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मधुबनी जिले में एनीमिया की समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एफसीएम (Ferric Carboxymaltose) थेरेपी/आयरन सुक्रोज थेरेपी की शुरुआत की है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने वर्चुअल माध्यम से इसका उद्घाटन किया। यह थेरेपी विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं में आयरन की कमी दूर करने में प्रभावी मानी जाती है। सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने बताया कि एनीमिया जिले में एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या है, जिससे कमजोरी, थकान, शारीरिक विकास में बाधा और गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। एफसीएम थेरेपी एक आधुनिक और प्रभावी तकनीक है, जो उन मरीजों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जिन्हें सामान्य आयरन की गोलियों या सिरप से पर्याप्त लाभ नहीं मिलता। इस पहल के तहत जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा मरीजों को यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। प्रथम चरण में यह सुविधा सदर अस्पताल मधुबनी में शुरू की गई है, जिसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति ने 3066 वायल दवा उपलब्ध कराई है। सिविल सर्जन ने यह भी बताया कि इस कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए चिकित्सक डॉ. ज्ञानेंद्र भारती और प्रसव कक्ष इंचार्ज माधुरी कुमारी को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। सिविल सर्जन ने सभी स्वास्थ्यकर्मियों से अपील की कि वे इस पहल को सफल बनाने में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें और अधिक से अधिक लोगों तक इस सुविधा का लाभ पहुंचाएं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 (2019-20) के आंकड़ों के अनुसार, मधुबनी जिले में 6 माह से 59 वर्ष के 67.1 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से ग्रसित हैं, शहरी 64.2 प्रतिशत ग्रामीण 68.3प्रतिशत। इसी तरह, 15 से 49 वर्ष की गैर-गर्भवती महिलाओं में 57.2प्रतिशत, शहरी 54.1प्रतिशत ग्रामीण 58.7 प्रतिशत और 15 से 49 वर्ष की गर्भवती महिलाओं में 52.2 प्रतिशत,शहरी 45.7 प्रतिशत ग्रामीण 54.3 प्रतिशत एनीमिया से पीड़ित हैं।
इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक पंकज मिश्रा, अस्पताल प्रबंधक अब्दुल मजीद, पिरामल फाउंडेशन के धीरज सिंह सहित अन्य कर्मी उपस्थित थे।




