
Jharkhand Rajya Sabha Election, रांची (सतीश सिंह की रिपोर्ट): झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गयी है. दो सीटों पर होने वाले इस चुनाव में सत्ता पक्ष यानी इंडिया गठबंधन फिलहाल मजबूत स्थिति में दिख रहा है, लेकिन विपक्षी एनडीए भी बिहार मॉडल की तर्ज पर ऑपरेशन लोट्स के तहत समीकरण साधने में जुटा है. संख्या बल भले ही इंडिया गठबंधन के पक्ष में हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि इस बार चुनाव में एनडीए ऑपरेशन लोटस जैसा कोई समीकरण बना सकता है. झामुमो के हालिया सियासी रुख के बाद एनडीए के ऑपरेशन लोट्स को और बल मिला है.
झामुमो के बदले तेवर, गठबंधन पर सवाल
हाल के महीनों में झामुमो का रुख सहयोगी दलों के साथ पूरी तरह सहज नहीं दिख रहा है. बिहार चुनाव में झामुमो ने राजद के साथ गठबंधन नहीं किया. असम में कांग्रेस से दूरी बनाकर पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ा. अब पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के समर्थन में उतरने की तैयारी है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि असम और बंगाल में झामुमो की अलग राह का सीधा असर झारखंड की सियासत पर भी पड़ सकता है. असम में कांग्रेस से दूरी ने विपक्षी एकता पर सवाल खड़े किये हैं. बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ झुकाव से कांग्रेस-झामुमो रिश्तों में खटास की आशंका बढ़ गयी है. ऐसे में राज्यसभा चुनाव के दौरान अंदरूनी असंतोष या रणनीतिक दूरी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.
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एनडीए की रणनीति : बिहार मॉडल के तहत एक सीट निकालने की कोशिश
झारखंड में संख्या बल कम होने के बावजूद भाजपा उम्मीद नहीं छोड़ी है. पार्टी बिहार मॉडल की तर्ज पर झारखंड में भी एक सीट निकालने की कोशिश में जुट गयी है. मार्च 2026 में राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने पांच सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. प्रत्येक उम्मीदवार को जीतने के लिए 41 वोटों की आवश्यकता थी. एनडीए के पास चार सीटें सुरक्षित थीं, लेकिन पांचवीं सीट के लिए 38 वोट ही थे. विपक्ष के चार विधायकों के अनुपस्थित होने से सदन की प्रभावी संख्या कम हो गयी, जिससे एनडीए के पांचवें उम्मीदवार को फायदा मिला. मतदान के दिन कांग्रेस के तीन और राजद का एक विधायक वोट डालने नहीं पहुंचे, जिससे जीत के लिए आवश्यक वोटों का आंकड़ा कम हो गया.
वर्ष 2016 में संख्या बल नहीं रहने पर भी भाजपा ने जीती थी दोनों सीट
वर्ष 2016 में हुई राज्यसभा चुनाव में दोनों सीट पर जीत दर्ज करने के लिए संख्या बल नहीं रहने के बावजूद एनडीए ने दोनों सीट जीती थी. भाजपा की रणनीति से केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और महेश पोद्दार ने राज्यसभा चुनाव जीत दर्ज की थी. मतदान के दिन झामुमो विधायक चमरा लिंडा व कांग्रेस विधायक देवेंद्र सिंह वोट नहीं डाले. जिसकी वजह से जीत के आवश्यक आंकडा कम हो गया और झामुमो प्रत्याशी बसंत सोरेन को हरा कर महेश पोद्दार चुनाव जीते.
एनडीए की नजर सत्तारूढ़ दल के नाराज विधायकों पर
राज्यसभा चुनाव के गणित के अनुसार, एक प्रत्याशी को जीत के लिए प्रथम वरीयता के कम से कम 28 वोट चाहिए. इस लिहाज से देखें तो इंडिया गठबंधन के पास दो सीट जीतने के लिए पर्याप्त 56 वोट हैं. झामुमो अगर एक सीट पर उम्मीदवार उतारता है तो उसकी जीत तय है. लेकिन दूसरी सीट के उम्मीदवार के लिए इंडिया गठबंधन में एकजुट रहना होगा. वहीं एनडीए के खेमे में 24 सीटें हैं. ऐसे में एनडीए की नजर सत्तारूढ़ दल के नाराज विधायकों पर है.
विधानसभा की मौजूदा स्थिति
इंडिया गठबंधन : 56 विधायक
झामुमो: 34
कांग्रेस: 16
राजद: 4
माले: 2
एनडीए : 24 विधायक
भाजपा: 21
आजसू: 1
जदयू: 1
एलजेपी:1
अन्य :1 (जेएलकेएम)
क्या कहते हैं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष
भाजपा अपना उम्मीदवार देगी. दिल्ली तक झारखंड की आवाज भाजपा ही बुलंद कर सकती है. जनता का विश्वास भाजपा के साथ है. हम 69 लाख वोट पिछले विधानसभा चुनाव में लाये हैं. राज्यसभा चुनाव में भाजपा का मैजिक चलेगा. रणनीति रणनीति होती है. इसका खुलासा नहीं किया जा सकता है. चुनाव आने दिजिए सब साफ हो जायेगा.
भानु प्रताप शाही, प्रदेश उपाध्यक्ष, भाजपा

