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कला एवं संस्कृति विभाग बिहार और जिला प्रशासन मधुबनी के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय भामती वाचस्पति महोत्सव अंधराठाढ़ी में संपन्न हो गया। इस महोत्सव में परिचर्चा सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के पहले दिन सांस्कृतिक परफॉरमेंस दी गईं, जबकि दूसरे दिन परिचर्चा सत्र का आयोजन हुआ। विद्वानों ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, मैथिली भाषा और क्षेत्रीय इतिहास के विभिन्न पहलू शामिल थे। पारंपरिक मैथिली पाग, अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ से स्वागत किया सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन जिला परिषद अध्यक्ष बिंदु गुलाब यादव, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी नीतीश कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंधराठाढ़ी, और भामती वाचस्पति निर्माण समिति के अध्यक्ष रत्नेश्वर झा ने दीप प्रज्वलित कर किया। अतिथियों का पारंपरिक मैथिली पाग, अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया। मंचासीन अतिथियों ने मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, लोककला और विद्या परंपरा को बढ़ावा देने के लिए महोत्सव की सराहना की। जिला परिषद अध्यक्ष बिंदु गुलाब यादव ने कहा कि मिथिला ज्ञान, दर्शन और संस्कृति की भूमि रही है, जिसे पंडित वाचस्पति मिश्र जैसे दार्शनिकों ने विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को नई पीढ़ी को अपनी परंपरा से जोड़ने वाला बताया। लोक संस्कृति को नई ऊर्जा मिलती जिला परिषद उपाध्यक्ष संजय यादव ने महोत्सव के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन और आयोजन समिति को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल से स्थानीय कलाकारों को मंच मिलता है और लोक संस्कृति को नई ऊर्जा मिलती है। सांस्कृतिक संध्या में कई कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। इनमें पंचनाद (क्लासिकल फ्यूजन बैंड) ने राग अहीर भैरव में ‘अलबेला साजन आयो री’ प्रस्तुत किया। प्रसिद्ध मैथिली गायिका रंजना झा ने विद्यापति रचित ‘चानन भेल’ गीत गाया, जबकि मैथिली भजन गायक अरविंद सिंह ने ‘श्याम गजब सहर दरभंगा’ प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन आनंद मोहन झा ने किया नेहा कुमारी एवं समूह ने ओडिसी नृत्य, वर्षा झा ने मैथिली गायन, प्रिया कुमारी एवं समूह ने लोक नृत्य प्रस्तुत किया। दिव्या एवं शांति ने ‘छाप तिलक सब चीनी’ और डेज़ी ठाकुर ने चैती गाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। गायक तनय झा ने भी अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी। पहले दिन के सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन आनंद मोहन झा ने किया।
मधुबनी के अंधराठाढ़ी में महोत्सव संपन्न:भामती वाचस्पति महोत्सव में स्कॉलर ने नॉलेज ट्रेडिशन पर चर्चा की
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