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20 हजार की पलंग, डबल टैक्स मांग रही नेपाल सरकार:मधुबनी निवासी बोले- बेटी के लिए खरीदा, बॉर्डर पर रोका; नेपाली टैक्स से बिहार के कारोबारी परेशान


“आज मेरी बेटी की शादी नेपाल में है। मैं दहेज में पलंग लेकर जा रहा था, लेकिन जटही बॉर्डर पर रोक दिया गया और 20 हजार रुपए टैक्स मांगा जा रहा है, जबकि पलंग की कीमत भी उतनी ही है।” जयनगर के निवासी ध्यानी महरा ने दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान ये बातें कही। दरअसल नेपाल सरकार ने नेपाली सीमा पुलिस को निर्देश दिया है कि भारत से आने वाले 100 रुपए से ज्यादा की कीमत के सामान पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य रूप से वसूली जाए। इसके अलावा नेपाल सरकार ने भारत से आयात वाले कुछ प्रोडक्ट्स पर बैन भी लगा दिया है। बॉर्डर इलाकों में नेपाली पुलिस अनाउंसमेंट कर लोगों को बता रही है, भारत से खरीदारी करने वाले लोग अनिवार्य रूप से कस्टम ड्यूटी अदा करें। नेपाली व्यापरियों की शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया है। व्यापरियों ने कहा कि बॉर्डर इलाकों के निवासी खाने-पीने की चीजें, कपड़े और घर का अन्य सामान खरीदने के लिए भारतीय बाजारों में जाते हैं, जिससे नेपाल के स्थानीय व्यापारियों का नुकसान हो रहा है। वहीं, नेपाल के इस कदम ने बॉर्डर के पास मौजूद बिहार के बॉर्डर जिलों में रहने वालों की चिंता बढ़ा दी है। आखिर नेपाल सरकार के नए कस्टम ड्यूटी में क्या-क्या निर्देश दिया गया है। बिहार के बॉर्डर जिलों में इसका कितना असर पड़ रहा है? किस सामान पर कितना टैक्स और किन पर रोक लगाई गई है? पढ़िए रिपोर्ट… पहले रक्सौल के बाजार की दो तस्वीरें नेपाल का नियम क्या कहता है नेपाल सरकार ने भारत से आने वाले सामान पर कस्टम नियम सख्त कर दिए हैं। सीमा पार ले जाए जाने वाले सामान की वैल्यू अगर ₹100 से अधिक होती है, तो उस पर कस्टम ड्यूटी (भंसार) लगाना अनिवार्य है। यह नियम छोटे व्यक्तिगत सामान और ज्यादा मात्रा में ले जाए जाने वाले सामान, दोनों पर लागू होता है। खासतौर पर कपड़ा, किराना, इलेक्ट्रॉनिक्स, जूते-चप्पल, फर्नीचर और अन्य दैनिक उपयोग के सामान पर लागू किया गया है। अगर सामान की मात्रा ज्यादा है या व्यापारिक उपयोग (कमर्शियल) जैसी लगती है, तो कम कीमत होने पर भी टैक्स लगाया जा सकता है। नियम को लेकर सीमा पर जांच सख्त कर दी गई है, उल्लंघन करने पर जुर्माना या सामान जब्त भी किया जा सकता है। 40 लाख की बिक्री 5 लाख पर आई नेपाल सरकार के इस कड़े रुख का सीधा असर सीमावर्ती भारतीय बाजारों पर देखने को मिल रहा है। सुपौल के भीमनगर, वीरपुर बसमतिया, बेला सहित अन्य बाजारों में जहां पहले नेपाली ग्राहकों की चहल-पहल रहती थी, अब वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। भीमनगर व्यापार संघ के अध्यक्ष सतेंद्र कुमार सिंह, व्यापारी शम्भू साह, मनीष साह ने बताया कि नेपाल सरकार के इस निर्णय से छोटे व्यापारियों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पहले बाजारों में रौनक रहती थी, लेकिन अब पिछले चार दिनों से इस नियम के लागू होने से दुकानों पर ग्राहकों की कमी से व्यापार ठप होने की कगार पर है। पक्का बिल देने की व्यवस्था भी अधिकांश छोटे दुकानदारों के पास नहीं है। पहले जहां सीमावर्ती क्षेत्रों में संपत्ति की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं, वहीं अब उनमें गिरावट दर्ज की जा रही है। कुल मिलाकर, नेपाल सरकार के इस कदम ने जहां सीमा सुरक्षा को मजबूत किया है, वहीं सीमावर्ती भारतीय बाजारों की आर्थिक गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। पहले भीमनगर बाजार में 35 से 40 लाख की बिक्री होती थी, लेकिन अब 5 लाख पर भी आफत खड़ा हो गया हैं। रक्सौल के व्यापारियों ने क्या-क्या बताया रक्सौल के वार्ड पार्षद और व्यापारी सुरेश कुमार ने कहा कि हमारी बेटियां, बहनें जो विदाई करके आएंगी या जाएंगी, वो क्या 100 रुपए के सामान लेकर जाएंगी। हमारा व्यापार तो चौपट हो ही गया है, अब संबंध भी खतरे में आ जाएगा, लोग अब शादी विवाह बॉर्डर पार करने से बचेंगे। टेक्सटाइल चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता ने कहा कि “जो नियम लगाया गया है, वह मानवता के खिलाफ है और भारत-नेपाल के ‘बेटी-रोटी’ जैसे गहरे रिश्ते को नुकसान पहुंचाने वाला है। यह सीमावर्ती बाजारों के लिए बहुत ही घातक साबित होगा। हो सकता है इससे नेपाल की अर्थव्यवस्था को फायदा मिले, लेकिन भारतीय व्यापारियों के लिए यह फैसला जानलेवा है। मैं नेपाल सरकार से अपील करता हूं कि इस नियम पर दोबारा विचार किया जाए। साथ ही भारत सरकार से भी अनुरोध है कि बॉर्डर के व्यापार को बचाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। भारत सरकार को बॉर्डर के बाजारों से अच्छा-खासा राजस्व मिलता है, इस पर ध्यान देना चाहिए। रक्सौल का बाजार सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, क्योंकि यहां का करीब 90% कारोबार नेपाली ग्राहकों पर ही निर्भर है।” सुपौल में फर्नीचर-कपड़े के व्यापार को सबसे ज्यादा नुकसान जिले के भीमनगर के कपड़ा दुकानदार शंभु साह ने कहा कि “जैसे ही नया नियम लागू हुआ, उसका असर तुरंत दिखने लगा। पहले मेरी दुकान पर हर दिन करीब 8 हजार रुपए की बिक्री होती थी, लेकिन आज सुबह से शाम तक 2500 रुपए भी नहीं हो पाए। मेरे ज्यादातर ग्राहक नेपाल से आते थे, इसलिए नेपाल सरकार का यह कानून सीधे मेरे घर-परिवार पर असर डाल रहा है।” सत्येंद्र ने आगे कहा कि “मेरे हिसाब से यह फैसला बॉर्डर के दुकानदारों पर सीधा वार है। इससे नेपाल के लोगों को भी परेशानी होगी, क्योंकि वहां के बाजार अभी इतने विकसित नहीं हैं। लोगों को जरूरत पड़ने पर यहां आना ही होगा, लेकिन अब उन्हें ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा। मुझे नहीं लगता कि यह नियम ज्यादा दिन तक चलेगा।” अररिया में अभी हालात सामान्य अररिया के जोगबानी बाजार के रहने वाले मुकेश कुमार ने बताया कि सरकार ने अचानक नियम ला दिया है। अभी तो बाजारों पर इतना असर नहीं दिख रहा है, लेकिन आने वाले दो-चार दिनों में असर जरूर दिखेगा। सरकार को कीमत बढ़ाना चाहिए, 100 रुपए से ऊपर के सामान से हालत बिगड़ जाएंगे। ऐसे में छोटे-मोटे सामान भी खरीदना बेचना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि सिकटी के अनिल का कहना है कि उनकी बेटी विदा कर नेपाल के रानी बाजार जाएगी, लेकिन अब उसे क्या क्या दें, इस पर संकट खड़ा हो गया है। लोग पहले सामान जो भी देते थे, अलग से खर्च नहीं लगता था। अब टैक्स से सामान की कीमत और खर्च बढ़ गया है। मधुबनी में 10 से ज्यादा बाजारों में पसरा सन्नाटा मधुबनी जिले के माधवापुर, पिपरौन, हरिने, दुहवी, महीनाथपुर, खौना, जयनगर, लदनिया, लौकहा और लौकही बाजार पूरी तरह नेपाल के ग्राहकों पर निर्भर हैं, लेकिन शनिवार को इन बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। बॉर्डर पर सख्ती बढ़ने से नेपाली खरीदारों का आना लगभग बंद हो गया है, जिससे व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अगर नेपाल सरकार की यह नीति लंबे समय तक जारी रही, तो न सिर्फ भारतीय सीमावर्ती बाजार बल्कि नेपाल से जुड़े सभी व्यापारिक इलाके बुरी तरह प्रभावित होंगे। नेपाल में भी इस नियम का विरोध शुरू हो गया है। जनकपुरधाम के लोगों ने प्रदर्शन कर इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है। भारत और नेपाल के बीच वर्षों पुराना ‘बेटी-रोटी’ का रिश्ता भी इस फैसले से प्रभावित हो रहा है। शादी-ब्याह जैसे सामाजिक संबंधों में दिक्कतें सामने आने लगी हैं। जयनगर के ध्यानी महरा ने बताया, “आज ( 18 अप्रैल को) मेरी बेटी की शादी नेपाल में है। एक महीने पहले मैंने इसकी पूरी तैयारी कर ली थी। बेटी के लिए फर्नीचर का सामान खरीदा था। दहेज में पलंग देने की सोची थी। आज वही पलंग लेकर जा रहा था, लेकिन जटही बॉर्डर पर रोक दिया गया और 20 हजार रुपये टैक्स मांगा जा रहा है, जबकि पलंग की कीमत भी उतनी ही है।” हरिने गांव के भागीरथ झा और श्री नारायण साह ने बताया कि नए नियम के कारण सीमावर्ती बाजारों में भारी गिरावट आई है और नेपाली ग्राहकों का आना लगभग पूरी तरह बंद हो गया है। दो साल पहले से लागू है कानून नेपाल के एक अधिकारी के अनुसार, यह नियम पहले से (वर्ष 2081 नेपाली कैलेंडर) लागू है, लेकिन अब नेपाल के पीएम बालेन शाह के नेतृत्व में इसे सख्ती से लागू कराया जा रहा है। काठमांडू टाइम्स ने सरलाही के मुख्य जिला अधिकारी रामूराज कदरिया के हवाले से बताया कि बिना कस्टम ड्यूटी दिए सामान या गाड़ी चलाना गैर-कानूनी है और हम बस कानून लागू कर रहे हैं।

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