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जयराम महतो ने अनुदान मांगों पर कटौती प्रस्ताव लाते हुए कहा कि राज्य में 3 लाख से अधिक भूमि विवाद मामले लंबित हैं। 1932 के खतियान का भी मुद्दा उठाया। कहा, सूड़ी समाज को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए। दावा किया कि पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में इस समुदाय को यह दर्जा प्राप्त है। उन्होंने केवट, मल्लाह व निषादों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत जताई। टीआरआई से एथनोग्राफिक रिपोर्ट तैयार करा कर कुड़मियों को एसटी में शामिल करने के लिए केंद्र को पुन: प्रस्ताव भेजा जाए। जयराम ने दावा किया कि कुड़मी नेताओं की हत्या साजिश के तहत की गई है। 1932 आधारित स्थानीय नीति पर कहा कि राज्य गठन के 25 वर्ष बीत जाने के बाद भी सरकार नीति तय नहीं कर सकी है। स्थानीय नीति का उद्देश्य किसी को बाहर करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि राज्य की सुविधाओं का लाभ किन लोगों को प्राथमिकता के आधार पर मिले। उन्होंने देवघर हवाई अड्डे पर कहा कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े नए प्रावधान लागू होने के बाद भी किसानों को जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य नहीं मिल रहा है।
3 लाख से अधिक भूमि विवाद मामले लंबित, सूड़ी को अनुसूचित जाति में शामिल करें : जयराम महतो
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