जिले में प्रखंड वार धान क्रय की स्थिति

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गढ़वा 95,00 48,20 50.7% मेराल 70,00 28,50 40.7% डंडई 60,00 22,30 37.1% डंडा 55,00 21,60 39.2% रमना 65,00 30,20 46.5% बंशीधर नगर 75,00 36,10 48.1% विशुनपुरा 50,00 18,70 37.4% भवनाथपुर 60,00 29,90 49.8% केतार 40,00 14,50 36.2% खरौंधी 45,00 17,30 38.4% रंका 80,00 35,60 44.5% रमकंडा 42,00 15,20 36.1% चिनिया 38,00 13,70 36.0% मझिआंव 72,00 34,10 47.3% बरडीहा 41 ,00 15,60 38.0% कांडी 68,00 31,90 46.9% धुरकी 35,00 12,40 35.4% भास्कर न्यूज | गढ़वा जिले में सरकारी निर्देश के बावजूद विभिन्न धान क्रय केंद्रों पर धान खरीद की प्रक्रिया अपेक्षित गति से नहीं चल पा रही है। जिले में धान क्रय की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। अब तक निर्धारित लक्ष्य का लगभग 50 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है, जबकि बड़ी संख्या में किसान अब भी अपने धान की खरीद होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। दूसरी ओर जिन किसानों का धान खरीदा जा चुका है, उन्हें भी भुगतान में देरी के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है। जिले में 15 दिसंबर से धान क्रय की शुरुआत की गई थी। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 15,021 किसान निबंधित हैं। इनमें से अब तक केवल 2,454 किसानों ने लगभग दो लाख 17 हजार क्विंटल धान की बिक्री की है। इनमें से 1,857 किसानों को करीब 44 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है, जबकि लगभग 600 किसानों के करीब आठ करोड़ रुपए का भुगतान अब भी लंबित है। इधर, सरकार द्वारा जिले के लिए निर्धारित दो लाख क्विंटल धान खरीद लक्ष्य को बढ़ाकर ढाई लाख क्विंटल कर दिया गया है। हालांकि लक्ष्य बढ़ने के बावजूद जमीनी स्तर पर खरीद और भुगतान की रफ्तार संतोषजनक नहीं मानी जा रही है। प्रखंड लक्ष्य नोट: आंकड़ा क्विंटल में है। तीन प्रखंडों का डाटा अभी उपलब्ध नहीं है। खरीदी गई धान मझिआंव के किसान बोले-पिछले महीने 50-50 ​क्विंटल धान बेचा, पर भुगतान नहीं मझिआंव प्रखंड के करुई गांव के किसान उदय प्रताप सिंह और राजीव कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने पिछले महीने 50-50 क्विंटल धान पैक्स में बेचा था, लेकिन अब तक उन्हें भुगतान नहीं मिला है। कई किसानों का धान अभी भी पैक्स केंद्रों पर पड़ा हुआ है। बायोमेट्रिक प्रणाली में तकनीकी समस्या के कारण कई मामलों में धान की रिसिविंग भी नहीं हो पा रही है। किसानों का कहना है कि कई बार क्रय केंद्र समय पर नहीं खुलते और खुलने के बाद भी भुगतान में देरी होती है। इससे किसानों को अगली फसल की तैयारी और अन्य कृषि कार्यों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भुगतान में हो रही देरी और तकनीकी बाधाओं से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।

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