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लॉकडाउन में शुरू किया बिजनेस, सालाना इनकम 18 लाख रुपए:400 दुकानदार और स्कूलों में जाती हैं इनकी बनाई कॉपियां, दे रहीं रोजगार


कोडरमा सदर प्रखंड की बेकोबार अंश पंचायत निवासी नेहा राज स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनी हैं। वह अपने पति के साथ मिलकर कॉपी बनाने और बाइंडिंग का व्यवसाय करती हैं, जिससे उन्हें सालाना 18 लाख रुपए तक की आमदनी हो रही है। नेहा अब अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर प्रदान कर रही हैं। नेहा ने लॉकडाउन के वक्त 50 हजार रुपए की सीएलएफ (CLF) राशि और 1 लाख रुपये का बैंक ऋण लेकर कॉपी मेकिंग और बाइंडिंग का अपना व्यवसाय शुरू किया। कॉपी की मांग बढ़ती जा रही
नेहा के पति शंभु राणा ने बताया कि शुरुआत में कॉपी को बाजार में बेचने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। लेकिन देखते ही देखते इनकी कॉपी के खरीदार बढ़ने लगे और आज इनके पास करीब 400 से अधिक खरीदार हैं। साथ ही हर दिन इनके कॉपी की मांग बढ़ती जा रही है। नेहा बतातीं हैं कि उन्होंने मैट्रिक तक पढ़ाई की है। पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, जिसके कारण वह हमेशा कुछ बेहतर करने की इच्छा रखती थीं। हालांकि, सामाजिक बंधनों और उचित मार्गदर्शन की कमी के कारण उन्हें आगे बढ़ने में कठिनाई हो रही थी। पिता का सपना था यह बिजनेस नेहा ने 2017 में शंभू राणा से प्रेम विवाह किया था। नेहा राज ने बताया कि विवाह से पहले उनके पिता हमेशा कॉपी बनाने और बाइंडिंग का व्यवसाय शुरू करने की बात किया करते थे, लेकिन किसी कारणवश वे इसे पूरा नहीं कर पाए। नेहा ने शादी के बाद अपने पिता के इस सपने को साकार करने का संकल्प लिया। वर्ष 2019 में उनके गांव में JSLPS के माध्यम से “राखी आजीविका सखी मंडल” का गठन हुआ, जिससे जुड़कर नेहा के जीवन में बड़ा बदलाव आया। वह नियमित रूप से समूह की बैठकों में शामिल होने लगीं और छोटी-छोटी बचत के साथ-साथ विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी प्राप्त की। मुद्रा लोन लेकर बड़े मशीन की खरीदारी की
समूह के माध्यम से उन्हें आर-सेटी (R-SETI) और अन्य संस्थानों द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षण मिला। इसके बाद उन्होंने कॉपी मेकिंग और बाइंडिंग का अपना व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन अपने परिश्रम और लगन से उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया। बाद में उन्होंने मुद्रा लोन लेकर बड़े मशीन की खरीदारी की और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। नेहा अपने व्यवसाय के माध्यम से 8 लोगों को रोजगार भी दे रही हैं और दो समूहों का संचालन भी कर रही हैं। उन्होंने अपने व्यवसाय के लिए गए ऋण को समय पर आसान किश्तों में चुकाया भी है। जीवन में संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए: नेहा राज नेहा राज ने बताया कि इस सफर में सबसे बड़ी सीख “एकता में बल” है। उन्होंने कहा कि जीवन में संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए। सही मार्गदर्शन और सामूहिक सहयोग से महिलाएं किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकती हैं। आगे की योजना के बारे में उन्होंने बताया कि वे डिजिटल प्रिंटिंग प्रेस स्थापित करना चाहती हैं और अधिक से अधिक महिलाओं को इस कार्य से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहती हैं। उन्होंने JSLPS एवं NRLM के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना गरीब एवं जरूरतमंद महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

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