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ग्रुप हाउसिंग और अपार्टमेंट का भी बढ़ सकता है एफएआर झारखंड के बड़े शहरों में जमीन की कमी और बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए राज्य सरकार बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन की तैयारी कर रही है। नगर विकास विभाग प्रमुख सड़कों के किनारे बनने वाली इमारतों के लिए फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाने पर विचार कर रहा है। अभी कॉमर्शियल भवनों और ग्रुप हाउसिंग के लिए अधिकतम एफएआर 3.5 मिलता है, लेकिन संशोधन के बाद कॉमर्शियल एरिया में इसे बढ़ाकर 5 करने की तैयारी है। रियल एस्टेट संगठनों की मांग पर बिल्डिंग बायलॉज में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके लिए स्टेकहोल्डरों के साथ बैठक कर कई मुद्दों पर चर्चा भी की गई है। दूसरे राज्यों में मिल रहे एफएआर का भी आकलन किया जा रहा है। जैसे केरल, महाराष्ट्र और हैदराबाद में कॉमर्शियल एरिया में एफएआर को 5 से बढ़ाकर 7 तक कर दिया गया है। उसी तर्ज पर झारखंड के शहरों में भी प्रमुख सड़कों के किनारे एफएआर बढ़ाने की योजना है, ताकि अधिक ऊंची इमारतों का निर्माण हो सके।
(शेष पेज 11 पर) अभी ऐसे मिलता है एफएआर 12 फीट चौड़ी सड़क पर : एफएआर 1.5 16 फीट चौड़ी सड़क पर : एफएआर 1.8 20 फीट चौड़ी सड़क पर : एफएआर 2.0 30 फीट से अधिक चौड़ी सड़क पर : एफएआर 2.5 36 फीट से अधिक चौड़ी सड़क पर : एफएआर 3.0 नोट: ग्रुप हाउसिंग 30 हजार वर्गफीट से अधिक जमीन पर दी जाती है। इसमें अधिकतम 3.5 एफएआर मिलता है। अधिक निर्माण से कीमत घटेगी, लोगों को ज्यादा जगह मिलेगी एक ही जमीन पर अधिक ऊंची इमारत और ज्यादा क्षेत्रफल का निर्माण संभव होने से कॉमर्शियल और ऑफिस स्पेस बढ़ेगा। इससे शहरों में वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा। बचे हुए क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने और रियल एस्टेट निवेश को गति मिलने की भी संभावना है। निर्माण बढ़ने से संपत्तियों की कीमतों में कमी आ सकती है। हालांकि एफएआर बढ़ाने के साथ सड़क, पार्किंग, पानी, सीवर और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना भी जरूरी होगा। रांची सहित राज्य के कई शहरों में मास्टर प्लान वर्षों से अपडेट नहीं हुआ है, इसलिए समग्र शहरी योजना बनाना जरूरी माना जा रहा है। आवासीय अपार्टमेंट में बन सकेंगे अधिक फ्लैट अभी आवासीय अपार्टमेंट के लिए अधिकतम 2.5 एफएआर मिलता है। इसी वजह से छोटे प्लॉट पर अधिक ऊंची इमारतों का निर्माण संभव नहीं हो पाता। इसे बढ़ाकर 3 से 3.5 करने पर भी मंथन चल रहा है। अगर ऐसा हुआ तो बड़े प्लॉट पर अधिक फ्लैट बनाने का रास्ता साफ हो जाएगा। एफएआर से तय होती है इमारत की ऊंचाई शहर के विकास और भवन निर्माण में एफएआर एक महत्वपूर्ण मानक है। यह तय करता है कि सड़क की चौड़ाई और प्लॉट के क्षेत्रफल के मुकाबले उस पर कितना निर्माण किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर सड़क की चौड़ाई 36 फीट से अधिक है और उसके किनारे 10 हजार वर्गफीट का प्लॉट है, जिस पर कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनना है, तो मौजूदा बायलॉज के अनुसार 3.5 एफएआर मिलेगा। ऐसे में अधिकतम 35 हजार वर्गफीट निर्माण की अनुमति मिल सकती है। अगर एफएआर 5 कर दिया गया तो उसी प्लॉट पर 50 हजार वर्गफीट निर्माण की अनुमति मिल जाएगी। यानी जमीन उतनी ही रहेगी, लेकिन इमारत की ऊंचाई और निर्माण क्षेत्र बढ़ जाएगा।
एफएआर बढ़ेगा, प्रमुख सड़कों के किनारे बिल्डिंग की ऊंचाई बढ़ेगी
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