रांची20 घंटे पहले
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झारखंड में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी: नई पीढ़ी से लेकर अनुभवी अफसर तक एसीबी के जाल में
झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जरूर तेज हुई है, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी चिंताजनक है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में हर साल औसतन 30 से 35 सरकारी कर्मचारी और अधिकारी रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़े जा रहे हैं। इसके बावजूद निचले स्तर पर घूसखोरी थमने का नाम नहीं ले रही है। वर्ष 2025 में करीब 30 मामलों में गिरफ्तारियां हुईं, जबकि 2026 में महज ढाई महीने के भीतर ही 8 ‘ट्रैप’ हो चुके हैं। यह संकेत देता है कि सिस्टम के भीतर ‘रूटीन भ्रष्टाचार’ ने गहराई तक जड़ें जमा ली हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि रिश्वतखोरी अब केवल वरिष्ठ अधिकारियों तक सीमित नहीं रही। 31 वर्ष तक के युवा कर्मचारी भी घूस लेते पकड़े जा रहे हैं, वहीं आरोपियों की अधिकतम उम्र 56 वर्ष तक पहुंच रही है। यानी नई पीढ़ी से लेकर अनुभवी अफसर तक, सिस्टम के हर स्तर पर भ्रष्टाचार का असर साफ दिख रहा है। जांच में यह भी सामने आया है कि रिश्वत की रकम भले ही 2 हजार से 60 हजार रुपए के बीच हो, लेकिन इसके पीछे की मानसिकता एक जैसी है— छोटे से छोटे काम के बदले भी ‘रिश्वत तय’।
हालांकि, तस्वीर का दूसरा पहलू और भी अधिक निराशाजनक है। आंकड़े बताते हैं कि इन मामलों में 5 प्रतिशत आरोपियों को भी सजा नहीं मिल पा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी कार्रवाइयों के बावजूद भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है?
केस स्टडी: हालिया गिरफ्तारियां
नाम: मनीष भारती (32 वर्ष), पद: निम्न वर्गीय लिपिक घटना: 1 मई 2025 को एसीबी धनबाद ने खोरी महुआ अनुमंडल कार्यालय के नाजिर मनीष कुमार भारती को 10 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। उसने एक अपील वाद में उचित आदेश पारित कराने के एवज में यह रकम मांगी थी।
नाम: दिलीप कुमार (34 वर्ष), पद: कंप्यूटर ऑपरेटर घटना: 26 मार्च 2025 को एसीबी रांची ने जिला निबंधन कार्यालय लोहरदगा के कंप्यूटर ऑपरेटर दिलीप कुमार को 5,000 रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। उसने जमीन का पट्टा निर्गत करने के बदले रिश्वत मांगी थी।
नाम: नंदन कुमार (31 वर्ष), पद: ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर (BSO) घटना: 19 मार्च 2026 को एसीबी दुमका की टीम ने साहिबगंज के बड़हरवा ब्लॉक में तैनात बीएसओ नंदन कुमार को 40 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। उन पर डीलरों से अवैध वसूली (कलेक्शन) करने का आरोप था।
पिछले साल से अब तक की गिरफ्तारियां (विभागवार)
| विभाग | 2025 | 2026 |
| पुलिस विभाग | 03 | 03 |
| राजस्व / अंचल | 07 | 01 |
| पंचायती राज | 05 | 01 |
| ग्रामीण विकास | 04 | 00 |
| स्वास्थ्य विभाग | 01 | 01 |
| आपूर्ति विभाग | 01 | 01 |
| भू-अर्जन | 00 | 01 |
| अन्य (शिक्षा, खनन आदि) | 09 |
2 हजार से 60 हजार तक का सौदा: वर्ष 2025 के मामलों पर नजर डालें तो न्यूनतम 2,000 रुपए जैसी मामूली रकम लेते हुए भी कर्मचारी पकड़े गए हैं, वहीं अधिकतम 60,000 रुपए तक की घूस लेते अधिकारी भी गिरफ्त में आए हैं। जहां जिला खनन कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर जैसे लोग छोटी रकम पर सौदा कर रहे थे, वहीं ग्रामीण विकास विभाग के कार्यपालक अभियंता जैसे अधिकारी बड़े भुगतान के बदले मोटी रिश्वत लेते पकड़े गए।
30 से 48 साल के बीच सबसे अधिक मामले: वर्ष 2026 के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि रिश्वत लेने वालों में 31 से 52 वर्ष तक के कर्मचारी शामिल हैं, जिनमें सबसे अधिक मामले 40 से 48 वर्ष के आयु वर्ग के हैं। वहीं 2025 में यह दायरा 32 से 56 वर्ष के बीच था, जिसमें 35-50 वर्ष के अधिकारियों की संख्या सबसे अधिक रही।
राजस्व विभाग सबसे आगे: आंकड़ों के अनुसार, राज्य में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार राजस्व और अंचल विभाग में है। वर्ष 2025 में इस विभाग के 7 कर्मी गिरफ्तार हुए। पंचायती राज (5 मामले) और ग्रामीण विकास (4 मामले) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। इन विभागों में मनरेगा, बिल भुगतान और निर्माण कार्यों में सबसे ज्यादा घूसखोरी देखी गई। पुलिस विभाग में भी 3 कर्मियों को केस मैनेजमेंट और जब्ती के नाम पर रिश्वत लेते पकड़ा गया।





