
रांची में मारपीट के एक पुराने मामले में पूर्व मंत्री बंधु तिर्की समेत सात आरोपियों का बयान अदालत में दर्ज किया गया है। MP/MLA की विशेष अदालत में सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज होने के बाद अब मामले में आगे बहस की प्रक्रिया शुरू होगी।
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रांची/16.3.26। मारपीट और धमकी से जुड़े एक पुराने मामले में बयान दर्ज किया गया। इस मामले में पूर्व मंत्री बंधु तिर्की समेत सात आरोपियों का बयान अदालत में दर्ज किया गया है। यह बयान रांची की MP/MLA विशेष अदालत में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 313 के तहत लिया गया। अदालत में आरोपियों के बयान दर्ज होने के बाद अब इस मामले में अगली प्रक्रिया के तहत बहस की कार्यवाही शुरू होगी।
अदालत के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी, जिसके बाद आगे का फैसला तय होगा।यह मामला 1 नवंबर 2017 की एक घटना से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि उस दिन भारत स्काउट एंड गाइड्स झारखंड के राज्य काउंसिल चुनाव में कथित गड़बड़ी की जांच को लेकर एक बैठक आयोजित की गई थी।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जब वह बैठक में शामिल होने पहुंचे, तो आरोपियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि इस दौरान उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने कहा कि आरोपियों ने रॉड से हमला किया, गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी भी दी। शिकायत के अनुसार इस घटना के दौरान स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी।
मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के साथ मौजूद उनके तीन अंगरक्षकों ने भी शिकायतकर्ता के साथ दुर्व्यवहार किया। शिकायतकर्ता के अनुसार अंगरक्षकों ने उनका कॉलर पकड़ लिया और कथित तौर पर कट्टा दिखाकर धमकी दी। इतना ही नहीं, आरोप है कि इस दौरान शिकायतकर्ता के गले से चेन भी छीन ली गई।
इस घटना के बाद शिकायतकर्ता ने कोतवाली थाना में मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने इस मामले में कांड संख्या 298/2017 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के बाद इस मामले में पूर्व मंत्री बंधु तिर्की समेत कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया।अदालत में जिन आरोपियों के बयान दर्ज हुए हैं।
उनमें बंधु तिर्की के अलावा अमोल कुमार सिंह, मोहन सिंह और दिलीप कुमार समेत अन्य लोग शामिल हैं। इन सभी पर मारपीट, धमकी और लूट जैसे आरोप लगाए गए हैं।कानूनी प्रक्रिया के तहत धारा 313 के अंतर्गत आरोपी से अदालत सीधे सवाल पूछती है, ताकि उनके पक्ष को भी रिकॉर्ड में दर्ज किया जा सके। इस दौरान आरोपी अपने ऊपर लगे आरोपों के बारे में स्पष्टीकरण दे सकते हैं।




