गैस सिलेंडर क्राइसिस, दरभंगा में मरीजों की रोटी बंद:गयाजी में इमरजेंसी के लिए चूल्हे तैयार, पटना के अस्पतालों में आया इंडक्शन; 5 जिलों से रिपोर्ट

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होर्मुज स्ट्रेट से टैंकर के निकलकर भारत आने से देश को गैस संकट से राहत मिली है। बिहार में भी इसका असर नजर आ रहा है। गैस सिलेंडर की सप्लाई हो रही है। एजेंसियां पहले बैकलॉग कम करने में जुटी हैं। मतलब, जिन्होंने पहले बुक किया, उन्हें पहले सिलेंडर मिलेगा। इस बीच, अस्पतालों से लेकर होटलों तक में परेशानियां बनी हुईं हैं। गैस संकट शुरू हुआ तो सबसे पहले कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रोक दी गई थी। इससे अस्पतालों पर असर पड़ा है। कहीं, गैस स्टॉक खत्म होने की कगार पर है तो कहीं, 2-3 दिन का स्टॉक बचा है। गयाजी के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चूल्हें बनाए गए हैं। इमरजेंसी के लिए गैस बचाकर रखा गया है। दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में गैस की कमी से मरीजों के लिए रोटी बनना बंद हो गया है। पटना के PMCH और IGIMS में इमरजेंसी के लिए इंतजाम हैं। इंडक्शन मंगाया गया है। हमने बिहार के 5 जिले गयाजी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पटना और भागलपुर के अस्पतालों की स्थिति जानी। पड़ताल किया कि गैस संकट का इनपर क्या असर पड़ा है। पढ़ें रिपोर्ट…। 1- दरभंगा: डीएमसीएच में 6 सिलेंडर का स्टॉक, मरीजों की रोटी बंद दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भी गैस सिलेंडर की कमी है। सिर्फ 6 सिलेंडर बचे हैं। ऐसे में मरीजों को रोटी देना बंद कर दिया गया है। चावल-दाल और सब्जी देकर काम चलाया जा रहा है। डीएमसीएच में हर दिन करीब 1700 मरीजों और अस्पताल कर्मियों के लिए खाना बनाता है। मरीजों के लिए खाना बनाने की जिम्मेदारी कावेरी जीविका समूह के माध्यम से संचालित कैंटीन के पास है। गैस की कमी के कारण कैंटीन की रसोई व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। 6 सिलेंडर से 3 दिन ही बनेगा खाना कैंटीन मैनेजर अभिषेक मिश्रा ने बताया, ‘फिलहाल 6 गैस सिलेंडर उपलब्ध हैं। यहां रोज 3 से 4 सिलेंडर खर्च होते हैं। हमलोग गैस बचाकर काम चला रहे हैं तब भी 6 सिलेंडर के स्टॉक से मुश्किल से 3 दिन ही खाना बन पाएगा।’ उन्होंने कहा, ‘गैस की खपत कम करने के लिए मरीजों को रोटी देना बंद कर दिया गया है। फोकस कम गैस में अधिक लोगों के लिए भोजन तैयार करने पर है। जानकारी अस्पताल के सीनियर अधिकारियों को दे दी है। गैस सिलेंडर नहीं मिलने पर लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाकर मरीजों को खिलाया जाएगा।’ 2- गयाजी: स्टॉक में 10 सिलेंडर, हर दिन बनता है 1800 प्लेट खाना मगध प्रमंडल के सबसे बड़े हॉस्पिटल अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल के स्टॉक में 10 सिलेंडर हैं। यहां रोज करीब 600 मरीजों के लिए सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना बनाया जाता है। कुल मिलाकर लगभग 1800 प्लेट खाना रोज तैयार होता है। इतने बड़े पैमाने पर खाना बनाने के लिए गैस की खपत भी ज्यादा होती है। एहतियात के तौर पर कोयले जलाने के लिए 3 चूल्हे बनवाए गए हैं। गैस खत्म होने पर इनपर मरीजों के लिए खाना बनेगा। रसोई से जुड़े लोगों का कहना है कि यह व्यवस्था मजबूरी में करनी पड़ी है। क्योंकि कॉमर्शियल गैस सिलेंडर मिलना मुश्किल होता जा रहा है। हर दिन खर्च होते हैं 4 सिलेंडर रसोई में काम करने वाले अकाउंटेंट पप्पू कुमार ने बताया, ‘यहां रोज 3 से 4 कॉमर्शियल सिलेंडर की खपत होती है। सिलेंडर की सप्लाई नहीं हुई तो गैस पर खाना बनना बंद हो जाएगा। एहतियात के तौर पर कोयले के चूल्हे बनवा लिए गए हैं। कोयले की व्यवस्था के लिए रसोई अध्यक्ष को जानकारी दे दी गई है। वे गैस सिलेंडर की व्यवस्था कराने में लगे हैं।’ 3- भागलपुर: JLNMC में 900 मरीजों के लिए बनता है खाना, 4 दिन का गैस स्टॉक भागलपुर के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JLNMC) की रसोई में रोज 900 मरीजों के लिए खाना तैयार किया जाता है। यहां सिर्फ 3 से 4 दिन खाना बनाने लायक गैस सिलेंडर बचे हैं। पूर्वी बिहार के इस सबसे बड़े अस्पताल में सुबह से ही जीविका दीदियां मरीजों के लिए खाना बनाने में जुट जाती हैं। किचन संभाल रहीं जीविका दीदी रुखसार बेगम ने बताया, ‘हमलोग मरीजों के लिए नाश्ता, दोपहर और रात का खाना तैयार करते हैं। रोज करीब 3 से 4 गैस सिलेंडर की खपत होती है। हमारे पास अभी 16 गैस सिलेंडर हैं। इनसे 4 दिन खाना बना जाएगा।’ रुखसार ने कहा, ‘अभी तक अस्पताल की रसोई में गैस की कोई विशेष समस्या नहीं आई है। गैस एजेंसी की ओर से समय पर सिलेंडरों की आपूर्ति की जाती है। इससे मरीजों का खाना प्रभावित नहीं हो रहा है। हमने लकड़ी के चूल्हों की तैयारी की है। गैस सिलेंडर की कमी होने पर भी मरीजों के भोजन की व्यवस्था बिगड़ने नहीं देंगे।’ 4-पूर्णिया: मरीजों को मिल रहा खाना, कोयले के चूल्हे की नहीं पड़ी जरूरत पूर्णिया गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) में सिलेंडर स्टॉक पर्याप्त है। यहां इलाज करा रहे मरीजों ने बताया कि फिलहाल तीन टाइम खाना और 2 वक्त चाय मिल रही है। मरीजों को चाय नाश्ता और खाना देने की जिम्मेदारी जीविका दीदी की रसोई पर है। अभी तक लकड़ी या कोयले वाले चूल्हे इस्तेमाल करने की नौबत नहीं आई है। रोज 300 से 350 मरीजों के लिए तैयार होता है खाना GMCH में रोज करीब 300 से 350 मरीजों के लिए खाना तैयार हो रहा है। रसोई में काम कर रही जीविका दीदियों ने बताया कि यहां रोज करीब 1 गैस सिलेंडर खर्च होता है। मरीजों की संख्या 400 के पार जाने पर गैस खपत बढ़ जाती है। जीएमसीएच में भर्ती मरीजों को दिन में तीन बार खाना और सुबह-शाम चाय दी जाती है। सुबह चाय के साथ हल्का नाश्ता मिलता है। दोपहर में दाल, चावल, भुजिया, दो तरह की सब्जी और सलाद। शाम को चाय के साथ ब्रेड। रात में चावल-दाल और सब्जी दी जाती है। अस्पताल में मरीजों को मुफ्त खाना दिया जाता है। मरीज बोले- समय पर खाना मिल रहा है अस्पताल में भर्ती मरीज सुजीत कुमार ने कहा, ‘फिलहाल भोजन समय पर मिल रहा है। खाने की गुणवत्ता भी अच्छी है। नियमित समय पर खाना मिल जाता है। जीविका दीदियां साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखती हैं। जिस तरह से सिलेंडर संकट की बात सामने आ रही है, उससे डर लग रहा है कि कहीं इसका असर हमारे खाने पर न पड़ जाए। अगर ऐसा हुआ तो मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ जाएगी। बाहर का होटल वाला खाना मरीजों के लिए सही नहीं होता है।’ खाना बनना बंद हुआ तो मुश्किल हो जाएगा बायसी से आए मरीज मो. असफाक ने बताया, ‘यहां समय पर नाश्ता और तीन टाइम खाना मिल जाता है। मेन्यू भी बदलता रहता है। इसलिए मरीजों को दिक्कत नहीं होती। अगर सिलेंडर की कमी के चलते खाना बनना बंद हुआ तो बहुत परेशानी हो जाएगी। बायसी से पूर्णिया की दूरी 35 किलोमीटर से ज्यादा है। रोज घर से खाना लाना संभव नहीं है। हमारी आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं है कि बाहर से महंगा खाना खरीद सकें।’ लकड़ी या कोयले के चूल्हे पर खाना बनाने की नौबत नहीं जीविका से जुड़े सतीश कुमार ने कहा, ‘फिलहाल मरीजों को नियमित रूप से नाश्ता और तीनों वक्त का भोजन दिया जा रहा है। गैस संकट की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन को पत्र भेजा गया है ताकि समय पर पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध कराया जा सके। मरीजों के भोजन की व्यवस्था प्रभावित न हो। अभी तक अस्पताल में लकड़ी या कोयले के चूल्हे पर खाना बनाने की नौबत नहीं आई है। 5- मुजफ्फरपुर: SKMCH और सदर अस्पताल में 5-6 दिन का गैस स्टॉक मुजफ्फरपुर शहर के सबसे बड़े अस्पताल श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) और सदर अस्पताल मुजफ्फरपुर में फिलहाल गैस की कोई समस्या नहीं है। मरीजों को नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। दोनों अस्पतालों में कैंटीन और मरीजों के भोजन की व्यवस्था जीविका दीदियों की रसोई की ओर से की जा रही है। दोनों अस्पतालों में गैस सिलेंडर उपलब्ध हैं। 5-6 दिनों का गैस स्टॉक मौजूद है। चाय नाश्ता के लिए इंडक्शन रसोई में काम कर रही जीविका दीदियों ने बताया कि फिलहाल गैस की कोई कमी नहीं है। मरीजों के लिए समय पर भोजन बनाया जा रहा है। चाय या हल्के नाश्ते के लिए इंडक्शन चूल्हे का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे काम में सुविधा हो रही है। पहले से स्टॉक है और बुकिंग भी कर दी है जीविका दीदी गुड़िया कुमारी ने बताया, ‘यहां एक बार में तीन गैस सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। रसोई के लिए 5 से 6 दिनों का बैकअप स्टॉक मौजूद है। नए सिलेंडर के लिए बुकिंग भी कर दी गई है। जानकारी मिली है कि जल्द ही गैस सिलेंडर उपलब्ध हो जाएगा। फिलहाल अस्पताल में गैस को लेकर किसी तरह की परेशानी नहीं है। मरीजों के लिए खाना समय पर तैयार किया जा रहा है।’ 5- पटना के सरकारी अस्पतालों में मंगाए गए इंडक्शन पटना के बड़े सराकारी अस्पतालों (PMCH, IGIMS और LNJP हड्डी अस्पताल) में गैस संकट देखते हुए इंडक्शन मंगाए गए हैं। फिलहाल यहां गैस सिलेंडर की कमी नहीं है। रोज 2000 मरीजों के लिए खाना बन रहा पटना में पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल में जीविका के माध्यम से रोज करीब 2000 मरीजों के लिए खाना तैयार हो रहा। गैस आपूर्ति में परेशानी को देखते हुए जीविका रसोई के इंचार्ज से बात कर निर्देश दिया गया है कि मरीजों को भोजन मिलने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। मरीजों से अभी तक शिकायत नहीं मिली है एलएनजेपी हड्डी अस्पताल के निदेशक डॉ. राकेश चौधरी ने बताया कि अस्पताल में रोज 100 से अधिक मरीजों के लिए खाना तैयार किया जाता है। यह काम आउटसोर्सिंग के जरिए हो रहा है। मरीजों से अब तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। ठेकेदार को वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। अभी हालात सामान्य है IGIMS अस्पताल के कैंटीन में रोज 700-800 लोगों का खाना तैयार होता हैं। कैंटीन के मैनेजर चंदन कुमार ने कहा, ‘अभी पर्याप्त मात्रा में सिलेंडर का स्टॉक है। इससे खाना तैयार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में हालात सामान्य नहीं हुए तो मुश्किल होगी।’

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