
Dhanbad Ring Road Scam, धनबाद (परमेश्वर प्रसाद की रिपोर्ट): भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ीं धनबाद के रिंग रोड निर्माण मामले में निगरानी पुलिस ने सोमवार को 17 आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र (Chargesheet) दाखिल किया है. इस बड़े घोटाले के सभी आरोपी 9 जनवरी 2026 से जेल में बंद हैं. विशेष न्यायाधीश मनीष की अदालत ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों को देखते हुए पूर्व में ही उनकी जमानत अर्जियों को सिरे से खारिज कर दिया था. एंटी करप्शन ब्यूरो ने अपनी जांच में पाया कि भू-अर्जन विभाग के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेजों के सहारे करोड़ों रुपये की सरकारी राशि का बंदरबांट किया है.
नियमों को ताक पर रखकर लुटाया गया सरकारी खजाना
घोटाले (Modus Operandi) पर प्रकाश डालते हुए प्राथमिकी में स्पष्ट किया गया है कि धनबाद, दुहाटांड़, मनईटांड़, ढोखरा, तिलाटांड़, धैया और भेलाटांड़ जैसे महत्वपूर्ण मौजों में भू-अर्जन के दौरान स्थापित नियमों की घोर अनदेखी की गई. निगरानी विभाग के अनुसार, बिना अनुमानित लागत की मंजूरी और बिना पंचाट घोषित किए ही काम किया गया. आश्चर्यजनक रूप से, भूमि की दरों का अंतिम निर्धारण होने से पूर्व ही आनन-फानन में भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर ली गई. इस पूरी कवायद का उद्देश्य अपात्र व्यक्तियों को लाभ पहुंचाना और वास्तविक रैयतों के हक को मारना था.
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आदिवासियों और अशिक्षित रैयतों के साथ बड़ी धोखाधड़ी
निगरानी की जांच में यह भी सामने आया है कि इस भ्रष्टाचार का सर्वाधिक शिकार समाज के सबसे कमजोर वर्ग अशिक्षित और अनुसूचित जनजाति के रैयतों को बनाया गया. सक्रिय बिचौलियों ने भोले-भाले ग्रामीणों के बैंक खाते खुलवाए और मुआवजा राशि के नाम पर आने वाले चेक स्वयं हड़प लिए. कई पीड़ितों ने अपने बयान में दर्ज कराया है कि उन्हें केवल नाममात्र की राशि थमा दी गई, जबकि सरकारी दस्तावेजों में उनके नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये का भुगतान दिखाया गया है.
दो संगठित गिरोहों और अधिकारियों की ‘जुगलबंदी’
इस घोटाले की गहराई तक पहुंचने पर निगरानी विभाग ने दो संगठित आपराधिक गिरोहों की पहचान की है. ये गिरोह भू-अर्जन कार्यालय के भीतर गहरी पैठ रखते थे और विभागीय कर्मचारियों के साथ मिलकर सरकारी अभिलेखों (Records) में हेरफेर करते थे. जांच अधिकारियों का मानना है कि राजस्व विभाग के कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है, जिनकी संलिप्तता की पुष्टि के लिए तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं. निगरानी विभाग ने संकेत दिया है कि भविष्य में सप्लीमेंट्री आरोप पत्र (Supplementary Chargesheet) के माध्यम से कुछ और प्रभावशाली व्यक्तियों को इस मामले में घसीटा जा सकता है.
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