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CM Son Nishant Refuses Minister Post | Bihar Politics

CM नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार सरकार में शामिल होने के लिए सोमवार देर रात तक राजी नहीं हुए। टीम निशांत के 10 से ज्यादा विधायक उन्हें 5 दिन से मनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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आखिरी कोशिश आज यानि मंगलवार दोपहर 12 बजे तक की जाएगी। इसके बाद नहीं माने तो जदयू अपने प्लान B को एक्टिव करेगी। CM हाउस में हुई हाई प्रोफाइल बैठक में यह टॉप एजेंडा रहा है।

भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में पढ़िए, CM हाउस के भीतर चल रही हाई प्रोफाइल मीटिंग की INSIDE STORY. अगर निशांत नहीं मानते हैं तो JDU में किसे विधायक दल का नेता बनाया जा सकता है।

सबसे पहले निशांत को मनाने की पूरी प्रक्रिया समझिए

नीतीश कुमार ने जब राज्यसभा जाने का फैसला लिया था तब निशांत कुमार पार्टी और सरकार में शामिल होने के लिए तैयार थे। सबकुछ तय हो गया था। निशांत की ब्रांडिंग से लेकर टीम निशांत का गठन तक कर दिया गया था। उन्होंने जिलावार विधायकों, सांसदों और मंत्रियों से मुलाकात शुरू कर दी थी। सबकुछ सेट हो गया था। तय प्लानिंग के तहत एक-एक फैसले लिए जा रहे थे।

5 दिन पहले निशांत ने अचानक सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके बाद शुरू हुई उन्हें मनाने की प्रक्रिया। निशांत को पिछले 5 दिन से मनाने की कोशिश में जुटे पार्टी एक विधायक ने बताया, दिन भर CM हाउस में बैठक कर अलग-अलग नेता उन्हें मनाने में जुटे हैं। बताया जा रहा है कि उनका सरकार में शामिल होना क्यों जरूरी है। अगर वे शामिल नहीं होते हैं तो पार्टी के भीतर क्या असर हो सकता है।

परिवारवाद के आरोप से बचने से लेकर बिहार घूमने की प्रक्रिया तक सबकुछ उन्हें समझाया जा रहा है। समझाने वाले में केवल उनके युवा ब्रिगेड के विधायक ही नहीं। JDU के सीनियर लीडर के साथ परिवार के लोग भी कोशिश कर रहे हैं कि निशांत सरकार का हिस्सा बन जाएं।

एक ओर निशांत सरकार में शामिल होने को तैयार नहीं। वहीं, जदयू के कार्यकर्ता उन्हें CM बनाने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए जदयू कार्यालय के पास बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए।

एक ओर निशांत सरकार में शामिल होने को तैयार नहीं। वहीं, जदयू के कार्यकर्ता उन्हें CM बनाने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए जदयू कार्यालय के पास बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए।

अब 2 पॉइंट में समझिए निशांत को किन दो बातों का डर

1- पहले सदन, इसके बाद सरकार में एंट्री चाहते हैं

निशांत कुमार अभी तक किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में उनके शपथ की प्रक्रिया भी वही होगी जिस तरीके से उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को सरकार में एंट्री दिलाई। दीपक प्रकाश के शपथ के बाद NDA सरकार की खूब किरकिरी हुई थी। उपेंद्र कुशवाहा के साथ सरकार पर भी परिवारवाद को बढ़ावा देने का खूब आरोप लगा था।

निशांत के साथ CM नीतीश कुमार भी चाहते हैं कि उनपर आरोप न लगे। वे पहले विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना चाहते हैं, इसके बाद सरकार में शामिल होना। अगले महीने विधान परिषद का चुनाव होना है। नीतीश कुमार की खाली हुई सीट पर निशांत का विधान परिषद सदस्य चुना जाना तय है।

2- एक्सपोज होने का डर, पहले पॉलिटिक्स समझना चाहते हैं

निशांत को मनाने वालों में शामिल एक विधायक ने भास्कर को बताया, ‘वे पूरी तैयारी के साथ सरकार में शामिल होना चाहते हैं। इसके लिए राज्य की यात्रा कर लोगों की समस्या, सरकार की फंक्शनिंग और राजनीति के उतार-चढ़ाव जानने-समझने के बाद ही सरकार में शामिल होना चाहते हैं।’

दरअसल, निशांत राजनीति में मात्र एक महीने पुराने हैं। मार्च में उन्होंने JDU की औपचारिक सदस्यता ग्रहण की है। चुनाव से पहले उन्होंने पॉलिटिकल एक्विविटी में शामिल होना शुरू किया था। इससे पहले पॉलिटिक्स से ज्यादा अध्यात्म में इंटरेस्टेड थे। उन्हें इस बात का डर है कि अगर वे पूरी तरह तैयार होकर नहीं आए तो राजनीति की शुरुआत में ही एक्सपोज हो जाएंगे।

निशांत पार्टी जॉइन करने के बाद लगातार लोगों से मिल रहे हैं। 12 अप्रैल को उन्होंने समस्तीपुर की सांसद शंभावी चौधरी और अन्य लोगों से मुलाकात की।

निशांत पार्टी जॉइन करने के बाद लगातार लोगों से मिल रहे हैं। 12 अप्रैल को उन्होंने समस्तीपुर की सांसद शंभावी चौधरी और अन्य लोगों से मुलाकात की।

निशांत का कहना है कि अगर अभी वे सरकार में शामिल हो जाते हैं तो उन पर उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश और लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव की तरह परिवारवाद का आरोप लगेगा। अपनी राजनीति के शुरुआत में ही इस तरह के आरोप से वे बचना चाहते हैं।

दरअसल, नवंबर 2025 में NDA की सरकार बनने के बाद दीपक मंत्री बन गए थे। सरकार बनने के 5 महीने बाद भी अभी तक वे किसी सदन के सदस्य नहीं हैं।

निशांत नहीं मानें तो क्या होगा, अब इसे समझिए

सबसे बड़ा सवाल- विधायक दल का नेता किसे चुना जाएगा?

जदयू सूत्रों की मानें तो NDA के घटक दलों ने अपने विधायकों को विधायक दल की बैठक के लिए पटना बुला लिया है, लेकिन JDU के विधायकों को अभी तक विधायक दल के बैठक की जानकारी नहीं दी गई है। हां, सभी विधायकों को अगले दो दिनों के लिए पटना बुला लिया गया है। सूत्रों की मानें तो निशांत के फैसले के बाद ही आगे की रणनीति तय होगी।

सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि निशांत नहीं मानें तो जदयू विधायक दल का नेता किसे चुना जाएगा। मौजूदा नेता नीतीश कुमार अब विधानमंडल के किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। सूत्रों की मानें तो इसके लिए दो नेता का नाम सबसे आगे चल रहा है। विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव। दोनों फिलहाल पार्टी के सीनियर लीडर और नीतीश के करीबी हैं। मौजूदा उपनेता श्रवण कुमार इस बार भी उपनेता बने रह सकते हैं।

8 मार्च को निशांत कुमार ने JDU जॉइन की। तस्वीर 16 मार्च की है, जब नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव में निर्वाचित घोषित हुए थे।

8 मार्च को निशांत कुमार ने JDU जॉइन की। तस्वीर 16 मार्च की है, जब नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव में निर्वाचित घोषित हुए थे।

निशांत की गैरहाजिरी में JDU के 2 डिप्टी CM होंगे

JDU के एक सीनियर विधायक ने भास्कर को बताया कि इस बात की पूरी कोशिश है कि निशांत की सरकार में एंट्री कराई जाए। अगर निशांत नहीं माने तो पार्टी की तरफ से प्लान-B भी तैयार किया जा रहा है।

निशांत आखिर तक सरकार में शामिल होने के लिए राजी नहीं होते हैं तो JDU से 2 डिप्टी CM होंगे। इसमें एक सवर्ण और एक अति पिछड़ा समुदाय या दलित वर्ग से होगा। ऐसे में विजय चौधरी का डिप्टी CM बनना तय माना जा रहा है। दूसरा नाम लेने से कोई भी नेता फिलहाल परहेज कर रहे हैं।

JDU के भीतर असंतोष बढ़ेगा- विधायकों को एकजुट रखना होगा

नीतीश कुमार फिलहाल JDU के सर्वमान्य नेता हैं। 2005 के बाद प्रत्यक्ष या परोक्ष रुप से पार्टी और सरकार दोनों जगह उनकी मजबूत पकड़ रही है। अब जब वे बिहार की सियासत छोड़कर केंद्र की राजनीति में जा रहे हैं तो पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को इस बात का मैसेज दिया गया था कि उनकी जगह निशांत लेंगे। अब जब सरकार में निशांत शामिल नहीं होंगे तो पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ेगा। सूत्रों की मानें तो JDU का एक धड़ा अभी भी नाराज है। ऐसे में पार्टी के सभी 85 विधायकों को एकजुट रखना टफ टास्क होगा।

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