![]()
सारंडा के घने और दुर्गम जंगलों में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान के बीच सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी दीपक कुमार बालिबा कैंप पहुंचे। वहां की सुरक्षा व्यवस्था का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने करीब दो घंटे तक कैंप में रहकर 193 बटालियन के जवानों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने जवानों का मनोबल बढ़ाया। उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। अभियान की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों को समझने के बाद उन्होंने अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक भी की, जिसमें नक्सल विरोधी अभियान के अगले चरण की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि अभियान को और अधिक प्रभावी और तीव्र बनाया जाए। नक्सलियों को एक माह में आत्मसमर्पण की चेतावनी हेलीपैड पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्पेशल डीजी दीपक कुमार ने कहा कि सारंडा क्षेत्र को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने के लिए सुरक्षाबलों को एक माह का लक्ष्य दिया गया है। उन्होंने शीर्ष नक्सली नेता मिसिर बेसरा को आत्मसमर्पण करने की अपील करते हुए कड़ा संदेश दिया कि यदि वह निर्धारित समय सीमा के भीतर सरेंडर नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अब तक नक्सलियों की ओर से किसी तरह की सकारात्मक पहल नहीं हुई है, जिससे साफ है कि सुरक्षा बलों को और सख्ती से अभियान चलाना होगा। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में सर्च ऑपरेशन और तेज किए जाएंगे और जंगल के अंदर तक घुसकर कार्रवाई की जाएगी। अभियान के दौरान जवानों की सेहत पर भी फोकस दौरे के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे और अभियान की समीक्षा में शामिल हुए। इसी बीच कोबरा 205 बटालियन के जवान अनिल बिस्वाल, जो मलेरिया से पीड़ित थे, अचानक बेहोश हो गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तत्काल हेलीकॉप्टर से रांची भेजा गया। जहां उनका इलाज जारी है। बताया गया कि अभियान में शामिल कुल सात जवान बीमार हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नक्सल विरोधी अभियान के साथ-साथ जवानों के स्वास्थ्य और सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है, ताकि वे कठिन परिस्थितियों में भी पूरी क्षमता के साथ डटे रह सकें।

