट चौधरी के प्रति बढ़ता उनका भरोसा और कार्यकर्ताओं के बीच निशांत कुमार की मांग आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़े उलटफेर कर सकती है। ‘अरे कहां जा रही है, हम बंद कर दें…’ नीतीश कुमार जब अपना भाषण दे रहे थे, तभी एक दिलचस्प वाकया हुआ। भाषण के बीच में ही कुछ महिलाएं उठकर जाने लगीं। यह देख मुख्यमंत्री ने तत्काल अपना भाषण रोका और महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा ‘अरे कहां जा रही है, हम बंद कर दें, हम तो देख रहे थे पहले उधर से जा रही थी। सब भागिएगा तो हम छोड़ दें, यहां तो सब कुछ है, फिर भागते काहे को हो, सब जानोगे तब ना जानोगे।’ नीतीश का यह ठेठ अंदाज चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने महिलाओं को समझाते हुए यह जताने की कोशिश की कि सरकार उनके लिए जो कर रही है, उसे सुनना और समझना जरूरी है। मुख्यमंत्री के इतना कहते ही जो महिलाएं उठकर जाने लगी थी, वह सब शांतिपूर्वक आकर पंडाल में बैठ गई। इसका एक कारण यह भी था कि पंडाल में मौजूद महिलाएं मुख्यमंत्री को देखने वाली आम दर्शक नहीं, बल्कि जीविका से जुड़ी थी और उन्हें डर लगा कि कहीं कार्रवाई न हो जाए।

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