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Dilip Ghosh: कोलकाता. पिछले पांच वर्षों से खड़गपुर सदर के विधायक रहे हीरन चटर्जी को इस बार भाजपा ने उम्मीदवार नहीं बनाया हैं. इस बार भाजपा ने एक बार फिर अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष पर विश्वास जताया है. दिलीप घोष ने हीरन को पछाड़कर खड़गपुर सदर में वापसी की है. सोमवार को भाजपा ने 144 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की. उसमें दिलीप घोष का नाम खड़गपुर सदर से उम्मीदवार के रूप में शामिल है.
ज्ञान सिंह को हराकर बटोरी थीं सुर्खियां
2016 में दिलीप घोष ने खड़गपुर सदर विधानसभा से जीत हासिल की थी. उन्होंने कांग्रेस के ‘चाचा’ ज्ञान सिंह सोहनपाल को हराया था. सोहनपाल एक बार को छोड़कर 1969 से 2016 तक यहां से विधायक रहे थे. इस जीत के साथ ही भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष दिलीप ने सोहनपाल जैसे वरिष्ठ नेता को हराकर सुर्खियां बटोरीं थी. वे 2019 तक खड़गपुर सदर से विधायक रहे. फिर मेदिनीपुर से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया. उस समय तृणमूल के प्रदीप सरकार ने खड़गपुर सदर से उपचुनाव जीता था.
भाजपा में अलग-थलग पड़ गये थे दिलीप घोष
पिछले चुनाव में अभिनेता हिरन चटर्जी ने भाजपा के टिकट पर यह सीट जीती थी. इस बार भी हिरन को खड़गपुर सदर से टिकट मिलने की उम्मीद थी. 24वीं लोकसभा चुनाव में हार के बाद दिलीप घोष ने भी खड़गपुर सदर के दौरे बढ़ा दिए थे. हालांकि, पिछले साल अप्रैल में दीघा में जगन्नाथ मंदिर के उद्घाटन के दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद दिलीप की भाजपा से दूरी बढ़ गई. उन्हें भाजपा के किसी भी कार्यक्रम में नहीं देखा गया. हालांकि, पिछले साल के अंत में अमित शाह के बंगाल दौरे के बाद दिलीप फिर से सक्रिय होते नजर आए. शाह से मुलाकात के बाद दिलीप अपने पुराने अंदाज में नजर आने लगे.
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शादी को लेकर हिरन रहे विवादों में
इस बीच, खड़गपुर विधायक हिरन चटर्जी की दूसरी शादी को लेकर बवाल मच गया है. कहा जा रहा है कि हिरन ने अपनी पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी शादी कर ली है. हालांकि दिलीप घोष ने भी पिछले साल अपनी शादी को लेकर चर्चा शुरू कर दी थी, लेकिन दिलीप अविवाहित थे. वहां हिरन की पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दोबारा शादी करने को लेकर आलोचना हुई. यहां तक कि उनकी पहली पत्नी अनिंदिता चटर्जी ने भी हिरन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. इसी माहौल में दिलीप ने हिरन को ‘बेनकाब’ करके खड़गपुर सदर से टिकट हासिल किया. देखना यह है कि क्या वह 2016 की तरह जीत हासिल कर पाएंगे.
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